प्रतिष्ठित बिजनेस समूह लक्सर ग्रुप और भारत में पेन्सिल और कलर बनाने वाली कंपनी के संस्थापक दिवंगत डी.के. जैन की वसीयत को लेकर वर्षों से जारी कानूनी विवाद का पटाक्षेप आज सुप्रीम कोर्ट में हो गया। अदालत ने वसीयत पर जारी प्रोबेट (न्यायिक अनुमोदन) को पूरी तरह बरकरार रखते हुए संपत्ति को उनकी पत्नी उषा जैन के नाम करने के आदेश को अंतिम रूप दे दिया।
वसीयत की वैधता को लेकर बच्चों ने उठाए थे सवाल
डी.के. जैन का निधन वर्ष 2014 में हुआ था। उनकी वसीयत की प्रामाणिकता को उनके तीन बच्चों पायल कपूर, पंकज जैन और प्रिया जैन ने चुनौती देते हुए अदालत का रुख किया था। लंबी सुनवाई के बाद 27 मई 2025 को अदालत ने वसीयत को सही ठहराते हुए पूरी संपत्ति का अधिकार उषा जैन को सौंप दिया था। बाद में यह फैसला 19 अगस्त 2025 को डिवीजन बेंच द्वारा भी बरकरार रखा गया।
आज सुप्रीम कोर्ट की बेंच जिसमें जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन शामिल थे, ने प्रिया जैन द्वारा दायर एसएलपी (विशेष अनुमति याचिका) को खारिज कर दिया। इस तरह निचली अदालत और डिवीजन बेंच के सभी आदेश अब अंतिम रूप से प्रभावी हो गए हैं।
दोनों पक्षों की ओर से वरिष्ठ वकीलों ने रखा पक्ष
उषा जैन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने बहस की, जिनके साथ करंजावाला एंड कंपनी की टीम रूबी सिंह आहूजा, मेघा दुगर, त्रिभुवन एन. सिंह और अदिति मोहन शामिल थीं। वहीं पूजा जैन का प्रतिनिधित्व सीनियर एडवोकेट दर्पण वाधवा ने किया। वहीं प्रिया जैन की ओर से सीनियर एडवोकेट गौरव अग्रवाल पेश हुए, जिनकी सहायता अधिवक्ता प्रज्ञा बघेल ने की। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के साथ लक्सर ग्रुप संस्थापक की विरासत से जुड़ा यह पारिवारिक विवाद अंततः समाप्त हो गया है।
