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SEBI: स्टॉक ब्रोकर्स की बढ़ गई धड़कन, गिरेगा 30-40 फीसदी बिजनेस, जानें क्या करने जा रहा है सेबी

SEBI, Future And Options: रिपोर्ट के मुताबिक, छूट देने वाले ब्रोकर, जो रिटेल निवेशकों पर बहुत अधिक निर्भर हैं, वे पारंपरिक ब्रोकरों की तुलना में अधिक प्रभावित हो सकते हैं।सेबी के इन उपायों से एफएंडओ कारोबार की मात्रा में 30-40 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है।

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SEBI के नए नियम

Photo : PTI

SEBI, Future And Options:प्रतिभूति बाजार में फ्यूचर एंड ऑप्शंस (F&O) कारोबार को रेग्युलेट करने के लिए नियामक सेबी (SEBI) के प्रस्तावित उपायों से शेयर बाजारों और ब्रोकरों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। एक रिपोर्ट में यह आशंका जताई गई है। सेबी के इन उपायों से एफएंडओ कारोबार की मात्रा में 30-40 प्रतिशत की गिरावट आएगी। अगर इन उपायों को लागू किया गया तो खुदरा निवेशकों की संख्या में कमी आ सकती है।हालांकि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने ये उपाय रिटेल निवेशकों को नुकसान से बचाने के लिए उठाए हैं।

क्यों आएगी गिरावट

रिपोर्ट के मुताबिक, छूट देने वाले ब्रोकर, जो रिटेल निवेशकों पर बहुत अधिक निर्भर हैं, वे पारंपरिक ब्रोकरों की तुलना में अधिक प्रभावित हो सकते हैं।सेबी के इन उपायों से एफएंडओ कारोबार की मात्रा में 30-40 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। अगर इन उपायों को लागू किया गया तो रिटेल निवेशकों की संख्या में कमी आ सकती है।

ऑप्शन वित्तीय अनुबंध होते हैं, जो धारक को अनुबंध अवधि के भीतर किसी एसेट को तय मूल्य पर खरीदने या बेचने का अधिकार देते हैं।सेबी के इन सात प्रस्तावों में साप्ताहिक विकल्प अनुबंधों को युक्तिसंगत बनाना, परिसंपत्तियों की स्ट्राइक कीमतों को युक्तिसंगत बनाना और अनुबंध समाप्ति के दिन कैलेंडर स्प्रेड लाभों को हटाना शामिल है।

सेबी का ये है प्रस्ताव

जेफरीज की रिपोर्ट के अनुसार अन्य चार प्रस्तावों में विकल्पों के खरीदारों से विकल्प प्रीमियम का एडवांस कलेक्शन, सौदे करने की सीमा की दिन में कारोबार के दौरान निगरानी, लॉट आकार में वृद्धि और अनुबंध समाप्ति के निकट मार्जिन आवश्यकताओं में वृद्धि शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, साप्ताहिक विकल्प अनुबंधों की संख्या को 18 से घटाकर छह करने के सेबी के प्रस्तावित उपायों से उद्योग के प्रीमियम पर लगभग 35 प्रतिशत प्रभाव पड़ सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया कि अगर कारोबार बाकी अनुबंधों पर स्थानांतरित होता है तो समग्र प्रभाव 20-25 प्रतिशत तक कम हो सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 तक एनएसई की आय में 25-30 प्रतिशत की कमी आ सकती है, जबकि बीएसई की आय में 15-18 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है।जेफरीज का यह भी मानना है कि बैंकेक्स साप्ताहिक अनुबंध को हटाने से वित्त वर्ष 2025-27 के दौरान बीएसई की प्रति शेयर आय (ईपीएस) पर 7-9 प्रतिशत का असर पड़ सकता है।इसने आगे कहा कि बीएसई की आय में थोड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है, लेकिन अगर ट्रेडिंग गतिविधि दूसरे उत्पादों पर चली जाती हैं तो यह प्रभाव कम हो सकता है।वहीं आईआईएफएल सिक्योरिटीज ने अनुमान जताया कि इन नियमों से एमसीएक्स पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

Prashant Srivastav
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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