भारतीय वैश्विक स्तर पर 42 फीसदी तक डिजिटल लेनदेन में योगदान करते हैं। भारत में सिर्फ 24 फीसदी लोग फाइनेंशियली एजुकेटेड हैं। स्टैंडर्ड एंड पूअर्स फाइनेंशियल सर्विसेज एलएलसी के ग्लोबल सर्वे में खुलासा हुआ है कि दक्षिण एशियाई देशों में 25 फीसदी से भी कम युवा आर्थिक तौर पर साक्षर हैं। मोदी सरकार की 9 साल पहले शुरू की गई जनधन योजना का लोगों के जीवन पर किस तरह बदलाव हुआ उसके बारे में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु ने जानकारी दी। वह एवोक इंडिया फाउंडेशन की इंटरनेशनल फाइनेंशियल लिटरेसी कॉन्क्लेव-2023 में बोल रहे थे। सुरेश प्रभु ने बताया कि जनधन योजना ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के बैंक खाते खोले गए। जिससे उन्होंने फाइनेंशियल एजुकेशन अपने आप सीख लिया। इसके लिए उन्हें किसी क्लास में या स्कूल में जाने की जरूरत नहीं पड़ी।
इसका असर यह हुआ कि कुछ समय बाद ही उनके परिवार और खासतौर पर बच्चों की लाइफस्टाइल में बदलाव देखा गया। पैसों के सही इस्तेमाल की जरूरतों को समझते हुए महिलाओं ने पूरा फाइनेंशियल एजुकेशन ही समझ लिया। उन्होंने आगे यह भी कहा कि असल में फाइनेंशियल एजुकेशन कहीं और से नहीं बल्कि खुद से सीखने की चीज है।
दक्षिण एशिया के 25 फीसदी युवा आर्थिक साक्षर
फाइनेंशियल एजुकेशन से जुड़े तथ्यों को पेश करते हुए एवोक इंडिया के संस्थापक प्रवीण कुमार द्विवेदी ने बताया कि भारत में सिर्फ 24 फीसदी लोग फाइनेंशियली एजुकेटेड हैं। स्टैंडर्ड एंड पूअर्स फाइनेंशियल सर्विसेज एलएलसी के ग्लोबल सर्वे में खुलासा हुआ है कि दक्षिण एशियाई देशों में 25 फीसदी से भी कम युवा आर्थिक तौर पर साक्षर हैं।
42 फीसदी डिजिटल लेनदेन करते हैं भारतीय
डिजिटल पैमेंट पर बात करते हुए अनंत नारायण ने सेबी की भूमिका पर अपनी बात रखी। उन्होंने पैसों की बचत करने वालों को इंवेस्टर्स की तरह प्रोत्साहित करने के सेबी के मिशन पर जोर दिया। इस मु्द्दे पर राय जाहिर करते हुए डॉ। प्रभाकर साहू ने बताया कि जनधन योजना के तहत 50 हजार बैंक खाते खोले गए। उन्होंने कहा,'भारतीय अब वैश्विक स्तर पर 42 फीसदी डिजिटल लेनदेन में योगदान करते हैं, जिसमें जन धन योजना की महत्वपूर्ण भूमिका है। IFLC 2023 के इस कार्यक्रम में एजुकेशन, बिजनेश और सरकार से जुड़े 32 से ज्यादा एक्सपर्ट्स ने भाग लिया।
