SBI Trustee Company ने Sky Gold and Diamonds की तरफ से सिक्योरिटी के तौर पर रखे गए HDFC Bank और ICICI Bank के गिरवी शेयर रिलीज कर दिए हैं। कंपनी ने एक एक्सचेंज फाइलिंग में इसकी जानकारी देते हुए बताया है कि 27 मार्च, 2026 के इस अपडेट के बाद कंपनी की तरफ से दोनों बैंकों के गिरवी रखे शेयर शून्य हो गए हैं।
SBI Trustee Company Ltd की तरफ से HDFC Bank और ICICI Bank के प्लेज्ड शेयर रिलीज होना बताता है कि Sky Gold and Diamonds की देनदारियां पूरी हो चुकी हैं या जोखिम घट गया है, इसलिए अब सिक्योरिटी की जरूरत नहीं रही। यह मुख्य रूप से Sky Gold के लिए पॉजिटिव संकेत है कि उसकी वित्तीय स्थिति सुधरी है, जबकि लेंडर्स के लिए यह रिस्क कम होने का इशारा है; हालांकि बैंकों के निवेशकों पर इसका असर सीमित माना जाता है क्योंकि हिस्सेदारी बहुत छोटी थी।
क्या हुआ है पूरा मामला
Sky Gold and Diamonds ने SBI Trustee Company के पास HDFC Bank और ICICI Bank के शेयर सिक्योरिटी के तौर पर जमा कराए थे। लेकिन, अब कंपनी ने अपनी देनदारी को निपटा लिया है, जिसके बाद सिक्योरिटी के तौर पर प्लेज किए गए शेयरों को रिलीज कर दिया गया है।
कितने शेयर अनप्लेज हुए
HDFC Bank के मामले में SBI Trustee के पास पहले 2,52,356 शेयर गिरवी थे, जो बैंक की कुल इक्विटी का लगभग 0.0016% थे। अब ये पूरी हिस्सेदारी रिलीज हो चुकी है और गिरवी रखे शेयर शून्य हो गए हैं। दिसंबर 2025 के आंकड़ों के अनुसार बैंक की कुल इक्विटी 15,38,45,77,216 शेयर (₹1 फेस वैल्यू) थी। इसी तरह ICICI Bank में SBI Trustee के पास 2,12,101 शेयर गिरवी थे, जो कुल हिस्सेदारी का करीब 0.0030% थे। ये सभी शेयर भी रिलीज कर दिए गए हैं और अब यहां भी कोई pledged holding नहीं बची है। दिसंबर 2025 के अनुसार बैंक की कुल इक्विटी 7,15,06,72,709 शेयर (₹2 फेस वैल्यू) रही।
निवेशकों के लिए क्या मायने
यह पूरा घटनाक्रम संकेत देता है कि Sky Gold and Diamonds से जुड़ी फाइनेंशियल ऑब्लिगेशन पूरी हो चुकी है या सिक्योरिटी स्ट्रक्चर में बदलाव हुआ है। हालांकि ध्यान देने वाली बात यह है कि यह ट्रांजैक्शन बहुत छोटे प्रतिशत (0.0016% और 0.0030%) से जुड़ा था। इसका दोनों बैंक शेयरों के फंडामेंटल्स पर कोई खास असर नहीं है। यह एक टेक्निकल और कंप्लायंस अपडेट ज्यादा है, न कि बाजार को प्रभावित करने वाला बड़ा ट्रिगर।
क्या होता है शेयर प्लेज करना?
जब कोई कंपनी या प्रमोटर कर्ज लेता है, तो वह अपने या अपनी होल्डिंग में रखे किसी कंपनी के शेयर गिरवी रख सकता है। कर्ज चुकाने पर शेयर वापस मिल जाते हैं, वहीं डिफॉल्ट की स्थिति में लेंडर इन्हें बेच सकता है। इस मामले में, शेयर रिलीज होना इस बात का संकेत है कि संबंधित दायित्व अब पूरा हो चुका है या सिक्योरिटी की जरूरत खत्म हो गई है।
डिस्क्लेमर: TimesNow Hindi किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।
