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बैंक प्रतिनिधियों का बदलेगा वेतन? RBI ने लाया नया प्रस्ताव

Bank Correspondents salary News: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। इसमें कहा गया है कि बैंक प्रतिनिधियों को उनके काम और जिम्मेदारियों के आधार पर दो अलग-अलग कैटेगरी में बांटा जाए।

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आरबीआई का नया प्रस्ताव: बैंक प्रतिनिधियों के लिए बड़ा बदलाव (तस्वीर-istock)

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Bank Correspondents Salary News: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए एक नया प्रस्ताव पेश किया है। सोमवार को जारी मसौदा नियमों में आरबीआई ने बैंक प्रतिनिधियों को उनके काम के आधार पर दो अलग-अलग कैटेगरी में बांटने की बात कही है। इसके साथ ही, उनके वेतन और कमीशन में समानता लाने का भी सुझाव दिया गया है। अभी तक अलग-अलग बैंक अपने-अपने तरीके से बैंक प्रतिनिधियों को भुगतान करते हैं, जिससे असमानता की स्थिति बनी रहती है।

क्या हैं बैंक प्रतिनिधि और उनकी भूमिका

बैंक प्रतिनिधि वे लोग होते हैं जिन्हें बैंकों द्वारा दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने के लिए नियुक्त किया जाता है। ये ऐसे क्षेत्रों में काम करते हैं जहां बैंक शाखाएं मौजूद नहीं होतीं या लोगों के लिए बैंक तक पहुंचना मुश्किल होता है। इनके जरिए लोग खाता खुलवाना, पैसे जमा करना, निकालना और सरकारी योजनाओं का लाभ लेना जैसे काम आसानी से कर पाते हैं। इस व्यवस्था से बैंकिंग सेवाओं की पहुंच बढ़ी है और बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी बैंकिंग सिस्टम से जुड़े हैं, जिनके पास पहले कोई खाता नहीं था।

डिटेल सिस्टम में तीन तरह के प्वाइंट का प्रस्ताव

आरबीआई ने अपने मसौदे में बैंकिंग सेवाओं के लिए तीन तरह के वितरण बिंदु (Distribution Points) तय करने का प्रस्ताव रखा है। पहला है बैंक शाखाएं, जो पारंपरिक तरीके से सेवाएं देती हैं। दूसरा है बैंक प्रतिनिधि-बैंक आउटलेट्स, जिसमें बैंक शाखाएं, एटीएम और एक्सटेंशन काउंटर शामिल हैं। तीसरा है बैंक प्रतिनिधि-बैंकिंग टचपॉइंट (बीसी-बीटी), जहां बैंक प्रतिनिधि सीधे ग्राहकों को सेवाएं देते हैं। इस वर्गीकरण का उद्देश्य बैंकिंग सेवाओं को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है, ताकि हर स्तर पर काम करने वाले लोगों की जिम्मेदारी साफ हो सके और ग्राहकों को बेहतर सेवा मिल सके।

वेतन और कमीशन में समानता पर जोर

वर्तमान में बैंक प्रतिनिधियों के लिए कोई स्पष्ट वर्गीकरण नहीं है। अलग-अलग बैंक अपने हिसाब से उन्हें कमीशन या वेतन देते हैं, जिससे कई बार असमानता देखने को मिलती है। आरबीआई का मानना है कि अगर काम के आधार पर इन्हें श्रेणियों में बांटा जाएगा, तो उनके भुगतान में भी समानता लाई जा सकेगी। इससे बैंक प्रतिनिधियों को बेहतर और स्थिर आय मिल सकती है, जिससे उनका मनोबल भी बढ़ेगा।

देशभर में बड़ी संख्या में बैंक प्रतिनिधि

जून 2025 तक देशभर में 16 लाख से अधिक बैंक प्रतिनिधि काम कर रहे थे। यह संख्या दिखाती है कि बैंकिंग सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने में इनकी कितनी अहम भूमिका है। खासकर ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में, जहां बैंक शाखाएं कम हैं, वहां ये प्रतिनिधि ही लोगों के लिए बैंक का चेहरा बनते हैं।

जनता से मांगे गए सुझाव

आरबीआई ने इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले सभी संबंधित संस्थाओं और आम जनता से सुझाव और प्रतिक्रिया मांगी है। इसके लिए 5 मई 2026 तक का समय दिया गया है। इसका मतलब है कि इस मसौदे में बदलाव की संभावना भी है, ताकि इसे और बेहतर बनाया जा सके।

क्या होगा इसका असर

अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो बैंकिंग सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिल सकता है। बैंक प्रतिनिधियों को बेहतर वेतन और स्पष्ट जिम्मेदारियां मिलेंगी, जिससे वे अधिक प्रभावी ढंग से काम कर पाएंगे। साथ ही, ग्राहकों को भी अधिक भरोसेमंद और समान स्तर की सेवाएं मिलेंगी। कुल मिलाकर, यह कदम देश में वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को और मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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