UPI भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागने को लेकर विरोध बढ़ता जा रहा है। 15 अक्टूबर से 2000 रूपए से अधिक के UPI पेमेंट पर लगने वाले MDR शुल्क को लेकर दिल्ली और देश में व्यापारियों और उद्यमियों के शीर्ष संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री CTI ने कड़ा विरोध जताया है। गुरुवार को CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने इस मुद्दे पर केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर 15 अक्टूबर से लगने वाले UPI MDR शुल्क को रोल बैक करने की मांग की है।
CTI महासचिव गुरमीत अरोड़ा और रमेश आहूजा ने कहा कि नवरात्र, रामलीला, करवा चौथ, दिवाली, छठ पूजा, क्रिसमस, न्यू ईयर के दौरान करोड़ों लोग बाजारों में खरीददारी के लिए आते हैं और UPI के माध्यम से पेमेंट करते हैं। अगर दुकानदार 2000 रूपए से अधिक के बिल पर UPI पेमेंट नहीं लेंगे तो आम लोगों को भी बहुत परेशानी होगी।
1. व्यापारियों में भारी नाराजगी
UPI पर 0.40% MDR (₹2000 से ऊपर के लेनदेन पर) लगाने के प्रस्ताव से दिल्ली सहित देश भर के दुकानदारों में भारी नाराजगी और आक्रोश है। छोटे दुकानदार, जो पहले से ही महंगाई और मंदी से जूझ रहे हैं, इस अतिरिक्त बोझ को सहन नहीं कर पाएंगे।
2. 15 अक्टूबर से लागू हुआ तो पूर्ण बहिष्कार
CTI आपको सूचित करना चाहता है कि अगर सरकार 15 अक्टूबर 2026 से UPI MDR शुल्क लागू करती है, तो दिल्ली के व्यापारी और दुकानदार मजबूरन UPI से पेमेंट का पूरी तरह से बहिष्कार करने पर विचार करेंगे। दुकानों पर "UPI Accepted" की जगह "Cash Only" के बोर्ड लगाने पड़ेंगे। यह डिजिटल इंडिया के लक्ष्य के खिलाफ होगा।
3. UPI लेनदेन 50% तक घट सकता है
हमारे सर्वे के अनुसार, अगर MDR लगाया गया, तो UPI से लेनदेन की दर 50% तक घट सकती है। ग्राहक और दुकानदार दोनों फिर से कैश की ओर लौट जाएंगे, जिससे काले धन को बढ़ावा मिलेगा।
4. त्योहारी सीजन पर सीधी मार
अगले 3 महीनों में नवरात्रि, डांडिया, करवा चौथ, दिवाली, छठ पूजा, क्रिसमस और न्यू ईयर जैसे बड़े त्योहार हैं। इस दौरान UPI पर शुल्क लगाना त्योहारी व्यापार को तबाह करने जैसा है।
CTI ने मांग की है कि UPI MDR को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए या कम से कम 1 जनवरी 2027 तक टाला जाए। वहीं, ₹40 लाख तक के सालाना टर्नओवर वाले सभी छोटे व्यापारियों को MDR से स्थायी रूप से छूट दी जाए। इतना ही नहीं, ₹2000 तक के सभी लेनदेन को MDR से मुक्त रखा जाए।
