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नहीं लगाने होंगे कोर्ट के चक्कर! आपको आसानी से मिलेंगे दादाजी के शेयर, SEBI ने बदले नियम

अगर आपके दादाजी या कोई और पूर्वज शेयर छोड़ गए हैं, तो अब उन शेयरों को भुनाने के लिए आपको अदालतों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। सेबी ने इससे जुड़े नियमों को आसान कर दिया है।

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सेबी ने असान किए नियम

SEBI Quick Transmission Processing : अगर आपके दादाजी, पिता, माता या परिवार के किसी सदस्य ने वर्षों पहले शेयर खरीदे थे और अब उनके निधन के बाद वे अब भी उनके नाम पर ही हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। अब उन शेयरों को अपने नाम या डीमैट अकाउंट में ट्रांसफर कराने के लिए पहले जैसी लंबी कानूनी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने शेयर ट्रांसमिशन (Transmission) के नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए प्रक्रिया को आसान, तेज और कम खर्चीला बना दिया है।

आखिर क्या होता है शेयर ट्रांसफर?

जब किसी निवेशक की मृत्यु हो जाती है, तब उसके शेयर, म्यूचुअल फंड यूनिट या अन्य सिक्योरिटीज को उसके कानूनी वारिस या नॉमिनी के नाम ट्रांसफर किया जाता है। इसे ट्रांसमिशन कहा जाता है। यह सामान्य ट्रांसफर से अलग प्रक्रिया होती है, क्योंकि इसमें खरीद-बिक्री नहीं होती, बल्कि मालिकाना हक वारिस को मिलता है। अब तक इस प्रक्रिया में कई परिवारों को महीनों तक दस्तावेज जुटाने, वकीलों की मदद लेने और कई मामलों में कोर्ट से दस्तावेज हासिल करने पड़ते थे। SEBI के नए फैसले के बाद यह प्रक्रिया काफी आसान हो जाएगी।

क्या बदले हैं SEBI के नियम?

SEBI ने शेयर ट्रांसमिशन (Transmission) की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कई बड़े बदलाव किए हैं। अब सरल दस्तावेजों के आधार पर डीमैट होल्डिंग्स के ट्रांसफर की सीमा ₹15 लाख से बढ़ाकर ₹30 लाख और फिजिकल शेयरों की सीमा ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख कर दी गई है। छोटे क्लेम के लिए Quick Transmission Processing (QTP) शुरू की गई है, जिससे कम दस्तावेजों में तेजी से ट्रांसफर हो सकेगा। इसके अलावा पात्र मामलों में प्रोबेट (Probate) और कुछ मामलों में PAN जमा करने की अनिवार्यता भी हटा दी गई है, जिससे कानूनी वारिसों और नॉमिनी के लिए शेयर अपने नाम कराना पहले की तुलना में कहीं आसान और तेज हो जाएगा। इसके अलावा लिस्टेड कंपनियां चाहें तो फिजिकल शेयरों के लिए ₹10 लाख से अधिक की सीमा भी तय कर सकती हैं।

अब नहीं लगाने होंगे कोर्ट के चक्कर

सबसे बड़ा बदलाव यह है कि कई पात्र मामलों में प्रोबेट (Probate) की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। असल में प्रोबेट वह कानूनी दस्तावेज होता है, जिसे कोर्ट किसी वसीयत की पुष्टि के बाद जारी करती है। इसे हासिल करने में अक्सर महीनों लग जाते थे और परिवारों को वकीलों पर अच्छा-खासा खर्च भी करना पड़ता था। SEBI के नए फ्रेमवर्क के बाद सरल मामलों में यह शर्त हटा दी गई है। इसके साथ ही कुछ पात्र मामलों में PAN कार्ड जमा करने की अनिवार्यता से भी छूट दी गई है।

छोटे क्लेम के लिए फास्ट ट्रैक व्यवस्था

SEBI ने पहली बार QTP शुरू करने का फैसला किया है। इसके तहत ₹10,000 तक के फिजिकल शेयरों के क्लेम और ₹30,000 तक की डीमैट होल्डिंग्स को बेहद कम दस्तावेजों के आधार पर तेजी से ट्रांसफर किया जाएगा।

कैसे अपने नाम कराएं शेयर?

यदि आपके परिवार में किसी दिवंगत सदस्य के नाम शेयर हैं, तो सबसे पहले यह पता करें कि वे फिजिकल शेयर हैं या डीमैट अकाउंट में रखे गए हैं। इसके बाद संबंधित डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट (DP), ब्रोकर या कंपनी के रजिस्ट्रार एवं ट्रांसफर एजेंट (RTA) से संपर्क करें। यदि नॉमिनी दर्ज है तो प्रक्रिया और आसान होगी। यदि नॉमिनी नहीं है, तब कानूनी वारिस आवश्यक दस्तावेजों के साथ ट्रांसमिशन का दावा कर सकते हैं।

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    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानिया author

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों... और देखें

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