भारत सरकार देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त करने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में, विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून 2026) के बेहद खास मौके पर देश की राजधानी दिल्ली में एक नया इतिहास रचा गया है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी द्वारा नई दिल्ली के पूसा रोड स्थित 'इंडियन ऑयल रिटेल आउटलेट' (IndianOil Retail Outlet, Pusa Road, New Delhi) पर देश के पहले उच्च-मिश्रण वाले इथेनॉल ईंधन 'E85' को लॉन्च किया जा रहा है। यह लॉन्चिंग शाम 6:00 बजे निर्धारित की गई है, जो भारत के ट्रांसपोर्ट सेक्टर और पर्यावरण नीति के लिए एक गेम-चेंजर साबित होने वाली है।
इससे लोगों को कैसे होगा फायदा?
अब आपके मन में यह सवाल जरूर उठ रहा होगा कि आखिर यह E85 क्या है और इससे आम जनता को क्या फायदा होगा? आसान शब्दों में कहें तो E85 एक ऐसा ग्रीन फ्यूल है जिसमें 85% इथेनॉल और सिर्फ 15% पेट्रोल मिलाया जाता है। यह ईंधन पूरी तरह से 'फ्लेक्स फ्यूल वाहनों' (Flex Fuel Vehicles) के लिए तैयार किया गया है। इस कदम के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक बेहद खूबसूरत विजन है कि देश के हर 'अन्नदाता' (किसान) को अब 'ऊर्जादाता' भी बनाया जाए। चूंकि इथेनॉल को मुख्य रूप से गन्ने, मक्के और अनाज के अवशेषों से तैयार किया जाता है, इसलिए इस ईंधन की मांग बढ़ने से सीधे तौर पर हमारे देश के किसानों की आमदनी में भारी इजाफा होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जबरदस्त मजबूती मिलेगी।
पर्यावरण और जेब के लिहाज से भी इसके फायदे बेमिसाल हैं। सामान्य पेट्रोल की तुलना में E85 ईंधन के इस्तेमाल से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन (Greenhouse Gas Emissions) में पूरे 61% तक की भारी कमी आएगी। यानी यह हमारे शहरों की हवा को साफ रखने में सबसे मददगार साबित होगा। इसके अलावा, यह ईंधन सामान्य पेट्रोल के मुकाबले काफी सस्ता भी होगा, जिससे वाहन चालकों की जेब पर पड़ने वाला बोझ कम होगा। सबसे बड़ी बात यह है कि यह पूरी तरह से 100% आत्मनिर्भर ईंधन है। भारत के खेतों से निकलकर सड़कों तक पहुंचने वाला यह E85 ईंधन न सिर्फ प्रदूषण को कम करेगा, बल्कि विदेशों से महंगे कच्चे तेल के आयात पर हमारी निर्भरता को घटाकर देश की ऊर्जा सुरक्षा को एक नया आयाम देगा।
देशभर में खुलेंगे 5000 पेट्रोल पंप
भारत में ईंधन के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सरकार अब पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल को तेजी से बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है। इसी दिशा में देशभर में करीब 5,000 एथेनॉल पंप खोलने की योजना पर काम चल रहा है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल आयातित कच्चे तेल पर खर्च कम होगा बल्कि किसानों को भी अतिरिक्त आय का नया स्रोत मिलेगा।
एथेनॉल गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है, इसलिए यह एक घरेलू और नवीकरणीय ईंधन माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को तेजी से बढ़ाया है और अब अगला कदम सीधे एथेनॉल आधारित ईंधन की पहुंच को आम लोगों तक पहुंचाना है। इससे देश के ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
