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आरबीआई का बड़ा फैसला: अब नहीं मिलेंगे नए ‘मनी चेंजर’ लाइसेंस

Forex Rules 2026: भारतीय रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा कारोबार के नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए नए मनी चेंजर लाइसेंस जारी करने पर रोक लगा दी है। जानिए डिटेल।

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आरबीआई ने विदेशी मुद्रा लेनदेन से जुड़े संस्थानों के लिए नए मानक जारी किए (तस्वीर-istock)

Photo : iStock

Forex Rules 2026 : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा यानी फॉरेन एक्सचेंज से जुड़े कारोबार के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। केंद्रीय बैंक ने नए नियम जारी करते हुए साफ कर दिया है कि अब पूरी तरह मनी चेंजर के रूप में काम करने के लिए नए लाइसेंस जारी नहीं किए जाएंगे। यह बदलाव ‘विदेशी मुद्रा प्रबंधन (अधिकृत व्यक्ति) विनियमन, 2026’ के तहत किया गया है। आरबीआई का कहना है कि इसका उद्देश्य विदेशी मुद्रा सेवाओं को ज्यादा व्यवस्थित, सुरक्षित और आसान बनाना है।

विदेशी मुद्रा कारोबार के लिए आरबीआई की अनुमति जरूरी

नए नियमों के मुताबिक अब विदेशी मुद्रा से जुड़े किसी भी प्रकार के लेनदेन के लिए संस्थानों को आरबीआई की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। यानी डॉलर, यूरो या अन्य विदेशी मुद्रा की खरीद-बिक्री करने वाली संस्थाओं को तय नियमों का पालन करना होगा। आरबीआई ने कहा कि इससे विदेशी मुद्रा कारोबार में पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्राहकों को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा कारोबार करने वाले अधिकृत डीलरों की श्रेणियों और उनके नियमों में भी बदलाव किया है। अब आवेदन प्रक्रिया को नई श्रेणियों के आधार पर व्यवस्थित किया गया है।

तीन श्रेणियों में दिए जाएंगे लाइसेंस

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक आरबीआई ने नए ढांचे के तहत विदेशी मुद्रा कारोबार करने वाली संस्थाओं को तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है। पहली श्रेणी यानी ‘अधिकृत डीलर श्रेणी-1’ में बैंक शामिल होंगे। विदेशी मुद्रा कारोबार के लिए बैंकों को इसी श्रेणी के तहत आवेदन करना होगा। बैंक पहले की तरह विदेशी मुद्रा सेवाएं दे सकेंगे, लेकिन उन्हें नए नियमों और अनुपालन प्रक्रियाओं का पालन करना होगा। दूसरी श्रेणी यानी ‘अधिकृत डीलर श्रेणी-2’ में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) और विदेशी मुद्रा कारोबार से जुड़े कुछ अन्य संस्थान शामिल किए गए हैं। ऐसे संस्थान जो पूरी तरह मनी चेंजर का काम कर रहे हैं या कम से कम दो साल से कारोबार कर रहे हैं और पिछले दो वित्त वर्षों में औसतन 50 करोड़ रुपये का वार्षिक विदेशी मुद्रा कारोबार कर चुके हैं, वे इस श्रेणी में आवेदन कर सकेंगे। तीसरी श्रेणी यानी ‘अधिकृत डीलर श्रेणी-3’ उन संस्थाओं के लिए बनाई गई है जो विदेशी मुद्रा से जुड़े नए और तकनीक आधारित उत्पाद या सेवाएं उपलब्ध कराती हैं। इसमें फिनटेक और इनोवेशन आधारित कंपनियों को शामिल किया जा सकता है।

नए मनी चेंजर लाइसेंस पर रोक

आरबीआई ने साफ कर दिया है कि अब पूरी तरह “फुल फ्लेज्ड मनी चेंजर” के रूप में काम करने के लिए नए लाइसेंस जारी नहीं किए जाएंगे। हालांकि, जिन आवेदनों की प्रक्रिया पहले से चल रही है, उन पर पुराने नियमों के अनुसार विचार किया जा सकता है। इस फैसले का मतलब है कि अब नए खिलाड़ियों के लिए केवल मनी चेंजिंग बिजनेस शुरू करना आसान नहीं होगा। आरबीआई विदेशी मुद्रा कारोबार को ज्यादा संगठित और नियंत्रित ढांचे में लाना चाहता है ताकि नियमों का बेहतर पालन हो सके।

कंपनियों के लिए नेटवर्थ की शर्त

नए नियमों के अनुसार विदेशी मुद्रा कारोबार का लाइसेंस पाने के लिए संस्थाओं का कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत पंजीकृत होना जरूरी होगा। इसके अलावा कंपनियों को आरबीआई द्वारा तय न्यूनतम नेटवर्थ यानी वित्तीय क्षमता के मानकों को भी पूरा करना होगा। आरबीआई का मानना है कि इससे केवल मजबूत और भरोसेमंद संस्थाएं ही विदेशी मुद्रा कारोबार में काम कर पाएंगी। इससे ग्राहकों का पैसा ज्यादा सुरक्षित रहेगा और वित्तीय धोखाधड़ी की संभावना कम होगी।

ग्राहकों और बाजार पर क्या असर पड़ेगा

विशेषज्ञों के मुताबिक आरबीआई के इस फैसले से विदेशी मुद्रा बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी। नियमों के आसान और स्पष्ट होने से संस्थानों के लिए अनुपालन करना आसान होगा। साथ ही ग्राहकों को भी ज्यादा सुरक्षित और बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी। हालांकि छोटे स्तर पर मनी चेंजिंग कारोबार शुरू करने की योजना बना रहे लोगों के लिए यह फैसला चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अब बाजार में उन्हीं संस्थाओं को मौका मिलेगा जो मजबूत वित्तीय स्थिति और तय मानकों को पूरा करती हों। आरबीआई का यह कदम विदेशी मुद्रा कारोबार को आधुनिक, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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Ramanuj Singh
रामानुज सिंह author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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