RBI Monetary Policy: RBI की 6 जून से होने वाली मौद्रिक नीति की तीन दिवसीय बैठक शुरू हो गई है। कम होती महंगाई और अप्रैल में आरबीआई के रुख को देखते हुए इस बार भी उम्मीद है कि वह महंगे कर्ज का रुख नहीं अपनाएगा। और आरबीआई रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा। अगर ऐसा होता है तो होम लोन, कार लोन लेने वाले ग्राहकों को बड़ा बूस्ट मिल सकता है। साथ ही कारोबारी क्षेत्र में डिमांड पैदा हो सकती है। जिसका फायदा नई नौकरियों के रूप में हो सकता है। इसे देखते हुए 8 जून को आरबीआई रेपो रेट को 6.5 फीसदी पर बरकरार रख सकता है।
ब्याज दरों में पहले ही हो चुकी है बड़ी बढ़ोतरी
बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंध निदेशक रजनीश कर्नाटक ने न्यूज एजेंसी को बताया कि मैं सिर्फ यही कहूंगा कि रिजर्व बैंक पहले ही 2.5 फीसदी रेपो रेट बढ़ा चुका है। ऐसे में हम रेपो रेट में बढ़ोतरी की बिल्कुल उम्मीद नहीं कर रहे हैं क्योंकि यह पहले ही काफी बढ़ चुकी है और सबसे अहम बात है कि महंगाई में कमी आई है।
आरबीआई ने अप्रैल 2023 से पहले बीते एक साल में महंगाई पर लगा लगाने के लिए रेपो रेट में करीब 2.5 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। जिसकी वजह से महंगाई तो नियंत्रण में आई लेकिन ग्रोथ रेट पर असर का डर सताने लगा था। जिसके बाद से यह उम्मीद की जा रही है कि चूंकि अब रिटेल महंगाई दर 18 महीनों के निचले स्तर 4.7 फीसदी पर आ चुकी है। और वह आरबीआई के सामान्य स्तर 6 फीसदी से नीचे हैं, उसे देखते हुए आरबीआई रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं कर सकता है।
अल नीनो और मानसून पर रहेगी आरबीआई की नजर
आरबीआई के लिए जून और जुलाई का महीना बेहद अहम होने वाला है। इस क्योंकि मानसून की चाल और अल नीनो इफेक्ट महंगाई पर असर डालेंगे। अगर मानसून की चाल सामान्य नहीं रहती है तो महंगाई बढ़ने की आशंका रहेगी। उस वक्त आरबीआई रेपो रेट पर कोई अहम फैसला ले सकता है। ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि आरबीआई 8 जून को ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा।
