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डॉलर के मुकाबले रुपया ऑल-टाइम लो पर, 91.95 तक टूटा; रिकवरी की कोशिशें नाकाम, क्या है वजह?

Rupee vs USD ट्रेड में शुक्रवार को रुपया इंट्रा डे ट्रेड में ऑल टाइम लो पर फिसल गया। स्पॉट मार्केट में जहां रुपया डॉलर के मुकाबले पहली बार 91.95 तक फिसल गया। वहीं, दूसरी तरफ फ्यूचर मार्केट में भी डॉलर के मुकाबले रुपये में बड़ी गिरावट को देखने को मिली और जनवरी में खत्म होने वाले कॉन्ट्रैक्ट्स 92 रुपये तक फिसल गए हैं।

Dollar vs rupee

रुपया धड़ाम

Photo : TN Innovations

डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया शुक्रवार (23 जनवरी) को नया रिकॉर्ड लो बनाते हुए 91.93 तक फिसल गया। दिन की शुरुआत में रुपये ने हल्की मजबूती दिखाई, लेकिन यह तेजी टिक नहीं पाई और मजबूत डॉलर डिमांड के दबाव में करंसी फिर कमजोर हो गई। इससे पहले रुपया 91.74 के पुराने रिकॉर्ड लो तक गया था, जिसे अब पार कर दिया गया है।

क्यों आ रही गिरावट?

कुल मिलाकर रुपये का 91.95 पर रिकॉर्ड लो यह संकेत देता है कि घरेलू स्तर पर डॉलर की मांग और विदेशी निवेशकों की निकासी फिलहाल सबसे बड़ा दबाव है। ग्लोबल संकेतों से थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन बाजार में स्थायी रिकवरी के लिए जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता कम होना और India–US ट्रेड डील पर स्पष्टता आना जरूरी होगा।

Dollar vs rupee

Image Credit Bloomberg

मजबूत डॉलर डिमांड ने पलटा रुख

फॉरेक्स ट्रेडर्स के मुताबिक, रुपये पर सबसे बड़ा दबाव घरेलू बाजार में डॉलर की लगातार मांग से आया। खासतौर पर कॉरपोरेट्स और इंपोर्टर्स की ओर से डॉलर खरीदारी बनी रही, जिससे शुरुआती बढ़त जल्दी खत्म हो गई। बाजार में जैसे ही डॉलर की डिमांड बढ़ी, रुपया इंट्रा-डे में फिर नीचे फिसलता चला गया और अंततः 91.93 के स्तर पर पहुंच गया।

सेंटीमेंट में सुधरा लेकिन राहत सीमित

ग्लोबल संकेतों में थोड़ी राहत के बावजूद रुपये की कमजोरी बनी रही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यूरोप के खिलाफ टैरिफ धमकियों पर नरमी दिखाने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जोखिम भावना में हल्का सुधार हुआ। इससे डॉलर में कुछ करेक्शन देखने को मिला और इमर्जिंग मार्केट करंसीज को सीमित सपोर्ट मिला। हालांकि घरेलू स्तर पर डॉलर की मांग ज्यादा मजबूत रहने के कारण रुपये को इसका बड़ा फायदा नहीं मिल सका।

विदेशी निवेशकों की निकासी ने बढ़ाया दबाव

मार्केट पार्टिसिपेंट्स का कहना है कि रुपये पर दबाव की एक बड़ी वजह विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार निकासी भी है। जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालते हैं, तो डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव बनता है। इसके साथ ही वैश्विक जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, जिससे निवेशक अब भी डॉलर को सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं।

India–US ट्रेड डील से रुपये को मिल सकता है सहारा

फॉरेक्स डीलर्स के मुताबिक, आने वाले दिनों में India–US trade agreement रुपये के लिए एक अहम स्थिरता कारक बन सकता है। बाजार की नजरें इस डील की प्रगति पर हैं, क्योंकि इससे निवेशकों का भरोसा बेहतर हो सकता है और रुपये पर दबाव कुछ कम हो सकता है। ट्रेडर्स का कहना है कि जब तक जियोपॉलिटिकल जोखिम कम नहीं होते और ट्रेड डील को लेकर तस्वीर साफ नहीं होती, तब तक रुपया बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशील बना रहेगा।

92.00 पर रेजिस्टेंस, RBI सपोर्ट से रिकवरी की उम्मीद

CR Forex Advisors के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित पाबरी के मुताबिक मौजूदा स्तरों पर वैश्विक जोखिम काफी हद तक रुपये में प्राइस इन हो चुका है। ऐसे में अगर रिस्क सेंटीमेंट स्थिर रहता है तो बाजार में कंसोलिडेशन और आंशिक रिकवरी की संभावना बन सकती है। उनका कहना है कि 92.00 का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस है, जबकि RBI का सपोर्ट जारी रहने पर डॉलर-रुपया 90.50 से 90.70 के दायरे की तरफ लौट सकता है।

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यतींद्र लवानिया
यतींद्र लवानिया author

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों... और देखें

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