भारतीय रेलवे से सफर करने वाले करोड़ों रेल यात्रियों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। अक्सर त्योहारों, छुट्टियों या शादियों के सीजन में ट्रेनों में कंफर्म टिकट मिलना लोहे के चने चबाने जैसा हो जाता है। ऐसे में लोग इस उम्मीद में वेटिंग टिकट बुक करा लेते हैं कि शायद चार्ट बनने तक उनका टिकट कंफर्म हो जाए। लेकिन कई बार यह वेटिंग लिस्ट 300, 400 या उससे भी पार चली जाती है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या को देखते हुए रेलवे बोर्ड ने एक ऐतिहासिक और ठोस नीतिगत फैसला लिया है। अब रेलवे ट्रेनों में लंबी-लंबी वेटिंग लिस्ट के झंझट को पूरी तरह से खत्म करने जा रहा है।
नए तकनीकी सुधारों के तहत अब वेटिंग टिकटों की बुकिंग पर एक तय सीमा (कैपिंग) लगा दी गई है, जिससे एक निश्चित संख्या के बाद सॉफ्टवेयर खुद-ब-खुद टिकटों की बुकिंग को ब्लॉक कर देगा। इस फैसले से जहां ट्रेनों के भीतर होने वाली असीमित भीड़ पर लगाम लगेगी, वहीं आम मुसाफिरों का सफर भी पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक हो जाएगा।
क्यों लिया गया ये फैसला?
इस नई व्यवस्था के पीछे रेलवे का मुख्य उद्देश्य स्लीपर और एसी (AC) कोचों में यात्रा करने वाले यात्रियों को सुकून देना है। पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो और शिकायतें सामने आ रही थीं, जिनमें देखा गया कि कंफर्म टिकट वाले यात्री भी ट्रेनों के गैलरी, दरवाजों और यहां तक कि शौचालयों के पास भारी भीड़ के कारण बैठ नहीं पा रहे थे। इस अव्यवस्था का सबसे बड़ा कारण यह था कि रेलवे में वेटिंग टिकटों की बुकिंग की कोई सख्त सीमा नहीं थी। दलाल और बड़ी संख्या में लोग असीमित तौर पर वेटिंग टिकट बुक करा लेते थे और बाद में कंफर्म कराने का झांसा देकर या बिना कंफर्मेशन के ही स्लीपर और एसी कोचों में सवार हो जाते थे। विशेषज्ञों का कहना है कि रेलवे के चार्ट बनने तक वास्तव में केवल 20 से 25 फीसदी वेटिंग टिकट ही कंफर्म हो पाते हैं। इसका मतलब यह है कि बाकी के 75 से 80 फीसदी यात्री या तो अपनी यात्रा रद्द करते थे या फिर वेटिंग टिकट के सहारे ही जबरन कोचों में घुसकर दूसरे यात्रियों की परेशानी बढ़ाते थे। इसी को रोकने के लिए नया नियम आगामी जून 2026 के बाद पूरी तरह से प्रभावी होने जा रहा है।
पहले कितनी थी?
नए नियमों के तहत रेलवे ने वेटिंग लिस्ट की बुकिंग पर जो कैपिंग लगाई है, उसे समझना हर यात्री के लिए बेहद जरूरी है। रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, पहले जहां स्लीपर कोच में सीधे 400 टिकटों तक की फिक्स कैपिंग होती थी, उसे अब पूरी तरह बदल दिया गया है। अब लंबी दूरी या किसी भी ट्रेन में असीमित वेटिंग लिस्ट नहीं मिलेगी, बल्कि इसे घटाकर उस कोच की कुल क्षमता का अधिकतम 30 प्रतिशत कर दिया गया है। इसे आसान शब्दों में ऐसे समझें कि यदि किसी ट्रेन के स्लीपर कोच में कुल सीटें 100 हैं, तो उसमें केवल 30 वेटिंग टिकट ही बुक किए जा सकेंगे। जैसे ही यह संख्या 30 पर पहुंचेगी, रेलवे का पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) सॉफ्टवेयर ऑटोमैटिक तरीके से उस ट्रेन के लिए आगे के वेटिंग टिकटों की बुकिंग बंद कर देगा। इसके बाद यात्रियों को 'नो रूम' (No Room) का मैसेज दिखाई देगा और वे टिकट बुक नहीं कर पाएंगे। यह नियम स्लीपर के साथ-साथ थर्ड एसी, सेकेंड एसी और फर्स्ट एसी समेत सभी क्लास पर लागू होगा।
30 फीसदी की कैपिंग
रेलवे ने कुछ समय पहले सभी क्लास में केवल 25 प्रतिशत प्रतीक्षा टिकट का एक बेहद सख्त नियम लागू किया था, जिससे बुकिंग काउंटरों पर भारी अफरा-तफरी मच गई थी और यात्रियों की असुविधा को देखते हुए बोर्ड ने उस फैसले की समीक्षा कर उसे वापस ले लिया था। लेकिन इस बार रेलवे ने बीच का रास्ता निकालते हुए 30 प्रतिशत की सीमा तय की है, जो व्यावहारिक भी है और तकनीकी रूप से भीड़ को नियंत्रित करने में सक्षम भी है। इसके साथ ही रेलवे नियमों को लेकर सख्ती भी बरतने जा रहा है। नए प्रावधानों के तहत अब किसी भी यात्री को वेटिंग टिकट होने पर स्लीपर या एसी कोच में पैर रखने यानी यात्रा करने की अनुमति बिल्कुल नहीं दी जाएगी। यदि कोई यात्री इस नियम को तोड़ते हुए या बिना कंफर्म टिकट के रिजर्व्ड कोच में सफर करता हुआ पाया गया, तो टीटीई (TTE) उस पर भारी जुर्माना लगाएगा और उसे अगले स्टेशन पर ट्रेन से उतार दिया जाएगा।
रेलवे का यह नया कदम दलालों और फर्जीवाड़ा करने वालों के सिंडिकेट पर भी करारी चोट करेगा। अब तक दलाल बड़ी संख्या में पहले से ही वेटिंग टिकट बुक करके रख लेते थे और बाद में जरूरतमंद यात्रियों से कंफर्म कराने के नाम पर अतिरिक्त मोटी रकम वसूलते थे। जब सॉफ्टवेयर खुद ही एक सीमा के बाद बुकिंग ब्लॉक कर देगा, तो टिकटों की ऐसी जमाखोरी पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी। इसके अलावा, रेलवे यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए केवल नियमों में बदलाव ही नहीं कर रहा, बल्कि स्पेशल ट्रेनों की संख्या भी रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ा रहा है। इस बार गर्मियों के सीजन में यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए रेलवे ने अब तक की सबसे ज्यादा रिकॉर्ड तोड़ 908 विशेष ट्रेनें चलाई हैं, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 47 फीसदी अधिक हैं।
