What is Stridhan, supreme court judgments on stridhan: देश में लोकसभा चुनाव चल रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान मंगलसूत्र खूब चर्चा हो रही है। इस बीच स्त्रीधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (25 अप्रैल 2024) को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी महिला का स्त्रीधन उसकी संपत्ति है। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने स्त्रीधन को लेकर शादी विवाद पर सुनवाई करते हुए कहा कि महिला को अपने स्त्रीधन पर पूरा अधिकार है। वह स्त्रीधन को अपनी इच्छा से खर्च कर सकती है, बेच सकती है। चाहे वह संपत्ति शादी से पहले की हो या बाद की। आइए जानते हैं आखिर स्त्रीधन क्या होता है?
क्या होता है स्त्रीधन (What is Stridhan)?
हिंदू उत्तराधिकार एक्ट 1956 की धारा 14 और हिंदू विवाह एक्ट 1955 की धारा 27 के तहत हिंदू महिलाओं को स्त्रीधन का अधिकार है चाहे उसे शादी से पहले मिला हो या शादी के बाद मिला हो। स्त्रीधन का अर्थ किसी महिला को बचपन से लेकर शादी के बाद तक जो चीजें मिलती हैं। वह उसका अपना धन माना जाता है। कैश, गहने, तोहफे, जमीन, बचत समेत जो भी महिलाओं को मिला है वह स्त्रीधन कहलाता है। स्त्रीधन पर न सिर्फ शादीशुदा महिलाओं का अधिकार होता है बल्कि शादी से पहले मिले तोहफे, सोना, कैश, बचत और अन्य प्रॉपर्टी भी इसके दायरे में आते हैं। कानून के मुताबिक महिला की इच्छा के बिना उसका पति या कोई रिश्तेदार न तो ले सकता है और न ही बेच सकता है। महिला को अपने पास रखने का पूरा अधिकार है। वह जब चाहे किसी को दे सकती है या बेच सकती है। कानूनी रूप से इस पर रोक नहीं है। हालांकि यह कानून सिर्फ हिंदू धर्म हैं, इस्लाम में कानून नहीं है।
दहेज और स्त्रीधन में अंतर
स्त्रीधन और दहेज अंतर है। किसी भी स्त्री को प्रेमस्वरूप यानी गिफ्ट या दान में दी गई चीजें स्त्रीधन कहलाती है। शादी में लड़की पक्ष से मांगा गया धन दहेज कहलाता है। एक तरह से कहा जाए तो यह ससुराल पक्ष वाले इच्छा के विरूद्ध लेते हैं। इसलिए दहेज प्रताड़ना के कई केस कोर्ट में दर्ज हैं।
