भारतीय बाजारों और खुदरा दुकानों के ताजा आंकड़ों पर नजर डालें, तो इस समय अरहर की दाल (Arhar/Toor Dal) सबसे महंगी पड़ रही है। अरहर की दाल की कीमतें पिछले कुछ महीनों में बहुत तेजी से बढ़ी हैं और यह विभिन्न शहरों में 160 रुपये से लेकर 180 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रही है। प्रीमियम क्वालिटी की अरहर दाल के दाम तो कुछ जगहों पर इससे भी ऊपर चले गए हैं। अरहर दाल के बाद दूसरे नंबर पर उड़द की दाल (Urad Dal) है, जो लगभग 120 से 140 रुपये प्रति किलो के बीच मिल रही है। वहीं, इन तीनों में मूंग की दाल (Moong Dal) थोड़ी राहत दे रही है, जो बाजार में 100 से 115 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास उपलब्ध है। अरहर की दाल इस समय महंगाई के मामले में सबसे आगे है और आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही है।
क्यों महंगी हो रही है दाल?
अरहर की दाल के इतना महंगा होने के पीछे कई बड़े आर्थिक कारण हैं। सबसे मुख्य वजह है घरेलू उत्पादन (Domestic Production) में आई भारी गिरावट। पिछले कृषि सीजन में देश के प्रमुख अरहर उत्पादक राज्यों (जैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश) में मौसम की मार और बेमौसम बारिश की वजह से फसल को काफी नुकसान पहुंचा था। मांग के मुकाबले सप्लाई बहुत कम होने के कारण इसकी कीमतों में यह रिकॉर्ड तेजी देखी जा रही है। हालांकि, सरकार इस स्थिति को संभालने के लिए विदेशों (जैसे म्यांमार और अफ्रीकी देशों) से दाल का आयात (Import) भी कर रही है, लेकिन इसके बावजूद खुदरा बाजार में कीमतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
कब तक महंगी रहेगी दाल
व्यापारियों और बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि दालों की कीमतों में यह गरमाहट अगले कुछ समय तक जारी रह सकती है। जब तक खरीफ के नए सीजन की फसल बाजार में पूरी तरह से नहीं आ जाती, तब तक अरहर और उड़द की दालों के दाम ऊंचे बने रहने की आशंका है। सरकार कीमतों को नियंत्रित करने के लिए जमाखोरों पर नकेल कस रही है और बफर स्टॉक से भी दालें जारी कर रही है, ताकि आम उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत मिल सके। नेशनल को-ऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन (NCCF) और नैफेड (NAFED) के जरिए भी रियायती दरों पर 'भारत दाल' ब्रांड के तहत सस्ती दालें बेची जा रही हैं, जो आम जनता के लिए इस दौर में एक बड़ा सहारा बनी हैं।
