Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में पिछले तीन दिनों से जारी तेजी पर आज गुरुवार को ब्रेक लग गया है। भारतीय बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। 1 बजे तक सेंसेक्स 737 अंक टूटकर 82,950 अंक पर ट्रेड कर रहा है। इसी तरह एनएसई निफ्टी भी 193.15 अंक टूटकर 25,626.20 अंक पर ट्रेड कर रहा है। कारोबार के दौरन निफ्टी ने आज 25,567.75 अंक का लो बनाया है। बाजार में बड़े पैमाने पर बिकवाली का असर मिड और स्मॉल-कैप इंडेक्स पर पड़ा, क्योंकि BSE मिड और स्मॉल-कैप इंडेक्स भी आधे परसेंट से ज्यादा गिर गए। बाजार में बड़ी गिरावट से निवेशकों को लगभग ₹4 लाख करोड़ डूब गए हैं, क्योंकि BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन पिछले सेशन के ₹472 लाख करोड़ से घटकर दिन के दौरान लगभग ₹468 लाख करोड़ हो गया।आखिर बाजार में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आ गई है? आइए जानते हैं।
इन 5 कारणों के चलते आज टूटा बाजार
तेजी के बाद मुनाफावसूली
आज शेयर बाजार में हाल की तेजी के बाद निवेशक मुनाफावसूली कर रहे हैं। बुधवार को BSE Sensex और Nifty 50 लगातार तीसरे सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए थे। बजट, भारत-अमेरिका समझौता और Reserve Bank of India (RBI) की नीति जैसे बड़े ट्रिगर पहले ही आ चुके हैं और तिमाही नतीजों का सीजन भी खत्म हो चुका है। ऐसे में ताजा सकारात्मक संकेतों की कमी के कारण निवेशक मुनाफा बुक कर रहे हैं।
मेरिकी फेड के मिले-जुले संकेत
Federal Reserve (Fed) की जनवरी बैठक के मिनट्स में संकेत मिला कि अधिकारी ब्याज दरों के भविष्य को लेकर एकमत नहीं हैं। कुछ सदस्य महंगाई घटने पर दरों में कटौती की संभावना देखते हैं। वहीं कुछ सदस्य जरूरत पड़ने पर सख्ती के पक्ष में हैं। अगर दरों में कटौती लंबी अवधि तक टलती है या बढ़ोतरी होती है, तो डॉलर मजबूत हो सकता है, जिससे भारतीय बाजारों में विदेशी निवेश (FII) पर असर पड़ सकता है। इसका असर भी भारतीय बाजार पर है।
अमेरिका-ईरान में युद्ध की आशंका
एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई की तैयारी में हो सकता है। अगर तनाव बढ़ता है तो यह पूर्ण युद्ध जैसी स्थिति बन सकती है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से निवेशक सतर्क हैं और जोखिम कम करने के लिए बाजार से पैसा निकाल रहे हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी बाजार पर दबाव डाल रही है। WTI क्रूड $65 प्रति बैरल के पार और ब्रेंट क्रूड $70 प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है। भारत दुनिया के बड़े तेल आयातकों में से एक है, इसलिए ऊंची कीमतें महंगाई, चालू खाते के घाटे और रुपये पर दबाव डाल सकती हैं।
सकारात्मक ट्रिगर की कमी
विशेषज्ञ मानते हैं कि 2026 में आय वृद्धि और मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिति के चलते लंबी अवधि में बाजार सकारात्मक रह सकता है, लेकिन फिलहाल नए ट्रिगर की कमी है। निफ्टी लगभग FY27 की अनुमानित कमाई के 20 गुना पर ट्रेड कर रहा है, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर अपेक्षाकृत महंगे स्तर पर हैं। ऐसे में बाजार फिलहाल रेंज-बाउंड रह सकता है। ये सारे कारण भारतीय बाजार को नीचे धकेल रहे हैं।
