बिजनेस

SEBI ने निगरानी में चूक के लिए शेयर बाजारों पर जुर्माने की गाइडलाइन्स की जारी, नया प्रारूप 1 जुलाई से लागू

SEBI: शेयर बाजार नियामक सेबी ने खुदरा निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए असामान्य या संदिग्ध कारोबारी गतिविधियों का पता लगाने में चूक के लिए शेयर बाजारों और अन्य बाजार अवसंरचना संस्थानों (MII) पर लगाने वाले जुर्माने से संबंधित एक रूपरेखा जारी की।

Image

शेयर बाजार को लेकर सेबी की नई रूपरेखा

Photo : BCCL

SEBI: शेयर बाजार नियामक सेबी ने खुदरा निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए असामान्य या संदिग्ध कारोबारी गतिविधियों का पता लगाने में चूक के लिए शेयर बाजारों और अन्य बाजार अवसंरचना संस्थानों (MII) पर लगाने वाले जुर्माने से संबंधित एक रूपरेखा गुरुवार को जारी की। निगरानी से संबंधित चूक पर वित्तीय जुर्माने की राशि पिछले वित्त वर्ष में किसी एमआईआई, शेयर बाजार, समाशोधन निगम और डिपॉजिटरी के कुल वार्षिक राजस्व और वित्त वर्ष में ऐसी चूक के मामलों की संख्या के आधार पर निर्धारित की जाएगी। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक परिपत्र में कहा कि नया प्रारूप एक जुलाई, 2024 से लागू होगा।

हेराफेरी या गड़बड़ी पर सेबी की नजर

सेबी ने कहा कि एमआईआई द्वारा निगरानी का सामान्य उद्देश्य बाजार की सत्यनिष्ठा को प्रभावित करने वाली हेराफेरी या गड़बड़ी वाले कारोबार का पता लगाने और उसे रोकने के लिए बाजार की निगरानी करना और नियामक की प्रवर्तन कार्रवाइयों का समर्थन करने वाली जानकारी प्रदान करना है। एमआईआई को बाजार में दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों की निगरानी करना, असामान्य या संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी देना और अलर्ट तैयार करके और उनका प्रसंस्करण करके बाजार मध्यस्थों के आचरण की निगरानी करना, व्यापार के औचित्य की तलाश करना और त्वरित विश्लेषण करना होता है। निगरानी संबंधी चूक के तहत निगरानी में आई कोई चूक, निगरानी संबंधी गतिविधि की कोई अपर्याप्त जानकारी और निर्धारित समय में निगरानी उपायों को लागू करने में नाकामी के साथ उन्हें लागू करने में कोई देरी या केवल आंशिक रूप से लागू करना शामिल है।

इस प्रकार होगी जुर्माने की राशि

वित्तीय जुर्माने की राशि के संबंध में सेबी ने कहा कि यदि किसी एमआईआई का कुल वार्षिक राजस्व 1,000 करोड़ रुपये से कम है, तो निगरानी संबंधी चूक के पहले मामले में 25 लाख रुपये, दूसरे मामले में 50 लाख रुपये और तीसरे मामले से एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, किसी एमआईआई का कुल वार्षिक राजस्व 1,000 करोड़ रुपये से कम और 300 करोड़ रुपये तक होने पर चूक के पहले, दूसरे और तीसरे मामले में क्रमशः पांच लाख रुपये, 10 रुपये और 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इसी तरह, यदि राजस्व 300 करोड़ रुपये से कम है, तो निगरानी संबंधी चूक के पहले, दूसरे और तीसरे मामले में क्रमशः एक लाख रुपये, दो लाख रुपये और चार लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

इन मामलों में नहीं होगा जुर्माना

नियामक ने कहा कि निगरानी संबंधी चूक के लिए जुर्माने का ढांचा उन मामलों में लागू नहीं होगा, जहां इसका व्यापक बाजार प्रभाव पड़ता है या बड़ी संख्या में निवेशकों को नुकसान होता है या बाजार की अखंडता प्रभावित होती है। इसके अलावा यह दिशानिर्देश उन मामलों के लिए लागू नहीं होंगे जो प्रक्रियात्मक प्रकृति के हैं। एमआईआई में निगरानी संबंधी चूक की पहचान के बाद बाजार नियामक उस एमआईआई को अपनी दलीलें पेश करने का अवसर देगा। कोई भी जुर्माना लगाने से पहले नियामक इन दलीलों पर विचार करेगा। जुर्माना लगाए जाने पर संबंधित एमआईआई को 15 कार्य दिवसों के भीतर सेबी के निवेशक संरक्षण और शिक्षा कोष में राशि जमा करनी होगी। इसके साथ ही सेबी ने एमआईआई को अपनी वेबसाइट और अपनी वार्षिक रिपोर्ट में इस जुर्माने से संबंधित डिटेल भी देना होगा।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

और पढ़ें
End of Article