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Financial Freedom क्या है? लाखों की सैलरी भी पड़ रही कम, कैसे मिलेगी पैसों की तंगी से आजादी?

फाइनेंशियल फ्रीडम का मतलब ज्यादा कमाई नहीं। असल में यह पूरी तरह अलग कॉन्सेप्ट है। इसमें कमाई से ज्यादा कई दूसरे फैक्टर होते हैं, जिनसे तय होता है कि आप कितनी रकम पर फाइनेंशियली फ्री हो सकते हैं।

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बचत सबसे ज्यादा जरूरी

Financial Freedom यानी वित्तीय आजादी को अक्सर सोशल मीडिया पर महंगी कार, आलीशान घर, विदेश यात्राओं और लग्जरी लाइफ से जोड़कर दिखाया जाता है। लेकिन असल में इसका मतलब इससे बिल्कुल अलग है। Financial Freedom वह स्थिति है, जब आपकी बचत, निवेश और वैकल्पिक आय (Passive Income) इतनी हो जाए कि आपके जरूरी खर्चों के लिए हर महीने नौकरी की सैलरी पर निर्भर रहना जरूरी न रहे। सरल शब्दों में कहें तो, जब आपका पैसा आपके लिए काम करने लगे और आपको सिर्फ पैसे के लिए काम करने की मजबूरी न रहे, वही फाइनेंशियल फ्रीडम है।

ज्यादा इनकम का मतलब आजादी नहीं

किसी व्यक्ति की सैलरी ₹2 लाख महीना हो सकती है, लेकिन अगर उसका खर्च ₹1.90 लाख है, तो उसकी वित्तीय स्थिति (Financial Position) उतनी मजबूत नहीं है। दूसरी तरफ ₹1 लाख कमाने वाला व्यक्ति अगर नियमित तौर पर ₹40,000 निवेश कर रहा है, तो वह धीरे-धीरे आर्थिक आजादी की तरफ बढ़ रहा है। आय के साथ बढ़ता जीवनशैल का खर्च (Lifestyle Creep) सबसे बड़ी समस्या है। सैलरी बढ़ते ही बड़ा घर, महंगी कार, ज्यादा EMI और महंगी छुट्टियां शुरू हो जाती हैं। आमदनी बढ़ती है, लेकिन बचत का हिस्सा नहीं बढ़ता। नतीजा यह होता है कि व्यक्ति जितना ज्यादा कमाता है, उतने ही ज्यादा खर्चों का आदी होता जाता है।

वित्तीय आजादी का गणित आसान

Financial Freedom का एक लोकप्रिय तरीका Rule of 25 है। इसके मुताबिक आपका लक्ष्य कॉर्पस आपके सालाना जरूरी खर्च का करीब 25 गुना होना चाहिए।

मान लीजिए आपके परिवार का जरूरी खर्च हर महीने ₹1 लाख है। इस तरह सालाना खर्च ₹12 लाख रुपये हुआ, तो आपकी फाइनेंशियल फ्रीडम का एक सिंपल फिगर

₹12 लाख × 25 = ₹3 करोड़ रुपये होगा। इसका मतलब है कि आप इतनी रकम जमा कर लें, जिससे आप अगले 25 साल तक अपनी मौजूदा लाइफस्टाइल को मेंटेन कर पाएं।

सिर्फ बचत ही काम नहीं

अगर कोई फाइनेंशियल फ्रीडम के अपने फिगर तक पहुंच जाता है, तो यहां पहुंचते ही काम पूरा नहीं हो जाता है। बल्कि, अगला पड़ाव आता है उस फंड को ऐसे निवेश में बदलना, जो समय के साथ बढ़ता रहे और आपको हर महीने के खर्च जितना पैसा देता रहे। मसलन, 3 करोड़ के निवेश का कॉर्पस बनने पर 4% सालाना निकासी के आधार पर करीब ₹12 लाख सालाना खर्च निकालने का सिद्धांत बनाया जाता है। हालांकि, यह कोई गारंटी नहीं है। वास्तविक लक्ष्य तय करते समय महंगाई, टैक्स, निवेश रिटर्न, उम्र और खासकर मेडिकल खर्च को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

सैलरी से ज्यादा सेविंग अहम

Financial Freedom हासिल करने में सिर्फ यह मायने नहीं रखता कि आप कितना कमाते हैं। ज्यादा अहम यह है कि आप कितना बचाकर निवेश करते हैं। ₹30 लाख सालाना कमाने वाला व्यक्ति अगर पूरा पैसा खर्च कर देता है, तो वह शायद कभी वित्तीय आजादी हासिल नहीं कर पाए। वहीं, वहीं ₹10 लाख कमाने वाला व्यक्ति अगर लगातार 40% निवेश करता है, तो वह वित्तीय आजादी का मजबूत आधार बना सकता है।

ये गलती करने से बचें

कई बार लोग भविष्य की आर्थिक आजादी के लिए अपने खर्चों को इतना कम कर देने की कोशिश करते हैं कि एक सामान्य जीवन भी नहीं जी पाते हैं। वहीं, दूसरी बड़ी गलती है निवेश से जुड़ी होती है, जिसमें बचत को जल्दी बड़े फंड में बदलने के लिए अत्यधिक जोखिम वाले तरीकों में निवेश करना होता है। मिसाल के तौर पर क्रिप्टो में ट्रेड, लेवरेज पर ट्रेडिंगी, टिप्स या अटकलों के आधार पर निवेश असल में पूरी पूंजी भी खत्म कर सकते हैं। लिहाजा, बचत को जब निवेश करें, तो उसकी सुरक्षा का भी ध्यान रखें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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