बिजनेस

US ने Solar Sector पर लगाई 123% एंटी-डंपिंग ड्यूटी, एक्सपोर्ट को लगेगा झटका

US ने भारत, इंडोनेशिया और लाओस से आने वाले सोलर इंपोर्ट पर भारी एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई है। इससे भारत के सोलर एक्सपोर्ट सेक्टर पर बड़ा असर पड़ सकता है और कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

Image

अमेरिका ने दिया बड़ा झटका

US Anti Dumping Duty on Solar Sector : अमेरिका ने भारत सहित कई देशों के सोलर सेक्टर को बड़ा झटका दिया है। अमेरिका के व्यापार विभाग की तरफ से जारी एक नोटिस के तहत भारत समेत तीन देशों से आयात होने वाले सोलर इक्विपमेंट्स पर भारी एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई गई है। U.S. Commerce Department के इस फैसले के तहत भारतीय सोलर सेल और पैनल पर 123% तक की प्रारंभिक ड्यूटी लगाई गई है, जो घरेलू इंडस्ट्री को बचाने के उद्देश्य से उठाया गया कदम माना जा रहा है।

भारत पर सबसे ज्यादा 123% ड्यूटी का वार

अमेरिका ने भारत से आने वाले सोलर उत्पादों पर 123.04% की डंपिंग मार्जिन तय की है, जो तीनों देशों में सबसे ज्यादा है। वहीं इंडोनेशिया पर 35.17% और लाओस पर 22.46% ड्यूटी लगाई गई है। यह कदम भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इससे अमेरिकी बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धा क्षमता कमजोर हो सकती है।

$4.5 अरब के कारोबार पर असर

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत, इंडोनेशिया और लाओस से अमेरिका को सोलर इंपोर्ट करीब 4.5 अरब डॉलर का रहा, जो कुल आयात का दो-तिहाई हिस्सा है। ऐसे में इस फैसले का असर सीधे इन देशों के सोलर मैन्युफैक्चरर्स और सप्लाई चेन पर पड़ेगा।

अमेरिकी कंपनियों को मिला फायदा

यह फैसला अमेरिकी सोलर मैन्युफैक्चरर्स के पक्ष में गया है। Alliance for American Solar Manufacturing and Trade ने आरोप लगाया था कि ये देश अमेरिकी बाजार में सस्ते दाम पर सोलर प्रोडक्ट बेचकर प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस ग्रुप में First Solar और Qcells जैसी कंपनियां शामिल हैं।

पहले भी लग चुके हैं ऐसे टैरिफ

अमेरिका इससे पहले भी मलेशिया, वियतनाम, थाईलैंड और कंबोडिया जैसे देशों पर सोलर टैरिफ लगा चुका है। यह लगातार बढ़ती प्रोटेक्शनिस्ट पॉलिसी का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है।

आगे क्या? जुलाई-सितंबर में अंतिम फैसला

अमेरिका जुलाई में भारत और इंडोनेशिया पर अंतिम फैसला देगा, जबकि लाओस पर सितंबर तक निर्णय आने की उम्मीद है। ऐसे में आने वाले महीनों में सोलर सेक्टर में अनिश्चितता बनी रह सकती है।

सोलर सेक्टर के लिए बढ़ी चुनौती

कुल मिलाकर, यह फैसला भारतीय सोलर कंपनियों के लिए बड़ा झटका है। एक्सपोर्ट घटने, मार्जिन दबने और नई रणनीति बनाने की जरूरत अब कंपनियों के सामने खड़ी है। साथ ही, यह वैश्विक ट्रेड टेंशन को भी और बढ़ा सकता है।

किन कंपनियों पर सीधा असर?

अमेरिका की तरफ से लगाई गई एंटी-डंपिंग और काउंटरवेलिंग ड्यूटी का सबसे सीधा असर कई भारतीय सोलर कंपनियों पर पड़ेगा। अमेरिकी कॉमर्स डिपार्टमेंट ने खासकर Adani Group की Mundra Solar Energy Ltd और Mundra Solar PV Ltd पर, जिन पर करीब 125% से ज्यादा सब्सिडी दर आंकी है। इसके अलावा Waaree Energies, Vikram Solar और RenewSys जैसी कंपनियां भी दबाव में आ सकती हैं, क्योंकि इनका US मार्केट में डायरेक्ट या इंडायरेक्ट एक्सपोजर रहा है। इस फैसले से इन कंपनियों के एक्सपोर्ट ऑर्डर, प्राइसिंग और मार्जिन पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।

देशप्रमुख कंपनियां/एंटिटीड्यूटी/सब्सिडी रेट (संकेत)संभावित असर
भारतMundra Solar Energy Ltd (Adani Group)~125%+ सब्सिडी, 123% ADसबसे ज्यादा असर, US एक्सपोर्ट पर बड़ा झटका
भारतMundra Solar PV Ltd (Adani Group)~125%+ सब्सिडीमार्जिन और ऑर्डर बुक पर दबाव
भारतWaaree Energiesइंडायरेक्ट असरUS ऑर्डर और प्राइसिंग प्रभावित
भारतVikram Solarइंडायरेक्ट असरएक्सपोर्ट शिफ्ट का दबाव
भारतRenewSys Indiaइंडायरेक्ट असरग्लोबल मार्केट डायवर्जन
इंडोनेशियाPT Blue Sky Solar Indonesia~143% सब्सिडीहाई कॉस्ट, US मार्केट से बाहर होने का खतरा
इंडोनेशियाPT REC Solar Energy Indonesia~86% सब्सिडीप्रतिस्पर्धा घटेगी
लाओसSolarspace Technology~80% सब्सिडीएक्सपोर्ट पर सीधा असर
लाओसVietnam Sunergy (Laos ऑपरेशन)~80% सब्सिडीसप्लाई चेन प्रभावित
Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

और पढ़ें
End of Article