अक्सर देखा गया है कि कई कर्मचारी टैक्स बचाने के लिए अपने माता-पिता, पत्नी या किसी करीबी रिश्तेदार के नाम पर फर्जी रेंट रिसीट (किराया रसीद) जमा कर देते हैं। हालांकि कानूनन अपने माता-पिता को किराया देना गलत नहीं है, बशर्ते वे उस आय पर टैक्स भरें और वास्तविक लेनदेन हुआ हो। लेकिन अब नए नियमों के जरिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि क्या किरायेदार और मकान मालिक के बीच वाकई में 'किरायेदार-मालिक' का व्यावसायिक रिश्ता है या यह सिर्फ टैक्स बचाने का एक जुगाड़ है।
क्या है फॉर्म 124 और क्यों है जरूरी?
आयकर विभाग ने एक नया फॉर्म 124 पेश किया है, जिसे अब टैक्स छूट का दावा करते समय जमा करना होगा। इस फॉर्म में आपको न केवल मकान मालिक का पैन (PAN) नंबर देना होगा, बल्कि यह भी बताना होगा कि वह आपका रिश्तेदार है या नहीं। यदि मकान मालिक आपका कोई सगा संबंधी है, तो विभाग उस लेनदेन की गहराई से जांच कर सकता है। विभाग यह देखना चाहता है कि क्या किराया बाजार दर (Market Rate) के हिसाब से दिया जा रहा है और क्या मकान मालिक उस किराए को अपनी 'अन्य स्रोतों से आय' (Income from Other Sources) में दिखा रहा है।
किन शहरों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
यह नियम विशेष रूप से दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे मेट्रो शहरों में रहने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। इन शहरों में मकान किराया काफी अधिक होता है, जिसके कारण HRA की राशि भी बड़ी होती है। विभाग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा ले रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं एक ही पते पर कई लोग तो HRA क्लेम नहीं कर रहे हैं या फिर पैन कार्ड के जरिए होने वाले लेनदेन में कोई विसंगति तो नहीं है।
टैक्स नोटिस से कैसे बचें?
अगर आप वाकई में किराए पर रह रहे हैं और सही तरीके से टैक्स छूट का लाभ उठाना चाहते हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। सबसे पहले, मकान मालिक के साथ एक वैध रेंट एग्रीमेंट (Rent Agreement) जरूर बनवाएं। किराया हमेशा बैंक ट्रांसफर या चेक के माध्यम से दें ताकि आपके पास भुगतान का डिजिटल प्रमाण रहे। यदि आपका मकान मालिक आपका रिश्तेदार है, तो सुनिश्चित करें कि वह अपने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में उस किराए की जानकारी दे रहा है।
