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एक ही FD में सारा पैसा ब्लॉक करने की भूल न करें! जानें क्या है FD Laddering और कैसे देगा डबल फायदा

अपनी पूरी बचत को एक ही फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में फंसाने के बजाय 'FD लैडरिंग' की स्मार्ट तकनीक अपनाएं। जानिए कैसे यह आसान रणनीति आपको ज्यादा रिटर्न, लिक्विडिटी और वित्तीय सुरक्षा का डबल फायदा देती है।

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क्या है FD Laddering और कैसे देगा डबल फायदा

भारत में पारंपरिक और सुरक्षित निवेश के लिए आज भी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को सबसे भरोसेमंद माध्यम माना जाता है। ज्यादातर लोग जब भी अपने पास एकमुश्त (Lump sum) रकम देखते हैं, तो उसे एक ही FD में 3, 5 या 10 साल के लिए जमा कर देते हैं। लेकिन वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि अपनी पूरी बचत को किसी एक ही एफडी में लंबे समय के लिए ब्लॉक कर देना समझदारी भरा फैसला नहीं है। बाजार में ब्याज दरों के उतार-चढ़ाव और अचानक आई पैसों की जरूरत (इमरजेंसी) के समय यह तरीका नुकसानदायक साबित हो सकता है। इस समस्या से बचने और अपनी एफडी से अधिकतम लाभ कमाने के लिए 'FD लैडरिंग' (FD Laddering) एक बेहतरीन तकनीक है।

क्या है फिक्स्ड डिपॉजिट लैडरिंग?

FD लैडरिंग वास्तव में एक ऐसी निवेश रणनीति है, जिसमें आप अपने कुल बजट को एक बड़ी एफडी में लगाने के बजाय अलग-अलग मैच्योरिटी पीरियड (अवधि) की कई छोटी-छोटी एफडी में बांट देते हैं। आसान शब्दों में समझें तो, मान लीजिए आपके पास 5 लाख रुपये हैं। आप इन पैसों की 5 लाख रुपये की एक सिंगल एफडी बनाने के बजाय 1-1 लाख रुपये की 5 अलग-अलग एफडी बनवा सकते हैं, जिनकी अवधि 1 साल, 2 साल, 3 साल, 4 साल और 5 साल होगी।

इस रणनीति का सबसे बड़ा पहला फायदा यह है कि इससे आपके पास हमेशा 'लिक्विडिटी' (नकदी की उपलब्धता) बनी रहती है। जब आपकी पहली एफडी 1 साल बाद पूरी होगी, तो आपको पैसे मिल जाएंगे। अगर आपको तब पैसों की जरूरत है, तो आप उस रकम का इस्तेमाल कर सकते हैं। और अगर पैसे की तुरंत जरूरत नहीं है, तो आप उस 1 साल वाली एफडी को फिर से 5 साल के लिए री-इन्वेस्ट (Re-invest) कर सकते हैं। इसी तरह हर साल आपकी एक न एक एफडी मैच्योर होती रहेगी और आपके हाथों में लगातार पैसे आते रहेंगे।

क्या है इसका फायदा?

FD लैडरिंग का दूसरा सबसे बड़ा फायदा ब्याज दरों के उतार-चढ़ाव (Interest Rate Risk) से सुरक्षा मिलना है। अगर भविष्य में बैंक अपनी एफडी की ब्याज दरों में बढ़ोतरी करते हैं, तो आपको पूरी एफडी टूटने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। हर साल जब आपकी पुरानी एफडी मैच्योर होगी, तो आप उस पैसे को नई और ऊंची ब्याज दरों पर दोबारा फिक्स कर सकते हैं। इसके विपरीत, यदि आप एक ही बार में लंबे समय के लिए एफडी करवा देते हैं, तो ब्याज दरें बढ़ने पर भी आपको पुरानी कम दरों से ही संतोष करना पड़ता है।

साथ ही, यह रणनीति आपको समय से पहले एफडी तुड़वाने पर लगने वाली पेनल्टी (Pre-mature Withdrawal Penalty) से भी बचाती है। अगर कभी अचानक मेडिकल या पारिवारिक इमरजेंसी आ जाए, तो आपको अपनी पूरी 5 लाख की एफडी तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आप केवल उतनी ही छोटी एफडी को भुना सकते हैं जितनी आपको जरूरत है, जिससे आपकी बाकी एफडी पर ब्याज मिलना जारी रहता है। संक्षेप में कहें तो, FD लैडरिंग आपकी बचत को सुरक्षित रखते हुए आपको बेहतर रिटर्न और आजादी दोनों प्रदान करती है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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