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कैसे होती है ठगी
इस स्कीम में, पहले चरण में ('पंप') धोखेबाज कम कीमत वाले शेयरों, खासकर छोटी या कम कारोबार वाली कंपनियों (पेनी स्टॉक्स) के शेयर खरीदते हैं। फिर, वे सोशल मीडिया, व्हाट्सएप, फर्जी खबरें, या टिप्स के जरिए झूठी जानकारी फैलाते हैं कि यह शेयर जल्द ही बहुत मुनाफा देगा।
इससे शेयर की मांग बढ़ती है और कीमत तेजी से ऊपर जाती है। अनजान निवेशक इस उछाल को देखकर शेयर खरीदने लगते हैं, जिससे कीमत और बढ़ती है।
ऐसे होता है नुकसान
दूसरे चरण में ('डंप'), जब शेयर की कीमत चरम पर पहुंचती है, धोखेबाज अपने सारे शेयर बेच देते हैं, जिससे कीमत अचानक गिर जाती है। इस समय तक आम निवेशक, जो ऊंची कीमत पर शेयर खरीद चुके होते हैं, भारी नुकसान उठाते हैं। सेबी ने हाल के वर्षों में कई ऐसी स्कीम्स का पर्दाफाश किया है और दोषियों पर जुर्माना व प्रतिबंध लगाए हैं।
निवेशकों को सलाह
निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे शेयर बाजार में निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, प्रबंधन और बाजार विश्वसनीयता की जांच करें। सोशल मीडिया पर मिलने वाली 'गारंटी रिटर्न' वाली टिप्स से बचें और सेबी-पंजीकृत सलाहकारों से मार्गदर्शन लें। जागरूकता और सतर्कता ही ऐसी ठगी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
डिस्क्लेमर : यहां निवेश की सलाह नहीं दी गयी है। इक्विटी मार्केट में जोखिम होता है, इसलिए निवेश अपने जोखिम पर करें। निवेश करने से पहले एक्सपर्ट की राय जरूर लें।
