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कर्ज से आजादी: भारी EMI के बोझ को हल्का करने का 'प्रो प्लान', अपनाएं ये स्मार्ट तरीके

Multiple EMI Trap: आजकल क्रेडिट कार्ड, पर्सनल लोन, होम लोन और Buy Now Pay Later जैसी सुविधाओं के कारण एक साथ कई EMI चलना आम बात हो गई है। शुरुआत में छोटी-छोटी किस्तें आसान लगती हैं, लेकिन जब कुल मिलाकर आधी से ज्यादा सैलरी EMI में जाने लगे तो यही स्थिति Debt Trap यानी कर्ज के जाल में बदल सकती है।

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कर्ज के जाल से कैसे निकलें (Photo: AI Generated)

Multiple EMI Trap: आज के दौर में 'बाय नाउ पे लेटर' और आसान पर्सनल लोन की वजह से कई लोग एक साथ कई ईएमआई (EMI) के जाल में फंस जाते हैं। लेकिन बहुत से लोग यह नहीं समझ पाते कि वे 'डेट ट्रैप' की ओर बढ़ रहे हैं। जब कमाई का बड़ा हिस्सा केवल किश्तें चुकाने में जाने लगे तो समझ लीजिए कि आप 'डेट ट्रैप' की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन सही वित्तीय प्लानिंग और कुछ फैसलों की मदद से आप इस दलदल से बाहर निकल सकते हैं। इस आर्टिकल में आपको उन तरीकों के बारे में ही बता रहे हैं, जो आपको भारी कर्ज से मुक्ति दिलाने में मददगार साबित होंगे-

50-30-20 नियम अपनाएं

कर्ज के जाल से बचने के लिए 50-30-20 नियम काम का साबित हो सकता है। इस नियम के साथ आप अपनी आय को 50-30-20 के तीन हिस्सों में बांट सकते हैं। आय का 50% घर, राशन, स्कूल आदि के लिए रख सकते हैं, 30% व्यक्तिगत खर्च और 20% बचत या निवेश के लिए रखा जा सकता है। अगर आपकी कुल EMI आय के 40–50% से ज्यादा हो रही है, तो यह चेतावनी संकेत है।

High Interest Loan पहले चुकाएं

क्रेडिट कार्ड EMI और पर्सनल लोन पर आमतौर पर ब्याज दरें काफी ज्यादा होती हैं, जिससे कुल भुगतान राशि तेजी से बढ़ जाती है। अगर इन कर्जों को लंबे समय तक चलने दिया जाए तो आप मूल रकम से कहीं अधिक ब्याज चुका सकते हैं। इसलिए कोशिश करें कि सबसे पहले हाई-इंटरेस्ट लोन को क्लियर करें, ताकि कुल ब्याज का बोझ कम हो और आपकी वित्तीय स्थिति जल्दी स्थिर हो सके।

Debt Consolidation पर विचार करें

अगर आप कई लोन या EMI एक साथ चुका रहे हैं तो Debt Consolidation पर विचार करना फायदेमंद हो सकता है। इसमें आप सभी छोटे-बड़े कर्ज को एक ही लोन में जोड़कर कम ब्याज दर और एक आसान मासिक किस्त में बदल सकते हैं। इससे भुगतान प्रबंधन सरल होता है और कुल ब्याज बोझ भी कम किया जा सकता है।

Emergency Fund बनाना जरूरी

हमेशा कम से कम 3–6 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड अलग से तैयार रखें। अचानक नौकरी जाने, आय कम होने या मेडिकल इमरजेंसी जैसी स्थिति में यही फंड आपकी आर्थिक सुरक्षा बनता है। इससे EMI बाउंस होने, पेनल्टी लगने और क्रेडिट स्कोर खराब होने से बचाव किया जा सकता है।

EMI Date और Salary Date संतुलित रखें

EMI की तारीख और सैलरी आने की तारीख के बीच सही संतुलन रखना बेहद जरूरी है। कोशिश करें कि EMI कटने की तारीख सैलरी क्रेडिट होने के कुछ दिनों बाद ही रखी जाए, ताकि अकाउंट में पर्याप्त बैलेंस बना रहे। इससे EMI बाउंस, लेट फीस और क्रेडिट स्कोर पर पड़ने वाले नकारात्मक असर से बचा जा सकता है।

नया लोन लेने से पहले सोचें

हर “Pre-approved Offer” आपके लिए फायदेमंद हो, यह जरूरी नहीं है। कई बार आसान लोन ऑफर आपको अतिरिक्त कर्ज के जाल में फंसा सकते हैं। इसलिए जब तक आपका मौजूदा कर्ज संतुलित और नियंत्रित न हो जाए, नया लोन लेने से बचना ही समझदारी है।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनाला author

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने ... और देखें

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