LPG Supply Disruption Impact: पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और ईरान पर अमेरिका-इजरायल हमले के बाद एलपीजी (LPG) आपूर्ति में व्यवधान ने भारत की डिब्बाबंद खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों ( Packaged Food Companies) की चिंता बढ़ा दी है। बालाजी वेफर्स, गोपाल स्नैक्स और कम्पास इंडिया जैसी कंपनियों ने कहा है कि वे इस स्थिति का सामना करने के लिए वैकल्पिक ईंधनों और इलेक्ट्रिक उपकरणों का विकल्प तलाश रही हैं।
ईंधन की आपूर्ति में कमी
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक बालाजी वेफर्स के संस्थापक और प्रबंध निदेशक चंदू विरानी ने बताया कि गुजरात में इस महीने उन्हें केवल आधी गैस की आपूर्ति मिली है। यह कमी सीधे पश्चिम एशिया में उत्पन्न हालात से जुड़ी है। विरानी ने कहा कि कंपनी ईंधन को बदलने और तरल विकल्पों का उपयोग करने पर विचार कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि अगले दो-तीन दिनों में इस पर अंतिम फैसला ले लिया जाएगा।
पैकेजिंग लागत में वृद्धि
कंपनियों को ईंधन संकट के अलावा पैकेजिंग लागत में भी बढ़ोतरी का सामना करना पड़ रहा है। चंदू विरानी ने कहा कि प्लास्टिक की कीमतों में करीब 100 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। इससे उत्पाद की कुल लागत बढ़ गई है, जिससे कंपनियों के लिए उत्पादन और वितरण की चुनौतियां और बढ़ गई हैं।
कम्पास इंडिया का ध्यान सेवाओं पर
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक कम्पास इंडिया के मुख्य खानपान अधिकारी अर्जयो बनर्जी ने कहा कि उनकी प्राथमिकता है कि स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और विनिर्माण क्षेत्रों में भोजन सेवाएं लगातार जारी रहें। उन्होंने बताया कि कंपनी सरकार और संबंधित निकायों के संपर्क में है ताकि स्थिति का बेहतर समाधान खोजा जा सके।
गोपाल स्नैक्स ने अपनाया जैव कोयला
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक गोपाल स्नैक्स ने अपने मोडासा और नागपुर प्लांट में ‘जैव कोयले’ का उपयोग शुरू किया है। कंपनी ने कहा कि इसका उद्देश्य एक ही ईंधन स्रोत पर निर्भरता कम करना है और उत्पादन में स्थिरता बनाए रखना है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कदम आपूर्ति संकट से निपटने और उत्पादन को प्रभावित न होने देने के लिए रणनीतिक रूप से उठाया गया है।
वैकल्पिक ऊर्जा की दिशा
इन कंपनियों का मानना है कि एलपीजी की कमी जैसी परिस्थितियों में इलेक्ट्रिक उपकरण और जैव ईंधन जैसी वैकल्पिक ऊर्जा का उपयोग भविष्य में उत्पादन को सुरक्षित रखने में मदद करेगा। विशेषज्ञों का भी मानना है कि यह कदम न केवल उत्पादन लागत को नियंत्रित करेगा, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी होगा।
भविष्य की रणनीतियां
सभी कंपनियां वर्तमान संकट से निपटने के लिए सरकारी निकायों और आपूर्ति कंपनियों से लगातार संपर्क में हैं। चंदू विरानी ने कहा कि बालाजी वेफर्स अगले कुछ दिनों में वैकल्पिक ईंधन पर अंतिम फैसला करेगी। गोपाल स्नैक्स और कम्पास इंडिया भी अपने संयंत्रों में नए विकल्प अपनाने की दिशा में सक्रिय हैं। इस तरह, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और एलपीजी आपूर्ति में व्यवधान ने भारतीय डिब्बाबंद खाद्य कंपनियों को वैकल्पिक ऊर्जा विकल्प अपनाने के लिए मजबूर कर दिया है।
