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क्या सच में SIP आपको रातों-रात अमीर बना सकती है? जानिए वो 6 मिथक जो कोई नहीं बताता

SIP Investment Myths: SIP एक सरल, अनुशासित और प्रभावी निवेश तरीका है, लेकिन इससे जुड़े मिथकों को समझना बेहद जरूरी है। सही जानकारी के आधार पर ही निवेश निर्णय लेना चाहिए।

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SIP से जुड़े मिथक (Photo: Istock)

SIP Investment Myths: आज के समय में Systematic Investment Plan (SIP) निवेश का एक लोकप्रिय तरीका बन चुका है। हालांकि, एसआईपी को लेकर कई गलतफहमियां (myths) भी फैली हुई हैं, जिनके कारण अक्सर लोग सही निर्णय लेने में परेशानी का सामना करते हैं। इस आर्टिकल में आपको एसआईपी से जुड़े मिथक और सच्चाई की ही जानकारी दे रहे हैं-

SIP से जल्दी पैसा बनता है

कई लोग मानते हैं कि SIP एक जल्दी अमीर बनने का तरीका है। सच्चाई यह है कि SIP एक लंबी अवधि का निवेश है, जो compounding और rupee cost averaging के जरिए धीरे-धीरे धन बढ़ाता है। इसमें धैर्य और अनुशासन बेहद जरूरी है। ऐसे में जल्दी मुनाफे की उम्मीद करना गलत है।

रिटर्न अच्छे नहीं तो SIP बंद कर देनी चाहिए

SIP (Systematic Investment Plan) से जुड़ा यह सबसे आम और गलत समझा जाने वाला मिथक है। कई निवेशक जब देखते हैं कि उनके SIP के हाल के रिटर्न अच्छे नहीं हैं तो वे घबराकर अपना निवेश बंद कर देते हैं। सच्चाई यह है कि केवल कुछ समय के कम रिटर्न के आधार पर SIP को बंद करना सही फैसला नहीं होता। याद रखें कि SIP का असली फायदा तब मिलता है जब आप लंबे समय (कम से कम 10–12 साल) तक निवेश बनाए रखते हैं। बाजार में उतार-चढ़ाव आना सामान्य बात है। कभी रिटर्न ज्यादा होते हैं, तो कभी कम। एक-दो साल के खराब प्रदर्शन का आपके कुल निवेश पर ज्यादा असर नहीं पड़ता।

मार्केट से जुड़े होने के कारण SIP जोखिम भरा

कई लोग मानते हैं कि SIP (Systematic Investment Plan) में निवेश करना बहुत जोखिम भरा होता है, क्योंकि यह शेयर बाजार से जुड़ा होता है। सच्चाई यह है कि इक्विटी म्यूचुअल फंड निश्चित रूप से बाजार के उतार-चढ़ाव (volatility) से प्रभावित होते हैं। बाजार कभी गिरता है तो कभी बढ़ता भी है, यह उसकी सामान्य प्रकृति है। लेकिन SIP का असली फायदा इसी उतार-चढ़ाव का सही तरीके से लाभ उठाने में है। जब आप SIP के जरिए नियमित निवेश करते हैं, तो बाजार की स्थिति के अनुसार आपकी निवेश राशि अलग-अलग कीमतों पर यूनिट्स खरीदती है। जब बाजार कमजोर होता है, तब आपको कम कीमत पर ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं। जब बाजार मजबूत होता है, तब आप कम यूनिट्स खरीदते हैं। इस प्रक्रिया को रुपी कॉस्ट एवरेजिंग (Rupee Cost Averaging) कहा जाता है, जो लंबे समय में आपके निवेश के जोखिम को संतुलित करने में मदद करती है।

SIP पूरी तरह सुरक्षित है

कुछ निवेशक सोचते हैं कि SIP में कभी नुकसान नहीं होता। हालांकि, सच्चाई यह भी है कि SIP म्यूचुअल फंड से जुड़ा होता है, जो बाजार जोखिम के अधीन है। बाजार गिरने पर निवेश का मूल्य कम हो सकता है, लेकिन लंबी अवधि में उतार-चढ़ाव संतुलित हो जाते हैं।

SIP केवल अमीर लोगों के लिए है

यह धारणा भी आम है कि SIP शुरू करने के लिए बड़ी रकम चाहिए। सच्चाई यह है कि SIP बहुत ही सुलभ निवेश विकल्प है। कई योजनाओं में 500 रुपए या उससे कम से भी शुरुआत की जा सकती है, जिससे यह हर वर्ग के लोगों के लिए उपयुक्त है।

SIP में लॉक-इन पीरियड होता है

कई लोग सोचते हैं कि SIP में निवेश करने के बाद पैसे निकाल नहीं सकते। सच्चाई यह है कि SIP में खुद कोई लॉक-इन नहीं होता। हालांकि, जिस म्यूचुअल फंड में निवेश किया गया है, उसमें कुछ शर्तें हो सकती हैं।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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