आज के समय में छोटे-छोटे निवेश के जरिए एक बड़ा फंड तैयार करना मुश्किल नहीं रह गया है। म्यूचुअल फंड में सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) इसी तरह का एक लोकप्रिय निवेश विकल्प है। इसमें व्यक्ति हर महीने तय रकम निवेश करता है और लंबे समय तक निवेश जारी रखने पर चक्रवृद्धि ब्याज का फायदा मिलता है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि नियमित और अनुशासित निवेश लंबे समय में बड़ी संपत्ति तैयार करने में मदद कर सकता है। आइए इसे एक उदाहरण से समझते हैं।
कैसे तैयार होगा 1 करोड़ का फंड

SIP (Photo: iStock)
मान लीजिए कोई व्यक्ति 1 करोड़ का बड़ा फंड तैयार करना चाहता है इसके लिए उसे रोजाना निवेश करना होगा। उदाहरण के लिए कोई व्यक्ति रोजाना केवल 100 रुपये बचाकर निवेश करता है, तो महीने में यह राशि करीब 3000 रुपये हो जाती है। इसी रकम को अगर एसआईपी के जरिए लगातार निवेश किया जाए, तो लंबे समय में 1 करोड़ का फंड तैयार किया जा सकता है। यानी कोई निवेशक हर महीने 3000 रुपये की एसआईपी 31 वर्षों तक जारी रखता है और उसे औसतन 12 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिलता है तो वह 1 करोड़ रुपये से अधिक का फंड तैयार कर सकता है।
इस कैलकुलेशन के हिसाब से 31 वर्षों में निवेशक कुल 11,16,000 रुपये का निवेश करेगा। वहीं अनुमानित 12 प्रतिशत वार्षिक रिटर्न के हिसाब से उसे लगभग 92,74,369 रुपये का लाभ मिल सकता है। इस तरह अवधि पूरी होने पर कुल फंड करीब 1,03,90,369 रुपये तक पहुंच सकता है। यह उदाहरण बताता है कि छोटी बचत और लंबी अवधि का निवेश मिलकर कितना बड़ा आर्थिक लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।
| विवरण | राशि |
|---|---|
| रोजाना निवेश | 100 रुपये |
| मासिक एसआईपी | 3,000 रुपये |
| निवेश अवधि | 31 वर्ष |
| अनुमानित सालाना रिटर्न | 12% |
| कुल निवेश राशि | 11,16,000 रुपये |
| अनुमानित रिटर्न | 92,74,369 रुपये |
| मैच्योरिटी पर कुल राशि | 1,03,90,369 रुपये |
SIP क्यों करें शुरू
एसआईपी को लोकप्रिय बनाने वाली सबसे बड़ी वजह इसकी सरलता और अनुशासित निवेश व्यवस्था मानी जाती है। इसमें निवेशक को बाजार के उतार-चढ़ाव की ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं होती। हर महीने निश्चित रकम निवेश होने से रुपये लागत औसत का फायदा मिलता है। यानी बाजार ऊपर हो या नीचे, निवेश जारी रहने से लंबे समय में लागत संतुलित होती रहती है।
इन बातों का भी रखें ध्यान
हालांकि, एसआईपी में जल्दी शुरुआत करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। क्योंकि जितनी लंबी अवधि तक निवेश रहेगा, चक्रवृद्धि ब्याज का असर उतना ज्यादा दिखाई देगा। यही कारण है कि कम रकम का निवेश भी लंबे समय में करोड़ों रुपये का फंड बना सकता है। साथ ही, निवेशकों को यह समझना चाहिए कि म्यूचुअल फंड बाजार से जुड़े होते हैं और रिटर्न निश्चित नहीं होता। 12 प्रतिशत रिटर्न केवल अनुमानित उदाहरण है। वास्तविक रिटर्न बाजार की स्थिति और चुनी गई योजना के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। इसलिए निवेश से पहले अपनी जोखिम उठाने की क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों को समझना जरूरी माना जाता है।
