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किराये की रफ्तार सुस्त, प्रॉपर्टी की कीमत में तेजी, निवेशकों के लिए क्या संकेत? Magicbricks की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

मैजिकब्रिक्स रेंटल इंडेक्स OND’25 बताता है कि भारत का रेंटल हाउसिंग बाजार अब एक ज्यादा संतुलित और समझदारी वाले दौर में प्रवेश कर रहा है। अब बाजार को माइक्रो-मार्केट की परफॉर्मेंस, घरों की सही साइज और जरूरत के मुताबिक कॉन्फ़िगरेशन, और प्रॉपर्टी की कीमत व किराये के बीच बदलते रिश्ते प्रभावित कर रहे हैं।

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भारत का रेंटल बाजार

भारतीय रियल एस्टेट मार्केट में एक नया ट्रेंड देखने को मिला है। किराये के मुकाबले प्रॉपर्टी की कीमत तेजी से बढ़ी है। आसान शब्दों में कहे तो किराये बढ़ने की रफ्तार सुस्त रही। वहीं दूसरी ओर घरों की कीमत तेजी से बढ़ी है। Magicbricks Rental Index (OND’25) के अनुसार, अक्टूबर–दिसंबर 2025 तिमाही के दौरान भारत का रेंटल हाउसिंग मार्केट पुनर्संतुलन (रीकैलिब्रेशन) के चरण में प्रवेश करता दिखा। इस अवधि में प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ने की रफ्तार और किराये के बीच अंतर बढ़ा है। जहां संपत्ति कीमतें पैन-इंडिया स्तर पर 2.2% की तेज रफ्तार से बढ़ीं, वहीं रेंटल डिमांड तिमाही-दर-तिमाही 2.4% घट गई। इसके बावजूद किरायों में 2.2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह रुझान व्यापक मंदी के बजाय यील्ड कंप्रेशन (रिटर्न में दबाव) की ओर बाजार के समायोजन को दर्शाता है, जबकि पसंदीदा माइक्रो-मार्केट्स में कीमतों की मजबूती बनी रही।

प्रॉपर्टी की कीमत तेजी से बढ़ी

रिपोर्ट का एक अहम निष्कर्ष यह है कि अधिकांश शहरों में किराये की वृद्धि की तुलना में कैपिटल वैल्यू अधिक तेजी से बढ़ी, जिससे यील्ड कंप्रेशन स्पष्ट हुआ। ग्रॉस रेंटल यील्ड के लिहाज से चेन्नई 4.16% के साथ शीर्ष पर रहा, इसके बाद अहमदाबाद 3.98% और हैदराबाद 3.93% पर रहे। बेंगलुरु और कोलकाता दोनों में लगभग समान 3.88% यील्ड दर्ज की गई। प्रमुख शहरों में यील्ड का यह अपेक्षाकृत कम अंतर एक परिपक्व होते रेंटल मार्केट की ओर इशारा करता है, जहां रिटर्न अब केवल किराये की बढ़त से नहीं, बल्कि कैपिटल एप्रिसिएशन से अधिक प्रभावित हो रहे हैं।

किराये पर छोटे घरों की जबरदस्त डिमांड

इसके अलावा, तिमाही के दौरान किरायेदारों की पसंद मध्यम आकार के घरों की ओर झुकी रही। 500 से 1,500 वर्ग फुट के यूनिट्स ने कुल रेंटल डिमांड का करीब 78% हिस्सा लिया, जो किफायत और रहने योग्य लेआउट के संतुलन की स्पष्ट मांग को दर्शाता है। सेमी-फर्निश्ड घरों का दबदबा मांग और आपूर्ति दोनों में बना रहा। कुल किरायेदार मांग का 54% और उपलब्ध लिस्टिंग्स का 55% इन्हीं का रहा, जिससे यह फॉर्मेट प्रमुख शहरों में मानक बनकर उभरा।

सस्ते किराये वाले घरों में मांग और सप्लाई में अंतर बढ़ा

यह इंडेक्स यह भी दिखाता है कि सस्ते किराये वाले घरों में मांग और सप्लाई के बीच बड़ा अंतर बढ़ रहा है। ज्यादातर मांग कम और मिड-रेंज किराये वाले घरों की है, लेकिन बाजार में जो लिस्टिंग ज्यादा हैं, वे महंगे सेगमेंट में हैं। इस वजह से कम बजट में घर तलाशने वालों के पास विकल्प कम हो रहे हैं और सही कीमत वाले घरों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।

कुल मिलाकर, मैजिकब्रिक्स रेंटल इंडेक्स OND’25 बताता है कि भारत का रेंटल हाउसिंग बाजार अब एक ज्यादा संतुलित और समझदारी वाले दौर में प्रवेश कर रहा है। अब बाजार को माइक्रो-मार्केट की परफॉर्मेंस, घरों की सही साइज और जरूरत के मुताबिक कॉन्फ़िगरेशन, और प्रॉपर्टी की कीमत व किराये के बीच बदलते रिश्ते प्रभावित कर रहे हैं।

Alok Kumr
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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