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घबराने की जरूरत नहीं! सुजाता शर्मा का बड़ा बयान- देश में कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार, 2 महीने की सप्लाई भी फिक्स

संयुक्त सचिव ने साफ कहा कि देश में कच्चा तेल, पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। LPG, LNG और PNG की सप्लाई भी पूरी तरह सुरक्षित है। कुछ जगह अफवाहों की वजह से पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें जरूर लगीं, लेकिन असल में किसी चीज की कमी नहीं है।

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सचिव ने साफ कहा कि देश में कच्चा तेल, पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव, सुजाता शर्मा ने बताया कि मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष का असर भारत में कच्चे तेल, LPG और LNG की सप्लाई पर पड़ा है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और दूसरे पेट्रोलियम उत्पाद महंगे हो गए हैं। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद भारत सरकार ने स्थिति को अच्छे तरीके से संभाला है। देश में कच्चे तेल का पर्याप्त स्टॉक है और अगले दो महीनों की सप्लाई भी पहले से तय है। LPG और PNG की स्थिति भी ठीक है। रिफाइनरियां पूरी क्षमता या उससे ज्यादा पर काम कर रही हैं और देश में LPG का उत्पादन करीब 40% बढ़ा है।

भारत काफी हद तक आयात पर निर्भर है, खासकर LPG के लिए, जो ज्यादातर होर्मुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। इसलिए सरकार ने पहले घरेलू ग्राहकों को प्राथमिकता दी और कुछ समय के लिए कमर्शियल LPG की सप्लाई रोक दी। बाद में इसे धीरे-धीरे शुरू किया गया—पहले 20%, फिर 30%, फिर 50% और अब 70% तक बढ़ा दिया गया है। 14 मार्च के बाद से करीब 30,000 टन कमर्शियल LPG सप्लाई की जा चुकी है।

सरकार ने इस बात का भी रखा है ध्यान

सरकार ने यह भी ध्यान रखा कि रेस्टोरेंट, ढाबे, होटल, फैक्ट्री कैंटीन और प्रवासी मजदूरों को जरूरी गैस मिलती रहे। प्रवासी मजदूरों को लगभग 30,000 छोटे (5 किलो वाले) गैस सिलेंडर दिए गए। उन्होंने साफ कहा कि देश में कच्चा तेल, पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। LPG, LNG और PNG की सप्लाई भी पूरी तरह सुरक्षित है। कुछ जगह अफवाहों की वजह से पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें जरूर लगीं, लेकिन असल में किसी चीज की कमी नहीं है।

कच्चे तेल की कीमत बढ़ी

हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत $70 से बढ़कर $100 प्रति बैरल से ज्यादा हो गई है, फिर भी सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि देश में किसी उत्पाद की कमी न हो और पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी न बढ़ें, जबकि कई पड़ोसी देशों में कीमतें बढ़ चुकी हैं। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के अध्यक्ष, विवेक चतुर्वेदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है, खासकर पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई पर। इस संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है।

उन्होंने बताया कि कच्चे तेल के महंगा होने से पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमतें भी बढ़ गई हैं। इससे रिफाइनरियों को ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए अपने उत्पादों को विदेशों में ऊंची कीमत पर बेचने का मौका मिल रहा है। सरकार ने इस स्थिति को संभालने के लिए संतुलित कदम उठाए हैं। उसने डीजल और विमान ईंधन के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) और सड़क एवं अवसंरचना उपकर (RIC) जैसे कुछ कर लगाए हैं, ताकि देश में सप्लाई बनी रहे और कीमतों को नियंत्रित किया जा सके।

Gaurav Tiwari
गौरव तिवारीauthor

गौरव तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट को कवर करते हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 9 वर्षों के अनुभव के साथ, गौरव तकनीकी दुनिया की तेजी से बदलती जानकारियो को सरल और समझने योग्य भाषा में पेश करने के लिए जाने जाते हैं। वह गैजेट रिव्यू, टेलिकॉम अपडेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्राइम, टिप्स एंड ट्रिक्स, ई-कॉमर्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर की महत्वपूर्ण खबरों पर लगातार काम करते हैं। गौरव अब तक 10,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। उनकी स्टोरीज न सिर्फ टेक-सेवी पाठकों के लिए उपयोगी होती हैं, बल्कि आम यूजर्स को भी नई तकनीक समझने और अपनाने में मदद करती हैं।

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