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Good News: चांदी की कीमत में आएगी 60% की बड़ी गिरावट! ये है बड़ी वजह

चांदी की आसमान छूती कीमतों के बीच, इसकी इंडस्ट्रियल डिमांड खतरे में पड़ गई है क्योंकि फोटोवोल्टेइक सेल और सोलर इंडस्ट्रीज़ चांदी से तांबे पर शिफ्ट हो गई हैं। सॉलिड-स्टेट बैटरी के लिए भी, चांदी कॉइल बाइंडिंग से तांबे कॉइल बाइंडिंग में बदलने की कोशिशें चल रही हैं। इजराइल, ताइवान, ऑस्ट्रेलिया और चीन की कुछ कंपनियां सॉलिड-स्टेट बैटरी में चांदी की जगह तांबे का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही हैं। इसका असर चांदी की मांग पर होगा। मांग में बड़ी गिरावट आने से कीमत धड़ाम हो सकती है।

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चांदी

चांदी की कीमत में पिछले साल रिकॉर्ड तेजी रही। इस तेजी के चलते चांदी प्रति किलो 2.54 लाख रुपये पर पहुंच गई। हालांकि, उसके बाद बड़ी गिरावट आई है। आज घरेलू बाजार में चांदी की कीमत 2.35 लाख रुपये प्रति किलो पर है। आपको बता दें कि चांदी की कीमत 2025 में बढ़ती डिमांड-सप्लाई की कमी के कारण लगभग 180% बढ़ी, लेकिन अब एक्सपर्ट इसकी कीमत में 60% की बड़ी गिरावट की बात कर रहे हैं। वो इसके पीछे सॉलिड तर्क दे रहे हैं। आइए ऐसा क्या होगा कि चांदी की कीमत में इतनी बड़ी गिरावट आ सकती है।

इस कारण चांदी की कीमत में रिकॉर्ड तेजी आई थी

चांदी की कीमत में तेजी के पीछे कई वजह रही। सैमसंग द्वारा लिथियम-आयन बैटरी से सॉलिड-स्टेट बैटरी में बदलने की घोषणा के बाद इंडस्ट्रियल डिमांड बढ़ने से सफेद धातु की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। कुछ स्ट्रक्चरल बदलाव, जैसे अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते तनाव के कारण पेरू और चाड से एक्सपोर्ट सप्लाई में रुकावट, और 1 जनवरी, 2026 से चीन द्वारा चांदी के एक्सपोर्ट पर अप्रत्यक्ष बैन ने कीमत बढ़ाने का काम किया।

क्यों गिरावट की आशंका जता रहे एक्सपर्ट?

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आज चांदी की कीमत खतरनाक लेवल पर पहुंच गई है, और इस कीमत में बढ़ोतरी की वजह से इसकी इंडस्ट्रियल डिमांड खतरे में पड़ सकती है। एक्सपर्ट्स ने कहा कि अगर किसी इंडस्ट्री की लागत एक खास लेवल से ज़्यादा बढ़ जाती है, तो वह दूसरे ऑप्शन देखने लगती है। फोटोवोल्टिक सेल और सोलर पैनल पहले ही चांदी को छोड़कर तांबे की तरफ बढ़ चुके हैं। जहां तक बैटरी की बात है, तो चांदी से कॉपर बाइंडिंग टेक्निक पर स्विच करने की कोशिशें की जा रही हैं। ऐसा होने पर इस सफेद धातु के मंदी की चपेट में रहने की उम्मीद है और FY27 के आखिर तक इसमें 60% तक की गिरावट आ सकती है।

क्या इतिहास खुद को दोहराने वाला है?

चांदी के इतिहास पर नजर डालें तो सिल्वर की कीमत में एक मजबूत बुल ट्रेंड के बाद इसमें भारी गिरावट आती है। कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता बताते हैं कि हमने ऐसा 1980 में होते देखा था, जब हंट ब्रदर्स ने कथित तौर पर दुनिया के सिल्वर रिजर्व का लगभग एक-तिहाई हिस्सा जमा कर लिया था। इससे एक्सचेंजों को मार्जिन मनी बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा, जो पहले ही शुरू हो चुका है क्योंकि CDX ने मार्जिन मनी 25% बढ़ा दी है। इससे लिक्विडिटी की कमी के कारण शॉर्ट-कवरिंग शुरू हो गई, और सिल्वर की कीमतें लगभग $49.50 से गिरकर लगभग $11 प्रति औंस हो गईं। 2011 में भी ऐसा ही हुआ था जब सिल्वर की दरें लगभग $48 प्रति औंस के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद 75% गिर गईं। यह इतिहास एक बार फिर दोहरा सकता है।

Alok Kumr
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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