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Trump Tariff Refund: US सरकार लौटाएगी 166 अरब डॉलर! जानें कोर्ट के फैसले के बाद कैसे मिलेगा रिफंड?

अमेरिकी सरकार ने योजना बनाई है कि वह लगभग 166 अरब डॉलर (करीब 14 लाख करोड़ रुपये) की भारी-भरकम राशि कंपनियों को रिफंड करेगी। सबसे बड़ी बात यह है कि यह पूरी प्रक्रिया मात्र 45 दिनों के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए एक विशेष 'सिंगल पेमेंट सिस्टम' तैयार किया जा रहा है।

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Trump Tariff

अमेरिकी कोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले के बाद अब बाइडेन प्रशासन को ट्रंप द्वारा लगाए गए अरबों डॉलर के टैक्स (टैरिफ) को वापस लौटाना होगा। यह खबर वैश्विक व्यापार और उन कंपनियों के लिए बहुत बड़ी राहत लेकर आई है, जिन्होंने चीन से आयात होने वाले सामान पर भारी शुल्क चुकाया था। अमेरिकी सरकार ने योजना बनाई है कि वह लगभग 166 अरब डॉलर (करीब 14 लाख करोड़ रुपये) की भारी-भरकम राशि कंपनियों को रिफंड करेगी। सबसे बड़ी बात यह है कि यह पूरी प्रक्रिया मात्र 45 दिनों के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए एक विशेष 'सिंगल पेमेंट सिस्टम' तैयार किया जा रहा है।

क्या है यह पूरा मामला?

इस पूरे विवाद की जड़ साल 2018-19 में है, जब तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के साथ 'ट्रेड वॉर' के दौरान चीनी सामानों पर भारी आयात शुल्क (Tariff) लगा दिया था। इसे 'सेक्शन 301' टैरिफ के नाम से जाना जाता है। हजारों अमेरिकी कंपनियों ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि सरकार ने बिना उचित प्रक्रिया के और बिना जनता की राय लिए ये टैक्स थोप दिए हैं। लंबे समय तक चली कानूनी लड़ाई के बाद, अमेरिकी कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने कंपनियों के पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को अवैध रूप से वसूला गया टैक्स ब्याज सहित वापस करने का आदेश दिया।

कैसे काम करेगा 'सिंगल पेमेंट सिस्टम'?

इतनी बड़ी रकम को हजारों कंपनियों तक पहुंचाना एक प्रशासनिक चुनौती है। आम तौर पर रिफंड की प्रक्रिया में वर्षों लग जाते हैं, लेकिन कोर्ट के सख्त रुख को देखते हुए अमेरिकी कस्टम विभाग (CBP) एक 'सिंगल पेमेंट सिस्टम' पर काम कर रहा है। इस सिस्टम के तहत, कंपनियों को हर एक एंट्री या हर एक चालान के लिए अलग-अलग आवेदन नहीं करना होगा। इसके बजाय, एक ही बार में डेटा का मिलान करके पूरी रिफंड राशि एक साथ बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि कोर्ट द्वारा फाइनल लिस्ट जारी होने के 45 दिनों के अंदर पैसा कंपनियों के पास पहुंच जाए।

व्यापार जगत पर इसका क्या असर होगा?

166 अरब डॉलर की यह वापसी वैश्विक अर्थव्यवस्था में नई जान फूंक सकती है। ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और रिटेल जैसे सेक्टर, जिन्होंने चीन से कलपुर्जे मंगवाने के लिए भारी टैक्स चुकाया था, उनके पास अचानक से बड़ी नकदी (Cash) आ जाएगी। इससे कंपनियों के मुनाफे में बढ़ोतरी होगी और वे नए निवेश या विस्तार की योजना बना सकेंगी। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी रकम बाजार में आने से महंगाई पर भी थोड़ा दबाव पड़ सकता है, लेकिन बिजनेस कम्युनिटी के लिए यह एक बड़ी जीत मानी जा रही है।

भारत के लिए इसके मायने

भले ही यह मामला अमेरिका और चीन के बीच का है, लेकिन इसका असर भारतीय कंपनियों पर भी पड़ेगा। कई भारतीय कंपनियां जो अमेरिका में कारोबार करती हैं या जिनकी अमेरिकी सहायक कंपनियाँ हैं और उन्होंने चीनी रॉ मटेरियल पर टैरिफ चुकाया है, वे भी इस रिफंड की हकदार हो सकती हैं। इसके अलावा, वैश्विक बाजार में नकदी बढ़ने से व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी, जिसका फायदा भारत के एक्सपोर्ट सेक्टर को मिल सकता है।

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Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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