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ईरान ने क्या कहा कि कच्चा तेल हुआ धड़ाम? समझें 1 डॉलर सस्ता होने पर भारत को कितना फायदा

भारत के लिए बड़ी राहत की खबर है। कच्चे तेल की कीमत में लगातार गिरावट आ रही है। आज भी कीमत में बड़ी कमी हुई है। यह कमी ईरान के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उसने कहा है कि "गैर-दुश्मन" जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर सकते हैं। यानी के होर्मुज के जरिये गुजरने वाले तेल और गैस के जहाजों को ईरान कोई बाधा नहीं पहुंचाएगा।

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कच्चा तेल

Crude Oil Price today: भारत के लिए बड़ी राहत की खबर है। बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में लगभग 5% की बड़ी गिरावट आई है। तेल की कीमतों में गिरावट के पीछे ईरान का एक बयान है। ईरान ने कहा है कि "गैर-दुश्मन" जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर सकते हैं। यानी के होर्मुज के जरिये गुजरने वाले तेल और गैस के जहाजों को कोई बाधा नहीं पहुंचाएगा। अमेरिका के युद्ध के दौरान ईरान ने कई जहाजों को मिसाइल से निशाना बनया था। इसके बाद इस अहम रूट से जहाजों की आवाजाही बिल्कुल बंद हो गई थी, जिससे कच्चे तेल की कीमत में बड़ा उछाल आया था। अब ईरान द्वारा हरी झंडी मिलने से कच्चे तेल में बड़ी गिरावट आई है।

ईरान ने क्या बयान दिया है?

मंगलवार को जारी एक बयान में, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के मिशन ने कहा कि जहाज इस जलमार्ग से "सुरक्षित मार्ग" का लाभ उठा सकते हैं, "बशर्ते कि वे ईरान के खिलाफ आक्रामकता की किसी भी कार्रवाई में न तो हिस्सा लें और न ही उसका समर्थन करें, और साथ ही घोषित सुरक्षा और संरक्षा नियमों का पूरी तरह से पालन करें।" इसके साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में सीजफायर (युद्धविराम) की उम्मीदें भी बढ़ी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दोहराया कि बातचीत चल रही है, और रिपोर्टों से पता चला कि वॉशिंगटन ने युद्ध खत्म करने के लिए 15-सूत्रीय योजना साझा की है। इसका असर भी कच्चे तेल की कीमत पर हुआ है। युद्ध खत्म होने की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमत में बड़ी गिरावट आई है।

आज क्रूड ऑयल की क्या है कीमत?

इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का मई कॉन्ट्रैक्ट $98.87 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था, जो इसके पिछले बंद भाव से 5.59% कम था। इसी तरह, NYMEX पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट का मई कॉन्ट्रैक्ट 4.33% गिरकर $88.31 प्रति बैरल पर आ गया है। नेचुरल गैस और गैसोलिन में भी बड़ी गिरावट है।

भारत के लिए कितनी बड़ी राहत?

कच्चे तेल की औसत कीमत में 1 डॉलर प्रति बैरल होने वाली हर वृद्धि, भारत के सालाना तेल आयात बिल को लगभग 1.4 से 2 अरब डॉलर बढ़ा देती है। ऐसा इसलिए कि भारत अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी तेल आयात करता है। तेल की कीमतों में उछाल का सबसे दर्दनाक असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है। जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो इसका सीधा असर महंगाई (Inflation) पर दिखता है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि कच्चे तेल के भाव में 10% की तेजी आने से खुदरा महंगाई (Retail Inflation) में 0.40% और थोक महंगाई में 0.80% तक का इजाफा हो जाता है। वहीं एक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत की GDP ग्रोथ लगभग 0.5 प्रतिशत कम हो सकती है। यह इस बात को दिखाता है कि देश आयातित तेल पर कितना ज़्यादा निर्भर है और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में होने वाले उतार-चढ़ाव का उस पर कितना असर पड़ता है।

Alok Kumr
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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