नए महीने की शुरुआत के साथ ही, विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB-G RAM G] अधिनियम, 2025 पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू हो गया है। इस अधिनियम के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार की वैधानिक गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर अब 125 दिन कर दी गई है।
दैनिक मजदूरी अब 300 रुपये से 409 रुपये के बीच
इसके अलावा, केंद्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में अकुशल श्रमिकों के लिए नई दैनिक मजदूरी दरों की घोषणा भी कर दी है। ये नई दरें वीबी-जी राम-जी अधिनियम के तहत लागू होंगी, जिसने अब महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की जगह ले ली है। नई अधिसूचना के अनुसार, देशभर में दैनिक मजदूरी 300 रुपये से 409 रुपये के बीच तय की गई है, जबकि सिक्किम की कुछ विशेष ग्राम पंचायतों में यह दर 450 रुपये प्रतिदिन होगी।
किन राज्यों में कितनी होगी मजदूरी?
सरकार की अधिसूचना के मुताबिक 21 राज्यों में अकुशल श्रमिकों के लिए दैनिक मजदूरी 300 रुपये तय की गई है। इनमें गुजरात, राजस्थान, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, असम, त्रिपुरा, सिक्किम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय और हिमाचल प्रदेश के गैर-अनुसूचित क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा, बाकि के राज्यों के लिए अलग-अलग मजदूरी दरें निर्धारित की गई हैं। तेलंगाना में 308 रुपये, आंध्र प्रदेश में 312 रुपये, महाराष्ट्र में 317 रुपये, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव में 340 रुपये, तमिलनाडु में 345 रुपये, पुडुचेरी में 347 रुपये, अंडमान (अंडमान जिला) और लक्षद्वीप में 348 रुपये, पंजाब में 360 रुपये, अंडमान (निकोबार जिला) में 367 रुपये, हिमाचल प्रदेश के अनुसूचित क्षेत्रों में 375 रुपये, कर्नाटक में 382 रुपये, केरल में 401 रुपये और हरियाणा में सबसे अधिक 409 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी तय की गई है। वहीं सिक्किम की ग्नाथांग, लाचुंग और लाचेन ग्राम पंचायतों के लिए विशेष रूप से 450 रुपये प्रतिदिनकी दर अधिसूचित की गई है।
| राज्य/केंद्रशासित प्रदेश | नई दैनिक मजदूरी दर (रुपये) |
|---|---|
| हरियाणा | 409 |
| केरल | 401 |
| कर्नाटक | 382 |
| हिमाचल प्रदेश (अनुसूचित क्षेत्र) | 375 |
| अंडमान (निकोबार जिला) | 367 |
| पंजाब | 360 |
| लक्षद्वीप | 348 |
| अंडमान (अंडमान जिला) | 348 |
| पुडुचेरी | 347 |
| तमिलनाडु | 345 |
| दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव | 340 |
| महाराष्ट्र | 317 |
| आंध्र प्रदेश | 312 |
| तेलंगाना | 308 |
| गुजरात, राजस्थान, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, असम, त्रिपुरा, सिक्किम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय और हिमाचल प्रदेश (गैर-अनुसूचित क्षेत्र) | 300 |
| सिक्किम (ग्नाथांग, लाचुंग और लाचेन ग्राम पंचायतें) | 450 |
किन राज्यों में सबसे ज्यादा बढ़ी मजदूरी?
नई दरों के बाद उत्तर और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में मजदूरी में सबसे अधिक बढ़ोतरी देखने को मिली है। अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, असम, त्रिपुरा, सिक्किम और पश्चिम बंगाल में मजदूरी में 15 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। दूसरी ओर हरियाणा में मजदूरी पहले से ही अधिक होने के कारण वृद्धि केवल 2.25 प्रतिशत रही। दक्षिण भारत के कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी बढ़ोतरी अपेक्षाकृत कम यानी लगभग 3 प्रतिशत या उससे कम रही।
मनरेगा से अलग क्यों दिख रही हैं नई दरें?
नई मजदूरी दरें मनरेगा की तुलना में अधिक दिखाई देती हैं, लेकिन इसकी एक बड़ी वजह यह है कि केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए मनरेगा की मजदूरी दरों में अलग से कोई संशोधन नहीं किया था। पिछले वर्ष घोषित मजदूरी दरें ही अप्रैल से जून 2026 तक लागू रहीं। ऐसे में VB-G RAM G के तहत घोषित नई दरें अधिक दिखाई दे रही हैं। अगर मनरेगा की मजदूरी दरों में इस वर्ष सामान्य संशोधन किया गया होता, तो वास्तविक बढ़ोतरी का अंतर लगभग समान रहता।
