भारत में ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने पूरी जिंदगी मेहनत कर अच्छी-खासी बचत जमा की है, लेकिन रिटायरमेंट (Retirement) के बाद भी वे अपने पैसों को खर्च करने से हिचकिचाते हैं। कई बार स्थिति ऐसी होती है कि बैंक खाते में करोड़ों रुपये होने के बावजूद लोग एयर कंडीशनर चलाने, छुट्टियों पर जाने या अपनी सुविधाओं पर पैसा खर्च करने से बचते हैं। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला पैसे की बचत से जुड़ा नहीं बल्कि एक मानसिकता और वित्तीय योजना से जुड़ी परेशानी का है।
अपना ही पैसा खर्च करने में असहजता क्यों?
विशेषज्ञ मानते हैं कि पिछली पीढ़ी के कई लोगों ने अपना जीवन बचत और खर्च में कटौती करते हुए बिताया। नौकरी के दौरान उनका मुख्य लक्ष्य बच्चों की पढ़ाई, घर खरीदना और भविष्य के लिए पैसा जमा करना ही होता था। यही आदत रिटायरमेंट के बाद भी बनी रहती है। परिणाम यह होता है कि पर्याप्त बचत होने के बावजूद वे अपने ऊपर पैसा खर्च करने में असहज महसूस करते हैं।
पैसे का सही तरीके से होना चाहिए इस्तेमाल
अधिकतर लोग यह समझ ही नहीं पाते हैं कि रिटायरमेंट प्लानिंग का सबसे बड़ा उद्देश्य केवल पैसा जमा करना नहीं, बल्कि उस पैसे का सही तरीके से इस्तेमाल करना भी होता है। अगर किसी व्यक्ति ने अपने भविष्य के खर्चों, स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों और जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त फंड तैयार कर लिया है, तो उसे अपनी सुविधाओं पर उचित खर्च करने में संकोच नहीं करना चाहिए।
बचत की क्रय शक्ति को बनाए रखना भी जरूरी
हालांकि, कई लोग एक दूसरी गलती भी करते हैं। वे भविष्य के डर से अपनी सारी बचत को केवल सुरक्षित साधनों में रख देते हैं और महंगाई (Inflation) के असर को नजरअंदाज कर देते हैं। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, रिटायरमेंट के बाद भी कुछ हिस्से को ऐसी निवेश योजनाओं में रखना जरूरी हो सकता है, जो लंबे समय में महंगाई को मात दे सकें। केवल बचत करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बचत की क्रय शक्ति को बनाए रखना भी जरूरी है।
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि रिटायरमेंट के लिए बनाई गई पूंजी को अलग-अलग हिस्सों में बांटा जा सकता है। एक हिस्सा रोजमर्रा के खर्चों के लिए, दूसरा मध्यम अवधि की जरूरतों के लिए और तीसरा लंबी अवधि की वृद्धि के लिए रखा जा सकता है। इससे व्यक्ति को यह भरोसा मिलता है कि भविष्य सुरक्षित है और वह वर्तमान में अपनी जिंदगी का आनंद भी ले सकता है।
बच्चों की क्या भूमिका हो सकती है?
अगर आपके माता-पिता के पास पर्याप्त बचत है, लेकिन वे अपने ऊपर पैसा खर्च करने से बचते हैं, तो उन्हें यह समझाने की जरूरत है कि रिटायरमेंट का उद्देश्य केवल पैसा बचाकर रखना नहीं, बल्कि उस पैसे के सहारे आरामदायक जीवन जीना भी है। उन्हें यह भरोसा दिलाना जरूरी है कि अच्छी वित्तीय योजना, स्वास्थ्य बीमा और उचित निवेश के साथ वे अपने जीवन की सुविधाओं का आनंद ले सकते हैं।
