Nirmala Sitharaman: भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण बयान दिया, जिसमें उन्होंने सार्वजनिक वित्त पर राजनीति से बचने की आवश्यकता को प्रमुखता से रखा। यह बयान उन्होंने ‘नीति एनसीएईआर राज्य आर्थिक मंच’ पोर्टल की शुरुआत के दौरान दिया। इस पोर्टल का उद्देश्य राज्यों के सामाजिक, आर्थिक और राजकोषीय मापदंडों पर आंकड़े प्रदान करना है, जो तीन दशकों तक की जानकारी उपलब्ध कराएगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि कर्ज लेना एक जिम्मेदार वित्तीय निर्णय होना चाहिए, जो भविष्य में बोझ न बने। उनके अनुसार, यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि देश कर्ज लेने के लोभ से बचकर अपने वित्तीय संसाधनों का सही तरीके से प्रबंधन करे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उधारी लेने से जुड़ी जिम्मेदारियां हमेशा समझनी चाहिए, क्योंकि अत्यधिक कर्ज देश की अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक हो सकता है।
सीतारमण ने कहा कि पैसे जुटाना उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना कि अपने कर्ज का सही तरीके से प्रबंधन करना। उन्होंने उदाहरण दिया कि अगर सरकार किसी योजना की घोषणा करती है, लेकिन उसके पास उस योजना को लागू करने के लिए संसाधन नहीं हैं, तो वह योजना अप्रभावी हो जाती है। इसी कारण से, सरकार को कर्ज लेते समय सभी वास्तविकताओं का ध्यान रखना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों पर बोझ न पड़े।
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र और राज्यों के वित्त के मामलों में राजनीति नहीं होनी चाहिए। इसका मुख्य उद्देश्य देश की आर्थिक वृद्धि और लोगों के कल्याण को सुनिश्चित करना होना चाहिए। उन्होंने जीएसटी परिषद के निर्णयों का उदाहरण देते हुए यह बताया कि कैसे राज्य के वित्त मंत्री पार्टी लाइन से परे आम आदमी के हित में राजस्व बढ़ाने के लिए काम करते हैं।
कार्यक्रम के दौरान नीति आयोग के सीईओ बी वी आर सुब्रह्मण्यम ने भी बताया कि अब तक 12 राज्यों ने अपना 'दृष्टि दस्तवेज' तैयार किया है, जो आर्थिक सुधारों और भविष्य की योजनाओं को मार्गदर्शन प्रदान करता है। (एजेंसी इनपुट के साथ)
