Stock Market Today: वैश्विक बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव के बीच अब माहौल अचानक बदलता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने निवेशकों की चिंता कम कर दी है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ जारी तनाव जल्द खत्म हो सकता है और तेल की कीमतों को नीचे रखने के लिए अमेरिका कुछ बड़े कदम उठा सकता है। इसी संकेत के बाद वैश्विक बाजारों में तेजी लौटती दिखी और अमेरिकी इंडेक्स में भी तेज रिकवरी आई।
ट्रंप ने क्या कहा ?
ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ जारी युद्ध “बहुत जल्द खत्म” हो सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका तेल से जुड़े कुछ प्रतिबंधों में ढील दे सकता है और Strait of Hormuz से गुजरने वाले तेल टैंकरों को अमेरिकी नौसेना सुरक्षा दे सकती है। इस बयान का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा। निवेशकों को लगा कि अगर युद्ध जल्दी खत्म होता है और तेल सप्लाई सामान्य होती है तो ऊर्जा कीमतों का दबाव कम हो जाएगा।
तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव
तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें दिन में एक समय 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। लेकिन ट्रंप के बयान के बाद बाजार का रुख पलट गया और कीमतें तेजी से गिरकर 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं। दुनिया के बड़े तेल निर्यातक देश भी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और जरूरत पड़ने पर आपातकालीन तेल भंडार जारी करने पर विचार कर रहे हैं। यही वजह है कि ऊर्जा संकट की आशंका फिलहाल थोड़ी कम होती दिख रही है।
अमेरिकी बाजार में आई रिकवरी
ट्रंप के बयान के बाद अमेरिकी शेयर बाजार में तुरंत प्रतिक्रिया देखने को मिली। बेंचमार्क इंडेक्स S&P 500 करीब 1% तक उछल गया। निवेशकों ने इसे संकेत माना कि अगर युद्ध का जोखिम कम होता है तो महंगाई और ऊर्जा लागत का दबाव भी घट सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिल सकती है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह खबर
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है। इसलिए जब भी कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आता है तो इसका असर रुपये, महंगाई और शेयर बाजार तीनों पर पड़ता है। अगर तेल कीमतें नीचे आती हैं और पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है तो भारतीय बाजार में भी राहत की मजबूत संभावना बनती है। इसी वजह से आज घरेलू शेयर बाजार में तेज उछाल देखने की उम्मीद जताई जा रही है।
जोखिम अभी पूरी तरह खत्म नहीं
हालांकि ट्रंप ने युद्ध खत्म होने के संकेत दिए हैं, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अगर ईरान ने तेल सप्लाई बाधित करने की कोशिश की तो अमेरिका और ज्यादा ताकत से जवाब देगा। इसका मतलब है कि बाजार में राहत जरूर आई है, लेकिन भू-राजनीतिक जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। निवेशक अब अगले कुछ दिनों में आने वाले संकेतों पर नजर रखेंगे, क्योंकि यही तय करेगा कि यह तेजी टिकाऊ होगी या सिर्फ राहत रैली।
