India VIX यानी इंडिया वोलैटिलिटी इंडेक्स शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव और निवेशकों के बीच जोखिम उठाने की भावना को व्यक्त करने का मैथमेटिकल तरीका है। भारत ही नहीं, दुनिया के हर शेयर बाजार में VIX की बेहद अहम भूमिका होती है। भारत में NSE VIX को हैंडल करता है। विक्स रिलल टाइम में निवेशकों को बताता है कि सामूहिक रूप से सभी निवेशक बाजार में कितनी वोलैटिलिटी की अपेक्षा कर रहे हैं। इसके अलावा क्या वे बाजार में निवेश का जोखिम उठाने को तैयार हैं या नहीं हैं। भारत में NSE ने 2003 में इसकी शुरुआत की और यह यह अगले 30 दिनों में मार्केट के लिए वोलैटिलिटी की रेंज देता है।
NIFTY जैसे प्राइस इंडेक्स जहां इक्विटी प्राइस मूवमेंट के आधार पर मार्केट की दिशा को ट्रैक करते हैं। वहीं, इंडिया VIX सिर्फ वोलैटिलिटी पर फोकस करता है। यह स्ट्राइक प्राइस, स्टॉक का मार्केट प्राइस, एक्सपायरी का समय, रिस्क-फ्री रेट और वोलैटिलिटी जैसे वैरिएबल को ध्यान में रखते हुए ब्लैक एंड स्कोल्स मॉडल का इस्तेमाल करके अपनी वैल्यू निकालता है। असल में, यह इन्वेस्टर्स को इन्वेस्टमेंट के फैसले लेने से पहले मार्केट के वोलैटिलिटी को समझने में मदद करता है।
क्यों अहम होता है ये इंडेक्स
इंडिया निफ्टी VIX अलग-अलग सेगमेंट के इन्वेस्टर्स के लिए एक भरोसेमंद इंडिकेटर है। इंट्राडे ट्रेडर्स के लिए, यह मार्केट के उतार-चढ़ाव के बारे में बताता है, रिस्क असेसमेंट में मदद करता है और स्टॉप-लॉस लेवल तय करता है। वहीं, लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स इसका इस्तेमाल संभावित नुकसान से बचने और सोच-समझकर इन्वेस्टमेंट के फैसले लेने के लिए करते हैं।
दूसरी तरफ ऑप्शन ट्रेडर्स को मार्केट के उतार-चढ़ाव के आधार पर ऑप्शन खरीदने या बेचने का फैसला करने में यह बहुत कीमती लगता है। पोर्टफोलियो और म्यूचुअल फंड मैनेजर अपनी इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजी को ऑप्टिमाइज़ करने के लिए इसकी इनसाइट्स का इस्तेमाल करते हैं, और हाई और लो-बीटा स्टॉक्स में से चुनते हैं।
कैसे काम करता है VIX
VIX की वैल्यू के हिसाब देखें, तो अगर VIX 15 है, तो निवेशक सालाना आधार पर कीमतों में 15% की वोलौटिलिटी की अपेक्षा करते हैं। यह डेटा असल में कई फैक्टर से मिलकर तय होता है। इसमें सबसे अहम इकोनॉमिक डेटा होता है। इसमें GDP ग्रोथ, महंगाई दर, इंटरेस्ट रेट और कंज्यूमर खर्च के पैटर्न जैसे इकोनॉमिक इंडिकेटर मार्केट में उतार-चढ़ाव तय करने में बहुत ज़रूरी हैं। इन इकोनॉमिक फैक्टर में बदलाव से इन्वेस्टर के भरोसे पर असर पड़ सकता है और स्टॉक मार्केट में उतार-चढ़ाव आ सकता है, जिससे इंडिया के VIX लेवल पर असर पड़ सकता है।
जियोपॉलिटिकल टेंशन, ट्रेड विवाद और प्राकृतिक आपदा जैसी ग्लोबल घटनाएं मार्केट सेंटिमेंट पर काफी असर डालती हैं और इंडियन स्टॉक मार्केट में उतार-चढ़ाव ला सकती हैं। ग्लोबल इवेंट से पैदा होने वाली अनिश्चितता अक्सर ट्रेडिंग एक्टिविटी और उतार-चढ़ाव को बढ़ाती है, जो इंडिया VIX इंडेक्स में दिखता है। इसके अलावा स्टॉक मार्केट में लिस्टेड कंपनियों की अर्निंग्स रिपोर्ट सीधे इन्वेस्टर सेंटिमेंट और मार्केट के उतार-चढ़ाव पर असर डालती हैं। पॉजिटिव या नेगेटिव अर्निंग्स सरप्राइज से स्टॉक की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव हो सकता है, जिससे इंडिया VIX पर असर पड़ता है क्योंकि इन्वेस्टर कॉर्पोरेट परफॉर्मेंस के आधार पर अपने रिस्क की सोच को एडजस्ट करते हैं।
TIMES NOW Navbharat पर यह भी पढ़ें : बाजार की सुस्ती देख रोक रहे SIP? रुकिए! पहले जान लें आंकड़ों की कहानी और इतिहास की गवाही, वरना होगा बड़ा अफसोस
