Shadowfax IPO: कमाई से 1115 गुना महंगा शेयर और सन्नाटे में GMP; फिर भी लगाना है पैसा, तो जान लें ब्रोकरेज की राय?
- Authored by: यतींद्र लवानिया
- Updated Jan 20, 2026, 07:22 PM IST
इस साल की पहली मेनबोर्ड लिस्टिंग भारत कोकिंग कोल ने आईपीओ से पैसा बनाने वालों के हौसले बुलंद कर दिए हैं। फिलहाल, मेनबोर्ड में शैडोफैक्स अकेला इश्यू है, जो सब्सक्रिप्शन के लिए खुला है। अगर आप भी इसमें निवेश की योजना बना रहे हैं, तो इसके बारे में कुछ चीजें जरूर जान लें, खासतौर पर ब्रोकरेज और डेटा क्या कह रहा है?
दांव लगाएं या नहीं
Shadowfax Technologies का IPO खुलते ही निवेशकों की नजर GMP पर थी, लेकिन सब्सक्रिप्शन के सुस्त ट्रेंड ने कहानी पलट दी है। अब इसके वैल्यूएशन और कमाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं और ब्रोकरेज क्या कह रहे हैं यह जानने में दिलचस्पी दिखाई जा रही है। जाहिर तौर पर कमाई के मुकाबले शेयर “महंगा” दिख रहा है, GMP ठंडा पड़ चुका है और ब्रोकरेज भी खुलकर “Apply” नहीं बोल रहे। ऐसे में सवाल यही है क्या यह IPO मौका है या वैल्यूएशन का जाल?
कितना महंगा है वैल्यूएशन?
SBI Securities IPO note के मुताबिक FY25 के आधार पर Shadowfax का P/E 1,115.6x बैठता है। यह नंबर इसलिए डराता है, क्योंकि FY25 में कंपनी का नेट प्रॉफिट सिर्फ ₹6 करोड़ रहा है और नेट प्रॉफिट मार्जिन करीब 0.3% के आसपास है। यानी नेटवर्क और स्केल बड़ा है, लेकिन कमाई इतनी कम है कि IPO की प्राइसिंग कमाई के मुकाबले बेहद ज्यादा प्रीमियम पर दिखती है।
पीयर्स की तुलना में कितना महंगा?
अगर Shadowfax को पीयर्स यानी इसके जैसी कंपनियों के साथ रखकर देखें, तो वैल्यूएशन का फर्क और साफ हो जाता है। Shadowfax का प्री-लिस्टिंग P/E 1,115.6x है, जबकि Delhivery 213x और Blue Dart 54.1x पर हैं। EV/EBITDA के मोर्चे पर Shadowfax 106.5x पर है, जबकि Delhivery 79.1x और Blue Dart 14.7x पर है। हालांकि, DRHP में बताया गया है कि पोस्ट-लिस्टिंग PE170x हो जाएगा।
ग्रोथ से ज्यादा उम्मीद पर दांव
मोट तौर पर आंकड़े बताते हैं कि IPO में पैसा लगाने वाला निवेशक सिर्फ ग्रोथ नहीं, बल्कि इस उम्मीद पर दांव लगा रहा है कि कंपनी आने वाले समय में तेजी से मार्जिन सुधार करके प्रॉफिटेबिलिटी को स्केल करेगी। लेकिन, जो निवेशक आईपीओ में सिर्फ लिस्टिंग गेन के लिए दांव लगाते हैं, उन्हें इससे शायर निराशा मिले, क्योंकि पहले दिन के सब्सक्रिप्शन और जीएमपी के डाटा से निवेशकों की बेरुखी साफ दिख रही है।
GMP का दम निकला
निवेशक किसी भी IPO के GMP को लेकर खासे उत्साहित रहते हैं, क्योंकि इससे उन्हें अंदाजा मिलता है कि लिस्टिंग गेन कितना मिल सकता है। लेकिन, Shadowfax IPO GMP सिर्फ ₹4 रह गया है। अपर प्राइस बैंड ₹124 के हिसाब से अनुमानित लिस्टिंग प्राइस करीब ₹128 बैठती है, यानी संभावित लिस्टिंग गेन सिर्फ 3% के आसपास है।
कैसा रहा पहले दिन का सब्सक्रिप्शन?
