रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने अपनी ताज़ा मौद्रिक नीति (Monetary Policy) का ऐलान कर दिया है। इस बार केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में 0.25% की कटौती करते हुए रेपो रेट को 5.50% से घटाकर 5.25% कर दिया। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने तीन दिन चली एमपीसी (MPC) की बैठक के बाद यह बड़ा फैसला घोषित किया। रेपो रेट में कमी का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है, क्योंकि इससे होम लोन, ऑटो लोन और बिजनेस लोन सस्ते होने की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही, RBI ने आर्थिक वृद्धि, महंगाई और बैंकिंग सिस्टम से जुड़ी कई अहम घोषणाएं भी कीं।
इस पूरी नीति घोषणा में कई महत्वपूर्ण पॉइंट्स शामिल हैं, जो देश की आर्थिक दिशा का संकेत देते हैं। नीचे दिए गए 10 बड़े अपडेट आपको पूरी पॉलिसी को समझने में मदद करेंगे।
RBI MPC के 10 बड़े फैसले
1. रेपो रेट में 0.25% की कटौती
RBI ने रेपो रेट को 5.50% से घटाकर 5.25% कर दिया। यह तीन तिमाहियों में पहली कटौती है। रेपो रेट कम होने से बैंक भी अपनी लेंडिंग दरें कम कर सकते हैं, जिससे होम लोन और कार लोन सस्ते हो सकते हैं।
2. इकनॉमी की रफ्तार 6 तिमाहियों में सबसे तेज
RBI के अनुसार, भारत का वास्तविक GDP (Real GDP) Q2 2025-26 में 8.2% बढ़ा जो पिछले छह तिमाहियों में सबसे तेज वृद्धि है। घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है और इंडस्ट्री व सर्विस सेक्टर दोनों ने बेहतर प्रदर्शन किया है।
3. GVA में 8.1% की बढ़ोतरी
सप्लाई साइड की बात करें तो सकल मूल्य वर्धन (GVA) में 8.1% की वृद्धि दर्ज हुई। इसका मतलब है कि कृषि, उद्योग और सेवाओं के क्षेत्रों में गतिविधि अच्छी रही और अर्थव्यवस्था के बुनियादी सेक्टर मजबूत हैं।
4. महंगाई (CPI) का अनुमान घटाकर 2% किया गया
RBI ने बताया कि अक्टूबर 2025 में CPI महंगाई ऐतिहासिक रूप से न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई। खाद्य पदार्थों की कीमतों में गिरावट के कारण महंगाई तेजी से नीचे आई है। इसी वजह से RBI ने पूरे वित्त वर्ष की CPI महंगाई का अनुमान 2% कर दिया है, जो पहले 2.6% था।
5. कोर इन्फ्लेशन भी घटा
कोर महंगाई, यानी खाने-पीने और ईंधन जैसी अस्थिर चीज़ों को हटाकर मापी जाने वाली महंगाई भी 2.6% तक गिर गई है। कीमती धातुओं की कीमतों में कमी ने भी महंगाई कम करने में मदद की है।
6. OMO और डॉलर स्वैप से तरलता बढ़ेगी
RBI ने दिसंबर में 1 लाख करोड़ रुपये के OMO (Open Market Operations) के जरिए बॉन्ड खरीदने का ऐलान किया है। साथ ही $5 बिलियन का USD/INR स्वैप भी किया जाएगा, जिससे बैंकिंग सिस्टम में ज्यादा तरलता आएगी और लोन देने की क्षमता बढ़ेगी।
7. CAD में कमी, लेकिन ट्रेड डेफिसिट बढ़ा
भारत का चालू खाता घाटा (CAD) इस साल Q2 में GDP के 1.3% पर आ गया, जो पिछले साल 2.2% था। हालांकि, मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट घटे हैं और इंपोर्ट बढ़ने से ट्रेड डेफिसिट में बढ़ोतरी देखी गई है।
8. लंबित शिकायतों के निपटारे के लिए अभियान
1 जनवरी 2026 से RBI दो महीने का एक विशेष अभियान चलाएगा। इसका लक्ष्य RBI ओम्बड्समैन के पास पेंडिंग शिकायतों को जल्दी निपटाना है, ताकि ग्राहक सेवा में सुधार हो।
9. आर्थिक वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7.3% किया
अच्छे मॉनसून, मजबूत GST कलेक्शन, उद्योगों की अच्छी बहीखाता स्थिति और अनुकूल आर्थिक माहौल को देखते हुए RBI ने GDP ग्रोथ फोरकास्ट को बढ़ाकर 7.3% कर दिया है।
10. विदेशी मुद्रा भंडार 686 अरब डॉलर पर
भारत का फॉरेक्स रिजर्व बढ़कर 686 बिलियन डॉलर हो गया है, जो लगभग 11 महीने के आयात के लिए पर्याप्त है। यह भारत की मैक्रो इकनॉमिक स्थिरता का मजबूत संकेत है।
