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मानसून की सुस्ती बढ़ा सकती है किसानों की चिंता, खरीफ बुवाई पर संकट के बादल

अल-नीनो संकट का असर इस बार मानसून पर दिखाई दे रहा है। अभी तक देश में मानसून की रफ्तार सुस्त है। इसका बुरा असर खरीफ फसल की बुआई पर पड़ने की आशंका है।

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खरीफ फसल

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कहा कि मानसून में देरी के कारण खरीफ फसलों की बुवाई पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है, क्योंकि 315 जिलों में सामान्य से कम वर्षा होने के आसार हैं। उन्होंने कहा कि कमजोर मानसून को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अग्रिम तैयारियां शुरू कर दी हैं।

चौहान ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि 111 जिलों को सबसे अधिक संवेदनशील के रूप में चिन्हित किया गया है, क्योंकि वहां सिंचाई की सुविधा 25 प्रतिशत से भी कम है। इनमें से 20 जिले केवल महाराष्ट्र में हैं। उन्होंने कहा कि मानसून में देरी हुई है। अब तक 43 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है।

खरीफ की बुआई में देरी

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के पूर्वानुमान के अनुसार, दो जुलाई को समाप्त होने वाले सप्ताह तक मानसून कमजोर रहने का अनुमान है। अब तक कुल खरीफ क्षेत्र का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा बोया जा चुका है। 22 जून तक सभी खरीफ फसलों का कुल रकबा 1.17 करोड़ हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 1.13 करोड़ हेक्टेयर से अधिक है।

रासायनिक खाद पर निर्भरता घटाने की जरूरत

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के चेयरमैन एस महेंद्र देव ने मंगलवार को कहा कि फसल विविधीकरण, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन देकर रासायनिक उर्वरक की खपत कम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने में कृषि क्षेत्र की अहम भूमिका होगी। देव ने कहा कि कृषि क्षेत्र को और अधिक विविध, पौष्टिक, टिकाऊ और जलवायु के अनुकूल बनाने की जरूरत है।

ईएसी-पीएम के चेयरमैन ने फसल की उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ फसल कटाई के बाद की गतिविधियों और विपणन को बेहतर बनाने पर जोर दिया। उर्वरक की अधिक खपत के बारे में देव ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण आपूर्ति की समस्याएं पैदा हुईं और सब्सिडी बढ़ गई। हालांकि, उन्होंने कहा कि अच्छी बात यह है कि यूरिया की वैश्विक कीमतें तेजी से कम हुई हैं।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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