डॉलर के मुकाबले रुपये में जारी लगातार गिरावट का सिलसिला थम गया है। रिजर्व बैंक की तरफ से बैंकों पर फॉरेक्स ट्रेडिंग को लेकर की गई सख्ती का असर दिख रहा है। गुरुवार को फॉरेक्स इंटरबैंक एक्सचेंज में डॉलर के मुकाबले रुपये में 130 पैसे की मजबूती देखने को मिली है। डॉलर के मुकाबले गुरुवार को शुरुआती कारोबार में रुपया 130 पैसे उछलकर 93.53 के स्तर पर पहुंच गया। जबकि, इससे पहले 95.19 तक के स्तर तक फिसल गया था।
| करेंसी पेयर | ओपन (₹) | पिछला बंद (₹) | बदलाव (₹) | बदलाव (%) | मौजूदा स्तर (₹) |
|---|---|---|---|---|---|
| USD/INR | 93.53 | 94.83 | -1.30 | -1.37% | 93.53 |
RBI की सख्ती से बदला गेम
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए करेंसी डायरेक्टिव ने फॉरेक्स मार्केट का पूरा समीकरण बदल दिया है। रिजर्व बैंक की तरफ से बैंकों के फॉरेक्स ट्रेड में नेट ऑपन पोजिशन की 100 मिलियन डॉलर की एक सख्त सीमा तय कर दी है। इसकी वजह से रुपये को शॉर्ट करना और करेंसी मार्केट में स्पेक्युलेटिव ट्रेडिंग पर लगाम लगती दिख रही है। रिजर्व बैंक के इस फैसले से अचानक डॉलर की मांग को कम कर दिया। इसका सीधा असर रुपये पर दिखा और यह मजबूत होकर खुला।
डॉलर की सप्लाई बढ़ी, रुपया दहाड़ा
RBI के निर्देश के बाद बैंकों को अपने बड़े डॉलर पोजीशन को अनवाइंड करना शुरू कर दिया है। इससे बाजार में डॉलर की सप्लाई बढ़ गई। जब सप्लाई बढ़ती है और मांग घटती है, तो कीमत गिरती है। यही वजह रही कि डॉलर कमजोर हुआ और रुपया 130 पैसे की तेज छलांग लगाने में सफल रहा।
$30 अरब के ट्रेड बने ट्रिगर
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक मार्केट के जानकारों का दावा है कि करेंसी मार्केट में रुपये-डॉलर के करीब 30 अरब डॉलर के आर्बिट्रेज ट्रेड्स ओपन थे, जिन्हें अब अनवाइंड किया जा रहा है। बैंक जैसे-जैसे इन पोजीशन को बंद कर रही हैं, तो डॉलर की बिकवाली बढ़ रही है। रुपये की रैली के पीछे यही अनवाइंडिंग सबसे बड़ा ट्रिगर है।
क्या यह असली मजबूती है?
करेंसी मार्केट के जानकार इस तेजी को फंडामेंटल रिकवरी या मजबूती नहीं मान रहे हैं। क्योंकि, यह तेजी पॉलिसी ड्रिवन है। रिजर्व बैंक के निर्देशों पर रुपये के ट्रेड में शॉर्ट कवरिंग और अनवाइंडिंग हो रही है। यानी यह तकनीकी उछाल ज्यादा है, आर्थिक ताकत का संकेत कम।
अभी भी बने हुए हैं बड़े खतरे
वैश्विक स्तर पर जोखिम अभी भी कम नहीं हुए हैं। कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ता है। इसके अलावा मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली रुपये पर फिर दबाव बना सकती है।
आगे क्या? टिकेगी या फिसलेगी तेजी
रुपये में आई यह मजबूती फिलहाल राहत जरूर देती है, लेकिन इसकी स्थिरता पूरी तरह ग्लोबल क्यूज और RBI की आगे की रणनीति पर निर्भर करेगी। अगर डॉलर पर दबाव बना रहता है और कच्चा तेल काबू में रहता है, तभी यह तेजी टिक सकती है, वरना फिर कमजोरी लौट सकती है।
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