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पनामा नहर बना दुनिया का सबसे महंगा रास्ता! Hormuz Blockade के बीच करोड़ों निकल रहे जहाज

अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले और होर्मुज की घेराबंदी ने वैश्विक ऊर्जा सप्लाई को संकट में डाल दिया है। इसके चलते एशियाई देशों को तेल आपूर्ति के लिए मजबूरन नए रास्ते चुनने पड़ रहे हैं, जिससे अब पनामा नहर पर दबाव काफी बढ़ गया है।

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Panama Canal

आज की दुनिया में व्यापार पूरी तरह से समुद्री रास्तों पर टिका है, लेकिन पिछले कुछ समय से जियो पोलिटिकल टेंशन ने इन रास्तों को 'जंग का मैदान' बना दिया है। एक तरफ ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz) में जहाजों का निकलना दूभर हो गया है, तो दूसरी तरफ इसका सीधा असर दुनिया के दूसरे छोर पर स्थित पनामा नहर (Panama) पर पड़ रहा है। होर्मुज में ब्लॉकेड या रुकावट के डर से अब समुद्री जहाज पनामा नहर का रास्ता चुन रहे हैं, जिससे इस नहर से गुजरने की होड़ लग गई है। आलम यह है कि पनामा नहर इस वक्त दुनिया का सबसे महंगा समुद्री रास्ता बन चुका है।

होर्मुज संकट से पनामा जा रहे जहाज

होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया की 'तेल धमनी' कहा जाता है, क्योंकि वैश्विक कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा यहीं से गुजरता है। ईरान द्वारा इस रास्ते को बंद करने की धमकियों ने शिपिंग कंपनियों को डरा दिया है। कंपनियां अब जोखिम भरे होर्मुज के बजाय पनामा नहर को प्राथमिकता दे रही हैं। हालांकि, पनामा नहर खुद सूखे (Drought) और जलस्तर में कमी के कारण सीमित क्षमता के साथ काम कर रही है। मांग बढ़ने और सप्लाई कम होने के कारण यहां से गुजरने के लिए अब 'वेटिंग लिस्ट' लंबी हो गई है, जिसका फायदा उठाकर पनामा नहर प्रशासन ने नीलामी (Auction) का सहारा लिया है।

करोड़ों की बोलियां और 'वीआईपी' एंट्री

पनामा नहर से जल्दी निकलने के लिए अब शिपिंग कंपनियों के बीच होड़ मची है। सामान्य वेटिंग पीरियड हफ़्तों का हो चुका है, जिसे बाईपास करने के लिए 'स्लॉट' की नीलामी की जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, एक जहाज को कतार में आगे लाने के लिए कंपनियां 30 से 40 करोड़ रुपये (लगभग 4 मिलियन डॉलर) तक की अतिरिक्त बोली लगा रही हैं। यह रकम केवल रास्ता पाने के लिए है, नियमित टोल और फीस इसके अलावा है। यह स्थिति उन जहाजों के लिए ज्यादा गंभीर है जो कीमती सामान या ऐसा सामान लेकर जा रहे हैं जिनकी समय सीमा कम है।

महंगाई पर पड़ेगा सीधा असर

जब जहाजों को रास्ता पाने के लिए करोड़ों रुपये अतिरिक्त देने पड़ते हैं, तो इसका सीधा बोझ आम जनता की जेब पर पड़ता है। शिपिंग लागत बढ़ने का मतलब है कि आयातित सामान, तेल, और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी चीजें महंगी हो जाएंगी। होर्मुज में तनाव और पनामा में ऊंची बोलियां मिलकर वैश्विक सप्लाई चेन को तोड़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संकट लंबा चला, तो दुनिया भर में एक बार फिर महंगाई का बड़ा झटका लग सकता है। शिपिंग कंपनियां अब वैकल्पिक रास्तों की तलाश में हैं, लेकिन सुरक्षा और समय के लिहाज से उनके पास विकल्प बहुत सीमित हैं।

शिपिंग इंडस्ट्री में बदलता समीकरण

पनामा नहर के इस 'प्रीमियम' मॉडल ने शिपिंग इंडस्ट्री के समीकरण बदल दिए हैं। अब केवल वही कंपनियां समय पर अपना सामान पहुंचा पा रही हैं जिनके पास मोटी बोली लगाने का बजट है। छोटी कंपनियां और कम मुनाफे वाले सामान ले जाने वाले जहाजों को हफ़्तों तक समुद्र में इंतजार करना पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल आर्थिक बल्कि रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दिखाती है कि कैसे दुनिया के एक हिस्से का युद्ध दूसरे हिस्से के व्यापारिक मार्गों को नियंत्रित कर सकता है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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