बीते कुछ महीनों में चांदी और सोने छप्परफाड़ रिटर्न निवेशकों को दिया है। अगर आपने भी चांदी से कमाई की है तो ये खबर आपके काम की साबित हो सकती है। पिछले साल चांदी की कीमतों में करीब 87% की बढ़ोतरी देखी गई है। ऐसे में कई निवेशक यह जानना चाहते हैं कि चांदी से हुई कमाई पर कितना टैक्स लगेगा और इसे कैसे चुकाना होगा। चांदी में निवेश कई तरीकों से किया जा सकता है। आमतौर पर निवेशक भौतिक चांदी, चांदी ETFs (एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स) और म्यूचुअल फंड्स के माध्यम से निवेश करते हैं।
फिजिकल चांदी में आभूषण, बार और सिक्के आते हैं, जबकि ETFs और म्यूचुअल फंड्स निवेशकों को बिना भौतिक चांदी रखे ही चांदी में निवेश करने का मौका देते हैं।
कैसे कैलकुलेट होता है टैक्स?
चांदी से होने वाली आय पर टैक्स निवेश के प्रकार और होल्डिंग अवधि पर निर्भर करता है। यदि आप भौतिक चांदी को 24 महीने से कम अवधि में बेचते हैं, तो इसे अल्पकालिक पूंजी लाभ (STCG) माना जाता है और आपकी आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा। वहीं, यदि आप इसे 24 महीने या उससे अधिक समय तक रखते हैं, तो यह दीर्घकालिक पूंजी लाभ (LTCG) के अंतर्गत आता है। 23 जुलाई 2024 के बाद खरीदी गई चांदी पर LTCG का टैक्स 12.5% है, जबकि इससे पहले खरीदी गई चांदी पर 20% टैक्स लगेगा जिसमें अनुक्रमण लाभ शामिल है।
ETF पर कैसे लगता है टैक्स?
चांदी ETFs और म्यूचुअल फंड्स में निवेश की स्थिति थोड़ी अलग है। अगर इन्हें 12 महीने के भीतर बेचा जाता है, तो इसका लाभ STCG के रूप में माना जाता है और स्लैब दरों पर टैक्स लगता है। यदि इन्हें 12 महीने से अधिक समय तक रखा जाता है, तो LTCG के अंतर्गत लाभ आएगा और टैक्स दर 12.5% होगी।
ये भी होते हैं लागू
इसके अलावा, चांदी पर कुछ अन्य कर नियम भी लागू होते हैं। आमतौर पर चांदी की बिक्री पर TDS (स्रोत पर कर कटौती) लागू नहीं होती, लेकिन कुछ परिस्थितियों में यह लागू हो सकती है। उदाहरण के लिए, गैर-निवासियों को किए गए भुगतान पर धारा 195 के तहत और ₹50 लाख से अधिक लेनदेन पर धारा 194Q के तहत TDS लागू हो सकता है। इसके अलावा, चांदी और चांदी से बने आभूषणों पर GST लागू होता है, जिसमें धातु के मूल्य पर 3% और आभूषण बनाने के चार्ज पर 5% GST लगाया जाता है।
