Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत को लेकर सख्त रुख अपना रहे हैं। भारत के उत्पादों पर 25 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद उन्होंने ईरान के साथ कथित रूप से तेल का व्यापार करने वाली कम से कम छह भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया है। इन कंपनियों पर ईरान के साथ पेट्रोल और पेट्रोकेमिकल का व्यापार करने का आरोप है। अपने ताजा कदम में अमेरिका ने तेहरान के साथ कारोबार करने वाली दुनिया भर की करीब 20 कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारतीय कंपनियों को जनवरी 2024 से जनवरी 2025 के बीच मेथनॉल, टोल्यून, और पॉलीथीन जैसे पदार्थों का आयात करते हुए पाया गया है। प्रतिबंधों का प्रभाव तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), चीन और इंडोनेशिया की कंपनियों पर भी पड़ा है। जिन भारतीय कंपनियों का नाम लिया गया है, उनमें कंचन पॉलिमर्स, अल्केमिकल सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, रमणिकलाल एस. गोसालिया एंड कंपनी, ज्यूपिटर डाई केम प्राइवेट लिमिटेड, ग्लोबल इंडस्ट्रियल केमिकल्स लिमिटेड, और पर्सिस्टेंट पेट्रोकेम प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।
पेट्रोकेमिकल्स का करोड़ों डॉलर का आयात किया
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा, 'इन कंपनियों ने सामूहिक रूप से ईरानी मूल के पेट्रोकेमिकल्स का करोड़ों डॉलर का आयात किया है और इन्हें ऐसे लेन-देन में संलिप्त पाया गया है जो ईरान की अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों के लिए अरबों डॉलर की अवैध निधि उत्पन्न करते हैं।' अमेरिका ने बताया कि कंचन पॉलिमर्स ने UAE स्थित एक मध्यस्थ, टानाइस ट्रेडिंग के माध्यम से 13 लाख डॉलर से अधिक मूल्य का ईरानी पॉलीथीन खरीदा। वहीं, अल्केमिकल सॉल्यूशंस ने विभिन्न स्रोतों से 8.4 करोड़ डॉलर से अधिक मूल्य के ईरानी मूल के पेट्रोकेमिकल उत्पाद आयात किए, जिससे यह इस बार की कार्रवाई में सबसे बड़े उल्लंघनकर्ताओं में से एक बन गया।
यूएई की कंपनी पर भी प्रतिबंध
ज्यूपिटर डाई केम, जो भारत में स्थित है, ने वर्षभर की अवधि में 4.9 करोड़ डॉलर से अधिक मूल्य के ईरानी मूल के पेट्रोकेमिकल्स जिनमें टोल्यून भी शामिल है आयात किए। इसी तरह, ग्लोबल इंडस्ट्रियल केमिकल्स लिमिटेड ने 5.1 करोड़ डॉलर से अधिक मूल्य के मेथनॉल और अन्य ईरानी मूल के पेट्रोकेमिकल उत्पादों का आयात किया। पर्सिस्टेंट पेट्रोकेम प्राइवेट लिमिटेड को भी यूएई स्थित बाब अल बर्शा ट्रेडिंग एलएलसी के माध्यम से 1.4 करोड़ डॉलर मूल्य के ईरानी मूल के पेट्रोकेमिकल शिपमेंट आयात करने के लिए नामित किया गया है। यह यूएई कंपनी भी प्रतिबंधित संस्थाओं में शामिल की गई है।
भारतीय कंपनियों ने बयान नहीं दिया
अमेरिका ने स्पष्ट किया कि ये प्रतिबंध केवल प्रतीकात्मक नहीं हैं। बयान में कहा गया, 'नामित व्यक्तियों की अमेरिका में मौजूद या अमेरिका के नियंत्रण में आने वाली सभी संपत्तियों और हितों को जब्त कर लिया गया है, और अब सभी संबंधित लेन-देन OFAC (ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल) की विशेष अनुमति के बिना प्रतिबंधित हैं। हालांकि, विभाग ने यह भी कहा, 'प्रतिबंधों का अंतिम उद्देश्य सज़ा देना नहीं है, बल्कि व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाना है।' अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में भारतीय कंपनियों ने अभी तक कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है।
