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सोशल मीडिया पर फाइनेंशियल सलाह देने वालों पर सख्त होगा SEBI, अब हर पोस्ट में देनी होगी बड़ी जानकारी

Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। इसके मुताबिक, SEBI से पंजीकृत सभी संस्थाओं और उनके एजेंट जैसे म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर, पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस (PMS) डिस्ट्रीब्यूटर आदि को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के होम पेज पर अपना रजिस्टर्ड नाम और रजिस्ट्रेशन नंबर साफ-साफ दिखाना होगा।

SEBi

आज के समय में वित्तीय सलाह यानी फाइनेंशियल एडवाइस सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैल रही है। यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म पर रोज लाखों लोग निवेश से जुड़े वीडियो और सुझाव देखते हैं। लेकिन इनमें से कई कंटेंट ऐसे होते हैं, जिन्हें देने वाले लोग पंजीकृत (Registered) नहीं होते, और ऐसे में निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसी स्थिति को रोकने के लिए SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) ने एक बड़ा कदम उठाया है।

SEBI ने प्रस्ताव दिया है कि उसके अधीन आने वाली सभी संस्थाएं जैसे म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर, पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस (PMS) डिस्ट्रीब्यूटर और अन्य अधिकृत एजेंट अपना पूरा पंजीकृत नाम और रजिस्ट्रेशन नंबर अपने सोशल मीडिया के होम पेज पर साफ-साफ दिखाएं। इतना ही नहीं, वे हर एक वीडियो, पोस्ट या वित्तीय कंटेंट में भी यह जानकारी देना अनिवार्य होगा।

SEBI क्यों कर रहा है यह बदलाव?

पिछले कुछ समय में सोशल मीडिया पर फाइनेंशियल कंटेंट की बाढ़ आ गई है। हर दूसरा व्यक्ति निवेश के नाम पर वीडियो बना रहा है। कई बार लोग गुमराह करने वाली सलाह, गलत दावे, झूठे मुनाफे के वादे और अति-जोखिम वाले उत्पादों को सुरक्षित बताकर बेचने की कोशिश करते हैं। लोग बिना जांचे-परखे ऐसे सुझावों पर भरोसा कर लेते हैं और बाद में भारी नुकसान झेलते हैं।

SEBI का मानना है कि जब कोई अधिकृत संस्था या उसके एजेंट सोशल मीडिया पर वित्तीय सलाह दें, तो लोगों को यह पता होना चाहिए कि कंटेंट किसी भरोसेमंद स्रोत से आया है। पंजीकरण नंबर और नाम दिखाने से निवेशक आसानी से पहचान सकेंगे कि सलाह असली विशेषज्ञ की है या किसी "फाइनेंस इन्फ्लुएंसर" की।

कौन-कौन से नियम किए जाएंगे सख्त?

SEBI ने अपने परामर्श पत्र (Consultation Paper) में कई शर्तें स्पष्ट की हैं:

1. कोई भी पक्का रिटर्न या निश्चित मुनाफे का वादा नहीं किया जा सकता।

2. जो बातें कानूनन प्रतिबंधित हैं, उन पर कंटेंट बनाना मना होगा।

3. निवेशकों की जानकारी की कमी का फायदा उठाने वाले बयान पूरी तरह निषिद्ध होंगे।

4. कंटेंट झूठा, भ्रामक, पक्षपातपूर्ण या गुमराह करने वाला नहीं होना चाहिए।

5. किसी भी उत्पाद के रिस्क और रिटर्न को गलत तरीके से बढ़ा-चढ़ाकर नहीं दिखाया जा सकता।

6. पिछले प्रदर्शन (Past Performance) का प्रचार तभी किया जा सकता है जब SEBI इसकी स्पष्ट अनुमति दे।

इसके अलावा, SEBI के लोगो, उसके अधिकारियों या दफ्तरों के नाम का गलत उपयोग करने पर भी रोक लगेगी। कोई भी व्यक्ति SEBI की मंजूरी के बिना परफॉर्मेंस या गारंटीड रिटर्न के दावे नहीं कर सकेगा।

SEBI की नज़र में सोशल मीडिया क्यों बड़ी चुनौती बना?

SEBI चेयरमैन तुहिन कांता पांडे के अनुसार, पिछले 18 महीनों में सेबी ने सोशल मीडिया पर 1 लाख से ज्यादा भ्रामक या गैर-कानूनी फाइनेंशियल कंटेंट को चिन्हित (Flag) किया है। इनमें कई पोस्ट ऐसे थे जो मेटा, गूगल, टेलीग्राम और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म पर तेजी से फैल रहे थे। उन्होंने कहा कि रजिस्टर्ड संस्थाओं को “अनरेगुलेटेड एडवाइजर्स” यानी ऐसे लोगों से दूरी बनानी होगी जिनके पास लाइसेंस नहीं है लेकिन फिर भी वे निवेश सलाह दे रहे हैं। इससे न सिर्फ गलत दावों पर रोक लगेगी, बल्कि निवेशकों की सुरक्षा भी बढ़ेगी।

निवेशकों को क्या फायदा होगा?

SEBI के इन नए नियमों का सीधा फायदा निवेशकों को मिलेगा, उन्हें यह पता चलेगा कि सलाह असली विशेषज्ञ दे रहा है या कोई फेक इन्फ्लुएंसर। पारदर्शिता बढ़ेगी और धोखाधड़ी वाले कंटेंट में कमी आएगी। जोखिम को छिपाकर बेचने वाले लोग अब आसानी से पकड़ में आ सकेंगे। फाइनेंशियल निर्णय अधिक सुरक्षित और समझदारी से लिए जा सकेंगे।

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रिचा त्रिपाठी
रिचा त्रिपाठी Author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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