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एक जून के बाद अमेरिका में खत्म हो जाएगा कैश ! सैलरी से लेकर सब्सिडी पर संकट,येलेन की चेतावनी

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated May 3, 2023, 12:50 PM IST

U.S.Could Run Out of Cash by June 1:अर्थशास्त्रियों ने इस संकट पर सचेत करते हुए कहा है कि अगर कर्ज की सीमा नहीं बढ़ाई जाती है तो फाइनेंशियल मार्केट हिल जाएगा। और दुनिया भर में आर्थिक संकट छा सकता है। ऐसा नहीं होने पर सेना, सरकारी कर्मचारियों की सैलरी, सामाजिक सुरक्षा पर होने खर्च पर संकट गहरा सकता है।

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एक जून के बाद अमेरिका में खत्म हो जाएगा कैश ! सैलरी से लेकर सब्सिडी पर संकट,येलेन की चेतावनी

U.S.Could Run Out of Cash by June 1:क्या अमेरिका भी डिफॉल्ट कर सकता है। दुनिया के सबसे विकसित देश के बारे में ऐसी कल्पना भी मु्श्किल है। लेकिन ऐसा होने का खतरा बढ़ गया है। ट्रेजरी सेक्रेटरी जेनेट येलेन ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अमेरिका एक जून से इस स्थिति में पहुंच सकता है कि वह अपने पेमेंट नहीं कर पाएगा और वह डिफॉल्ट कर सकता है। येलेन इससे बचने के लिए अमेरिकी कांग्रेस से कर्ज लेने की लिमिट बढ़ाने को कहा है। अगर ऐसा नहीं होता है तो अमेरिका बांड होल्डर आदि के पेमेंट नहीं कर पाएगा। और इसका असर दुनिया भर के फाइनेंशियल मार्केट पर पड़ सकता है। जो कि पहले से ही मंदी की जोखिम का सामना कर रहे दुनिया के लिए बड़ा खतरा हो सकता है।

कितना बड़ा है खतरा

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार येलेन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिकी कांग्रेस को जल्द से जल्द एक्शन लेना चाहिए। या तो वह कर्ज लेने की लिमिट को बढ़ाए या फिर वह उसे सस्पेंड करे। जिससे कि ज्यादा कर्ज लिया जा सके। क्योंकि ऐसा नहीं करने से अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो जाएगी। इस मामले में अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के बजट ऑफिस ने चेतावनी देते हुए कहा है कि समय उम्मीद से ज्यादा तेजी से निकल रहा है।

जो बाइडेन ने बुलाई आपात बैठक

येलेने के इस लेटर के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ 9 मई को आपात बैठक बुलाई है। जिससे कि इस चिंताजनक स्थिति से निपटने का रास्ता निकाला जा सके। येलेन ने यह भी कहा है कि सभी सांसद जल्द से जल्द इस मामले पर समाधान निकालने, नहीं तो सरकार के लिए अपने बिल पेमेंट करने में दिक्कत आ सकती है।

लोगों की सैलरी से लेकर दूसरे भुगतान पर होगा असर

अर्थशास्त्रियों ने इस संकट पर सचेत करते हुए कहा है कि अगर कर्ज की सीमा नहीं बढ़ाई जाती है तो फाइनेंशियल मार्केट हिल जाएगा। और दुनिया भर में आर्थिक संकट छा सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अमेरिका पहले ही बजट घाटे का सामना कर रहा है। यानी उसकी कमाई से कहीं ज्यादा खर्च है। और उसे हर हाल में अपने पेमेंट (ब्याज सहित दूसरे खर्च) चुकाने में बड़ी मात्रा में उधार लेना होगा। ऐसा नहीं होने पर सेना, सरकारी कर्मचारियों की सैलरी, सामाजिक सुरक्षा पर होने खर्च पर संकट गहरा सकता है।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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