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पैसे से बनेगा पैसा, RD के साथ अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग बनाएं सुपरहिट

अगर आप एक सुरक्षित, स्थिर और अनुशासित निवेश की तलाश में हैं तो रिकरिंग डिपॉजिट एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यह न केवल बचत की आदत बनाता है, बल्कि भविष्य के छोटे-बड़े लक्ष्यों को पूरा करने में भी मदद करता है।

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RD के साथ फाइनेंशियल प्लानिंग (Photo: iStock)

Recurring Deposit: निवेश की शुरुआत करने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है यही होती है कि नियमित बचत कैसे की जाए और जोखिम को कम कैसे किया जाए। ठीक इसी स्थिति के लिए रिकरिंग डिपॉजिट (RD) आपके लिए एक वरदान साबित हो सकती है। रिकरिंग डिपॉजिट (RD) एक आसान और सुरक्षित विकल्प माना जाता है। यह खासकर उन लोगों के लिए बेहतर है जो हर महीने छोटी-छोटी रकम बचाकर भविष्य के लिए फंड तैयार करना चाहते हैं।

भविष्य के लिए फंड होगा तैयार

रिकरिंग डिपॉजिट में आप एक निश्चित अवधि के लिए हर महीने तय राशि जमा करते हैं। यह अवधि आमतौर पर 6 महीने से लेकर 10 साल तक हो सकती है। जमा की गई रकम पर बैंक पूर्व-निर्धारित ब्याज दर देता है, जिससे मैच्योरिटी पर एकमुश्त राशि मिलती है। भारत में अधिकांश बैंक और डाकघर यह सुविधा देते हैं। उदाहरण के तौर पर State Bank of India जैसे बड़े बैंक में भी RD की सुविधा उपलब्ध है।

निवेश के लिए रिकरिंग डिपॉजिट को चुनने से पहले इसके प्रमुख फायदों को भी जानना चाहिए-

RD निवेश के प्रमुख फायदे

सुरक्षित निवेश

RD पर रिटर्न फिक्स होता है, इसलिए बाजार के उतार-चढ़ाव का असर नहीं पड़ता। यह शेयर बाजार की तुलना में कम जोखिम वाला विकल्प है।

नियमित बचत की आदत

हर महीने एक तय रकम जमा करने से अनुशासन बनता है और अनावश्यक खर्च पर नियंत्रण रहता है। यानी आरडी के साथ एक नियमित बचत की आदत बनती है।

छोटी राशि से शुरुआत

आप बहुत कम राशि, जैसे 500 रुपए या 1000 रुपए प्रतिमाह से भी शुरुआत कर सकते हैं। यह मध्यम आय वर्ग के लिए सुविधाजनक है, जो हर महीने एक बड़ी राशि निवेश नहीं कर सकते।

सुनिश्चित रिटर्न

आरडी को लेकर निवेश के समय ही आपको पता होता है कि मैच्योरिटी पर कितनी राशि मिलेगी। इस तय राशि के साथ भविष्य की योजना बनाना आसान होता है।

लोन सुविधा

कुछ बैंक RD के बदले लोन या ओवरड्राफ्ट की सुविधा भी देते हैं। यानी इस निवेश के साथ भविष्य में पैसे का अचानक जरूरत का भी समाधान मौजूद होगा।

हालांकि ध्यान रखें कि RD पर मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल होता है और समय से पहले तोड़ने पर पेनल्टी लग सकती है। इसलिए अवधि और राशि तय करते समय अपनी वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखें।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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