Retail Inflation: खुदरा महंगाई दर में इजाफा, सब्जियां, अंडे, मांस-मछली, मसाले हुए महंगे
- Authored by: रामानुज सिंह
- Updated Dec 12, 2025, 08:57 PM IST
Retail Inflation: देश में खुदरा महंगाई दर नवंबर में बढ़कर 0.71% हो गई, जबकि अक्टूबर में यह 0.25% थी। खाद्य वस्तुओं, खासकर सब्जियों, अंडे, मांस-मछली, मसालों और ईंधन की बढ़ी कीमतों ने महंगाई को ऊपर धकेला। इन बढ़ोतरी का सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है, क्योंकि रोजमर्रा की वस्तुएं महंगी महसूस होने लगती हैं।
खुदरा महंगाई दर बढ़ी (तस्वीर-ani)
Retail Inflation: देश में खुदरा महंगाई दर यानी रिटेल इंफ्लेशन नवंबर महीने में बढ़कर 0.71 प्रतिशत हो गई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में यह दर 0.25 प्रतिशत के रिकॉर्ड निचले स्तर पर थी। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी की वजह से नवंबर में खुदरा महंगाई दर में यह उछाल देखने को मिला। सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने बताया कि इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह सब्जियों, अंडे, मांस-मछली, मसालों और ईंधन की कीमतों में बढ़त रही। महंगाई बढ़ने का सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है क्योंकि इससे खरीद क्षमता कम हो जाती है और रोजमर्रा की चीजें महंगी महसूस होने लगती हैं।
लगातार 10वां महीना आरबीआई के लक्ष्य से नीचे
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित खुदरा महंगाई दर लगातार 10वें महीने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के तय 4 प्रतिशत लक्ष्य से नीचे रही। यह लगातार दूसरा महीना भी है जब महंगाई दर एक प्रतिशत से कम स्तर पर बनी रही। इससे यह संकेत मिलता है कि महंगाई फिलहाल नियंत्रण में है, हालांकि खाद्य कीमतों में उतार–चढ़ाव का असर अभी भी जारी है।
खाद्य महंगाई दर में धीमी गिरावट
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के आंकड़े बताते हैं कि नवंबर में खाद्य महंगाई दर में 3.91 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। हालांकि यह गिरावट अक्टूबर के मुकाबले कम थी, जब खाद्य महंगाई दर 5.02 प्रतिशत घटी थी। विशेषज्ञों का कहना है कि नवंबर में सब्जियों, अंडे, मांस-मछली, मसालों तथा अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी के कारण गिरावट की रफ्तार धीमी हो गई।
ईंधन और बिजली की कीमतों का भी प्रभाव
केवल खाद्य वस्तुएं ही नहीं, बल्कि ईंधन और बिजली की बढ़ती कीमतों का असर भी नवंबर की महंगाई के आंकड़ों पर दिखा। ईंधन और बिजली की महंगाई दर नवंबर में बढ़कर 2.32 प्रतिशत हो गई, जबकि अक्टूबर में यह 1.98 प्रतिशत थी। इससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा है, हालांकि कुल मिलाकर महंगाई अभी भी निचले स्तर पर बनी हुई है।
आगे महंगाई थोड़ी बढ़ सकती है: इक्रा
रेटिंग एजेंसी इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने अनुमान लगाया कि सब्जियों की कीमतों में हाल की बढ़ोतरी और पिछले साल की तुलना में आधार प्रभाव सामान्य होने से आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई दर 1.5 प्रतिशत से ऊपर जा सकती है। उन्होंने कहा कि महंगाई और विकास दर की स्थिति को देखते हुए, आने वाला केंद्रीय बजट और उसमें घोषित वित्तीय फैसले अगले महीनों में होने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक को दिशा देंगे। उनका मानना है कि फरवरी 2026 में एमपीसी नीतिगत ब्याज दर को स्थिर ही रखेगी।
अगले दो तिमाहियों में महंगाई नियंत्रण में रहेगी
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक उद्योग मंडल PHDCCI के महासचिव और मुख्य कार्यपालक अधिकारी रंजीत मेहता का कहना है कि आने वाले दो तिमाहियों में महंगाई दर नियंत्रण योग्य सीमा में बनी रह सकती है। इसके पीछे उन्होंने कई कारण बताए गए हैं। खाद्य कीमतों में स्थिरता, जीएसटी दरों का संतुलित होना, बिजली की उचित कीमतें, आरबीआई की रणनीतिक मौद्रिक नीतियां, इन सभी कारकों से महंगाई को काबू में रखने में मदद मिल सकती है।
रेपो दर में कटौती संभव, लेकिन ज्यादा नहीं: कोटक महिंद्रा बैंक
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक कोटक महिंद्रा बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री उपासना भारद्वाज ने कहा कि आने वाले समय में महंगाई में कुछ बढ़ोतरी देखी जा सकती है, लेकिन अगले वित्त वर्ष की पहली छमाही तक यह नियंत्रित रहेगी। उन्होंने बताया कि आरबीआई ने साफ संकेत दिया है कि वह आगे के कदम आंकड़ों के आधार पर उठाएगा। ऐसे में रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की एक और कटौती की संभावना बनी हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ब्याज दर में कटौती का दौर अब लगभग समाप्त होने वाला है, और इसके बाद लंबे समय तक दरें स्थिर रह सकती हैं।
आरबीआई ने इस साल 1.25% घटाई दरें
मुद्रास्फीति में कमी की वजह से आरबीआई इस साल रेपो दर में कुल 1.25 प्रतिशत अंक की कटौती कर चुका है। दिसंबर की मौद्रिक समीक्षा में केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति के अनुमान को 2.6 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया, जिससे यह संकेत मिलता है कि बैंक महंगाई को लेकर अभी भी आश्वस्त है।
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