Rupee vs Dollar: ग्लोबल करेंसी मार्केट में डॉलर की ताकत बढ़ती दिख रही है। शुक्रवार को डॉलर इंडेक्स बढ़कर 100.26 के स्तर पर पहुंच गया, जो दिन के दौरान 0.52 फीसदी की तेजी दर्शाता है। दिन में इसका हाई 100.26 और लो 99.59 रहा, जबकि बाजार 99.67 पर खुला था। डॉलर इंडेक्स में यह मजबूती बताती है कि निवेशक अभी भी सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की ओर झुक रहे हैं।
वहीं, शुक्रवार को रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। यह गुरुवार के 92.19 के बंद स्तर से कमजोर खुला और 92.35 पर ट्रेडिंग शुरू हुई। इससे पहले 9 मार्च, 2026 को रुपया 92.37 के स्तर तक गिरा था, जो उस समय का रिकॉर्ड लो था। शुक्रवार को दोपहर बाद USD/INR 92.4450 पर ट्रेड करता दिखा, जो पिछले बंद 92.20 से करीब 0.27 फीसदी कमजोर है। दिन के दौरान रुपया 92.4850 के निचले स्तर तक फिसला, जबकि दिन का हाई 92.3050 रहा। बाजार 92.34 के स्तर पर खुला था, लेकिन पूरे सत्र में दबाव बना रहा।
डॉलर इंडेक्स में मजबूती
रुपये पर दबाव का बड़ा कारण डॉलर की मजबूती है। डॉलर इंडेक्स बढ़कर 92.85 के तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। जब डॉलर मजबूत होता है तो उभरते बाजारों की मुद्राएं कमजोर होती हैं और विदेशी पूंजी का प्रवाह भी प्रभावित होता है। कमजोर इक्विटी बाजार भी रुपये की गिरावट में योगदान दे रहे हैं, क्योंकि बाजार से विदेशी निवेशकों की निकासी मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव डालती है।
$100 के ऊपर क्रूड से बढ़ी चिंता
वैश्विक तेल कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड करीब $100 प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है, जबकि WTI लगभग $95 प्रति बैरल पर बना हुआ है। शुक्रवार को ब्रेंट करीब $100.43 और WTI करीब $95.4 पर कारोबार करता दिखा। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है, इसलिए क्रूड की कीमतों में तेजी सीधे तौर पर चालू खाता घाटे और रुपये पर दबाव बढ़ाती है।
होर्मुज संकट बढ़ा
ग्लोबल एनर्जी मार्केट में तनाव का मुख्य कारण फारस की खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता तनाव है। तेल टैंकरों पर हमले और ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की चेतावनी ने बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल शिपिंग मार्गों में से एक है, जहां से रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता है। अगर यह मार्ग बाधित होता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।
$150 तक जा सकता है क्रूड
ब्रोकरेज फर्म नुवामा के मुताबिक अगर होर्मुज में सप्लाई बाधित होती है तो अगले 4 से 8 हफ्तों में ब्रेंट क्रूड $110 से $150 प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। इससे एशिया के ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे रिफाइनिंग मार्जिन बढ़ सकते हैं, लेकिन एलपीजी और एलएनजी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है। भारत ने अभी तक अलग-अलग देशों से तेल और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित कर स्थिति को संभाला हुआ है, हालांकि एलएनजी की सीमित कमी की खबरें सामने आई हैं।
RBI की भूमिका पर नजर
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के हेड ऑफ ट्रेजरी अनिल कुमार भंसाली के मुताबिक अगर आरबीआई की सक्रियता नहीं होती तो रुपया जल्द ही 93 के स्तर तक पहुंच सकता था। फिलहाल केंद्रीय बैंक की मौजूदगी बाजार में अस्थिरता को सीमित रखने में मदद कर रही है। हालांकि अगर डॉलर मजबूत और क्रूड महंगा बना रहता है तो आने वाले दिनों में रुपये पर दबाव जारी रह सकता है।
