Nifty-Sensex Today: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते क्रूड के दाम में आई तेजी और यूएस फेड के फैसले को लेकर निवेशकों में हिचकिचाहट बनी हुई है। इसी वजह से ओवरसोल्ड जोन में पहुंचने के बाद भी बाजार में मजबूत रिकवरी के संकेत नजर नहीं आ रहे हैं। सोमवार 16 मार्च को निफ्टी और सेंसेक्स लगभग सपाट स्तरों पर खुले, इसके बाद निफ्टी करीब 133.55 अंक की तेजी के साथ 23,284.65 तक पहुंच गया। हालांकि, यहां से शुरू हुई जबरदस्त बिकवाली के दबाव में निफ्टी करीब 200 अंक की गिरावट के साथ 22,955.25 अंक तक लुढ़क गया। इसी तरह सेंसेक्स भी डे हाई से डे लो के बीच करीब 1,033.53 अंक फिसलकर 73,949.76 पर आ गया। अप्रैल 2025 के बाद सबसे निचला स्तर है।
एशियाई बाजारों में दिखी रिकवरी
फिलहाल, भारतीय बाजारों में भले ही एकतरफा बिकवाली हावी दिख रही है। लेकिन, सिंगापुर, हांग कांग, ताइवान और दक्षिण कोरियाई बाजारों में मजबूत रिकवरी देखने को मिली है। यहां के बेंचमार्क इंडेक्स 1 फीसदी से ज्यादा तेजी में बने हुए हैं। हालांकि, भारतीय बाजार में भी कारोबार के शुरुआती घंटे में हल्की रिकवरी देखने को मिली थी, लेकिन यह ज्यादा देर नहीं टिकी।
ब्रोकरेज ने घटाया टारगेट
ET Now की रिपोर्ट के मुताबिक निफ्टी के कमजोर कारोबार को लेकर अब ब्रोकरेज भी सतर्क हैं। फिलहाल, नोमुरा ने दिसंबर 2026 के लिए दिए गए अपने निफ्टी के टारगेट को 29,300 से घटाकर 24900 कर दिया है। वहीं, सिटी ने भी अपनी एक रिपोर्ट में भारतीय कंपनियों के लिए ऑयल सप्लाई को एक बड़ी चुनौती मानते हुए, अर्निंग्स पर इसके असर को हाइलाइट करते हुए माना है कि इसकी वजह से ग्रोथ पर असर देखने को मिल सकता है। इसके अलावा सिटी ने अपने निफ्टी के लिए दिसंबर 2026 के टारगेट को 28000 से घटाकर 27000 कर दिया है।
ब्रोकरेज ने क्या कहा?
ब्रोकरेज फर्म नोमुरा का कहना है, इन्वेस्टर्स मौजूदा हालात को लेकर ज्यादा परेशान हो सकते हैं, क्योंकि इससे एनर्जी सप्लाई और कीमतों पर ज्यादा असर पड़ रहा है। फिलहाल रुकावटें खत्म होने के कोई संकेत नहीं हैं। हमारे हिसाब से, ईरान में सरकार बदलने या आर्थिक दिक्कतों की वजह से मजबूरी में युद्धविराम से यह लड़ाई खत्म हो सकती है।
वहीं, सिटी का कहना है कि क्रूड अगर 80 डॉलर प्रति बैरल तक रहता है, तो रिटेल फ्यूल की कीमतों में कोई बदलाव की उम्मीद नहीं है। लेकिन, 100 से 125 डॉलर प्रति बैरल बना रहता है, तो कीमतें रिटेल कीमतें 10 से 25 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकती हैं, जिसका कंपनियों की ग्रोथ, अर्निंग सहित पूरी इकोनॉमी पर गहरा आघात होगा।
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