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देश की दूसरी सबसे बड़ी रिफाइनरी 35 दिन के लिए होने जा रही है शटडाउन, 6000 पेट्रोल पंपों पर कैसे पहुंचेगा तेल?

देश की रिफाइनिंग क्षमता पर इस शटडाउन का सीधा असर पड़ने वाला है। नायरा एनर्जी की वाडिनार रिफाइनरी सालाना 2 करोड़ टन कच्चा तेल साफ करने की क्षमता रखती है, जो भारत की रिफाइनिंग कैपेसिटी का 8% हिस्सा है।

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Oil Refinery SHutdown

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के बीच, भारत सरकार ने रसोई गैस (LPG) की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ी पहल की है। दरअसल, नायरा एनर्जी (Nayara Energy) की वाडिनार रिफाइनरी 9 अप्रैल से सालाना मेंटेनेंस (मरम्मत) के लिए बंद होने जा रही है। इस शटडाउन (Oil Refinery Shutdown) के कारण देश में एलपीजी की उपलब्धता कम होने का खतरा पैदा हो गया है, जिसे देखते हुए केंद्र सरकार अब एलपीजी का अपना रणनीतिक भंडार (Strategic Reserves) बनाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। सरकार का यह कदम भविष्य में किसी भी संभावित आपूर्ति संकट से निपटने के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह होगा।

क्या है पूरा मामला और रिफाइनरी शटडाउन का असर?

आम तौर पर, भारतीय रिफाइनरियां अपनी मशीनों की कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए समय-समय पर मरम्मत का काम करती हैं, जिसके लिए उन्हें कुछ समय के लिए परिचालन रोकना पड़ता है। इंडियन ऑयल (IOC) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) जैसी सरकारी कंपनियों ने देश में ईंधन की बढ़ती मांग को देखते हुए अपने शटडाउन को टाल दिया है, लेकिन नायरा एनर्जी का शटडाउन तय कार्यक्रम के अनुसार 9 अप्रैल से शुरू हो रहा है। चूंकि नायरा एनर्जी भारत की प्रमुख रिफाइनरियों में से एक है, इसलिए इसके बंद होने से बाजार में एलपीजी की आपूर्ति में अस्थायी कमी आ सकती है, जिसका असर आम उपभोक्ताओं की रसोई तक पहुंच सकता है।

देश की रिफाइनिंग क्षमता पर इस शटडाउन का सीधा और बड़ा असर पड़ने वाला है। नायरा एनर्जी की वाडिनार रिफाइनरी सालाना 2 करोड़ टन कच्चा तेल साफ करने की क्षमता रखती है, जो भारत की कुल रिफाइनिंग कैपेसिटी का लगभग 8% हिस्सा है। 35 दिनों तक उत्पादन पूरी तरह बंद रहने का मतलब है कि बाजार में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई में भारी कमी आ सकती है। चूंकि नायरा एनर्जी देश के 6,300 से अधिक पेट्रोल पंपों को ईंधन की आपूर्ति करती है, इसलिए आने वाले समय में इन पंपों पर तेल की किल्लत बढ़ सकती है। रिफाइनरी का यह मेंटेनेंस शटडाउन 8-10 अप्रैल को शुरू होकर अप्रैल तक जारी रहने की उम्मीद है।

सरकार की 'एलपीजी रिजर्व' बनाने की स्ट्रैटेजी

इस संभावित संकट को भांपते हुए, सरकार ने अब एलपीजी का अपना बड़ा स्टॉक रखने का फैसला किया है। अभी तक भारत के पास कच्चे तेल (Crude Oil) के बड़े रणनीतिक भंडार हैं, लेकिन एलपीजी के लिए अब तक कोई औपचारिक रिजर्व सिस्टम नहीं था। नई योजना के तहत, सरकार चाहती है कि रिफाइनरियों के शटडाउन या अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में आने वाली किसी भी रुकावट के दौरान जनता को गैस की कमी का सामना न करना पड़े। यह रिजर्व बफर स्टॉक के रूप में काम करेगा, जिसे आपातकालीन स्थितियों में तुरंत बाजार में उतारा जा सकेगा।

Oil Refinery

Oil Refinery

आम जनता पर क्या होगा असर?

सरकार की यह कवायद यह सुनिश्चित करने के लिए है कि रिफाइनरी के बंद होने से एलपीजी की कीमतों में कोई असामान्य उछाल न आए और गैस सिलेंडरों की किल्लत न हो। हालांकि, उपभोक्ता स्तर पर घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सरकार ने पहले ही ईंधन की आपूर्ति को लेकर सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वे स्थिति पर पूरी नजर रखे हुए हैं और वैकल्पिक स्रोतों के जरिए गैस की उपलब्धता बनी रहेगी। नायरा एनर्जी का शटडाउन कितने समय तक चलता है, यह आने वाले दिनों में गैस की कीमतों और उसकी उपलब्धता पर असर डाल सकता है।

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Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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