इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते समय अधिकांश लोगों का ध्यान इस बात पर रहता है कि उनकी कौन-सी आय पर टैक्स लगेगा और कितना टैक्स देना होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं भारतीय आयकर कानून में कुछ ऐसी आय भी हैं, जिन पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता। ऐसी आय को टैक्स-फ्री या कर-मुक्त आय कहा जाता है। इस आर्टिकल में आपको कमाई के ऐसे पांच तरीके ही बताने जा रहे हैं, जिन पर सरकार कोई टैक्स नहीं लेती-
कृषि से होने वाली आय
भारत में स्थित कृषि भूमि से अर्जित कृषि आय पर आयकर नहीं लगता। इसमें खेती-बाड़ी से होने वाली कमाई, कृषि उत्पादों की बिक्री से प्राप्त आय और कृषि भूमि से जुड़ी कुछ अन्य आय शामिल होती हैं। हालांकि, अगर किसी व्यक्ति की कृषि आय 5,000 रुपये से अधिक है और उसकी गैर-कृषि करयोग्य आय भी मूल कर छूट सीमा (Basic Exemption Limit) से अधिक है, तो कर की दर (Tax Rate) निर्धारित करने के लिए कृषि आय को ध्यान में रखा जा सकता है। इसके बावजूद कृषि आय स्वयं आयकर से मुक्त रहती है।
उपहार (Gift) से प्राप्त धन
कुछ रिश्तेदारों से प्राप्त उपहार, विवाह के अवसर पर मिले उपहार, विरासत (Inheritance) के माध्यम से प्राप्त संपत्ति, वसीयत (Will) के तहत मिली राशि या किसी व्यक्ति की मृत्यु की आशंका में प्राप्त संपत्ति पूरी तरह कर-मुक्त होती है। हालांकि, अगर किसी व्यक्ति को गैर-रिश्तेदारों से उपहार प्राप्त होते हैं और उनकी कुल कीमत एक वित्तीय वर्ष में 50,000 रुपये से अधिक हो जाती है, तो ऐसी राशि आयकर के दायरे में आ सकती है और उस पर टैक्स देना पड़ सकता है।
इश्योरेंस से प्राप्त राशि
जीवन बीमा पॉलिसी के तहत प्राप्त राशि आमतौर पर आयकर अधिनियम की धारा 10(10D) के तहत कर-मुक्त होती है, बशर्ते निर्धारित शर्तों का पालन किया गया हो। समय-समय पर सरकार ने अधिक प्रीमियम वाली बीमा पॉलिसियों और कुछ ULIP (यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान) पर कर छूट से संबंधित सीमाएं तय की हैं। हालांकि, अगर बीमित व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो उसके नाम पर मिलने वाली बीमा राशि पूरी तरह टैक्स फ्री रहती है, चाहे पॉलिसी का प्रीमियम कितना भी रहा हो।
प्रोविडेंट फंड से आय
EPF (कर्मचारी भविष्य निधि) जैसे मान्यता प्राप्त प्रोविडेंट फंड से निकाली गई राशि आमतौर पर कर-मुक्त होती है, बशर्ते निर्धारित शर्तों का पालन किया गया हो, जिसमें न्यूनतम लगातार सेवा अवधि की शर्त भी शामिल है। इसी तरह, पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) पर मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी पर प्राप्त राशि भी पूरी तरह टैक्स फ्री रहती है।
पार्टनरशिप फर्म या LLP से मिलने वाला लाभांश
किसी पार्टनरशिप फर्म या लिमिटेड लाइबिलिटी पार्टनरशिप (LLP) से प्राप्त मुनाफे में भागीदार (Partner) का हिस्सा आमतौर पर उसके व्यक्तिगत स्तर पर कर-मुक्त होता है। इसका कारण यह है कि उस आय पर पहले ही फर्म या LLP के स्तर पर कर लगाया जा चुका होता है। इसलिए उसी आय पर दोबारा भागीदार के हाथों में टैक्स नहीं लगाया जाता।