पब्लिक सब्सक्रिपशन के पहले दिन IPO कुल 0.50x यानी करीब 50 फीसदी सब्सक्राइब हुआ। रिटेल कैटेगरी में सब्सक्रिप्शन 1.20x रहा, जबकि QIB 0.40x और NII 0.23x पर रहा। यह संकेत देता है कि शुरुआती उत्साह रिटेल में है, लेकिन असली “कन्विक्शन मनी” यानी QIB का बड़ा हिस्सा अभी भी पूरी तरह नहीं आया है।
क्या है ब्रोकरेज की राय?
Shadowfax IPO पर 12 ब्रोकरेज और एनालिस्ट ने रिव्यू किया है। इनमें से 33% यानी 4 ने 'Apply' रेटिंग दी है। वहीं, 5 यानी 42% ने 'Neutral' रेटिंग दी है। इस तरह ब्रोकरेज और एनालिस्ट की तरफ से “हाई कन्विक्शन अप्लाई” वाला पुश देखने को नहीं मिल रहा है। यहां , एक हिचक साफ दिख रही है।
| ब्रोकरेज/एनालिस्ट | रेटिंग |
|---|---|
| Arihant Capital Markets Ltd | Neutral |
| Bajaj Financial Securities Ltd | Not Rated |
| BP Equities (BP Wealth) | Apply |
| Capital Market | Neutral |
| Cholamandalam Securities Ltd | Apply |
| Dilip Davda | Not Rated |
| SBICAP Securities Ltd | Neutral |
| SMC Global | Neutral |
| SMIFS Limited | Apply |
| Sushil Finance Ltd | May Apply |
| Swastika Investmart Ltd | Neutral |
| Ventura Securities Ltd | Apply |
कहां फंसा है गेम?
ब्रोकरेज एक लाइन में हां बोलने से हिचक रहे हैं। क्योंकि, Shadowfax के लिए असली चुनौती ऑर्डर ग्रोथ नहीं है है। ये ग्रोथ तो सेक्टर की हवा के साथ चल सकती है। असली सवाल यह है कि क्या कंपनी मार्जिन बढ़ा पाएगी? क्योंकि, FY25 में Shadowfax का EBITDA मार्जिन 2.3% रहा है। इसकी तुलना Blue Dart से करें, तो उसका EBITDA मार्जिन 15.3% और Delhivery का 4.2% है। मतलब साफ है कि अगर मार्जिन में टिकाऊ सुधार नहीं हुआ, तो ऊंचे वैल्यूएशन पर लिस्ट होने के बाद स्टॉक में डी-रेटिंग का रिस्क बना रहेगा।
निवेशक क्या करें?
तमाम ब्रोकरेज के रिव्यू का लब्बोलुआब यही है कि Shadowfax IPO उन निवेशकों के लिए नहीं है जो “सेफ” और “पक्का” लिस्टिंग गेन चाहते हैं। अगर आप हाई रिस्क लेकर ग्रोथ थीम खेलना चाहते हैं, तो यह IPO आपकी वॉचलिस्ट में रह सकता है, लेकिन उम्मीदें संतुलित रखें। वहीं, अगर आप कंजर्वेटिव निवेशक हैं, तो सबसे बेहतर रणनीति यह है कि लिस्टिंग के बाद स्टॉक का व्यवहार देखें और फिर फैसला करें, क्योंकि इस IPO का असली टेस्ट लिस्टिंग के बाद शुरू होगा।
डिस्क्लेमर: TimesNow Hindi किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।
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